मध्य प्रदेश / भाजपा की विधानसभा चुनाव के परिणाम ने बढाई मुश्किलें



loksabha election 2019 BJP condition in MP
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loksabha election 2019 BJP condition in MP

  • 2014 में 29 में से 27 सीटें जीतीं थी भाजपा ने, कांग्रेस जीती थी 2 सीटों पर
  • विधानसभा चुनाव में 230 सीटों में से 109 पर ही जीत सकी भाजपा

Dainik Bhaskar

Mar 16, 2019, 05:42 PM IST

भोपाल। लोकसभा सीटों के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्यों में शामिल मध्यप्रदेश में करीब तीन महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव के परिणामों के मद्देनजर इस बार भारतीय जनता पार्टी की राह मुश्किलों से भरी हुई है। 

 

पिछले करीब डेढ़ दशक से भाजपा के गढ़ बने हुए मध्यप्रदेश में पिछले लोकसभा चुनाव में 29 में से 27 सीटें भाजपा की झोली में गईं थीं। एक सीट रतलाम-झाबुआ पर तत्कालीन सांसद दिलीप सिंह भूरिया के निधन के बाद हुए उपचुनाव में हालांकि ये सीट कांग्रेस के कब्जे में चली गई। इसके बाद पिछले साल दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव में कुल 230 विधानसभा सीटों में से भाजपा को मात्र 109 सीटों से संतोष करना पड़ा। वहीं कांग्रेस ने 114 पर जीत के साथ प्रदेश में सरकार बनाई। प्रदेश में 15 साल बाद सत्ता में वापसी के साथ ही कांग्रेस अब लोकसभा में भी विधानसभा के जैसा प्रदर्शन करने को लेकर उत्साहित है।

 

सामंजस्य बनाने की कोशिश: पार्टी सूत्रों के मुताबिक चुनावी मैदान में उतरने के पहले पार्टी ने जमीनी स्तर पर मजबूती को लेकर ठोस कदम उठाए हैं। पार्टी प्रत्याशी चयन से लेकर निचले स्तर तक सामंजस्य बनाने की दिशा में काम कर रही है। पार्टी सूत्रों ने दावा किया कि भाजपा पिछले लोकसभा चुनाव जैसा परिणाम दोहराएगी और उन सीटों पर भी काबिज होगी, जिनके बारे में भाजपा के न जीत पाने का मिथक बना हुआ है। पिछले विधानसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच प्रदेश की आदिवासी सीटें भाजपा की प्राथमिकता में शामिल हो गई हैं। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जहां एक ओर प्रदेश में लोकसभा चुनाव का आगाज धार से हुआ, वहीं पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने इसकी शुरुआत शहडोल से की। 

 

आदिवासी क्षेत्रों में कमजोर स्थिति: धार लोकसभा से सटी झाबुआ-रतलाम संसदीय क्षेत्र की आदिवासी सीटों पर भी पार्टी कमजोर स्थिति में हैं, वहीं शहडोल से सटे मंडला संसदीय क्षेत्र में भी पार्टी के लिए स्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं। धार की आठ विधानसभा सीटों में से छह पर कांग्रेस और दो पर भाजपा का कब्जा है। वहीं शहडोल की आठ विधानसभा में से चार-चार पर कांग्रेस और भाजपा काबिज हैं। दूसरी ओर प्रदेश की अनुसूचित जनजाति की सीटों पर भाजपा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहारे मजबूती पाने की कोशिश में है। प्रदेश के आदिवासी इलाकों में आरएसएस के कई संगठन लंबे समय से कार्यरत हैं, ऐसे में इन संगठनों की कई सीटों पर गहरी पैठ बनी हुई है।

 

चार चरणों में होगा मतदान

  1. मध्यप्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटों के लिए चुनाव चार चरणों में होगा। सात चरणों में होने वाले लोकसभा चुनावों में चौथे, पांचवें, छठवें और सातवें चरण में सभी 29 लोकसभा क्षेत्रों में चुनाव होंगे। प्रदेश में चौथे चरण में 6 लोकसभा क्षेत्र सीधी, शहडोल, जबलपुर, बालाघाट, मण्डला और छिन्दवाड़ा में 29 अप्रैल को मतदान होगा। 
  2. पांचवे चरण में सात लोकसभा क्षेत्र टीकमगढ़, दमोह, सतना, रीवा, खजुराहो, होशंगाबाद और बैतूल लोकसभा क्षेत्र में छह मई को चुनाव होंगे। 
  3. छठवें चरण में आठ लोकसभा क्षेत्र मुरैना, भिंड, ग्वालियर, गुना, सागर, विदिशा, भोपाल और राजगढ़ में 12 मई को मतदान होगा। 
  4. सातवें और अन्तिम चरण में आठ लोकसभा क्षेत्र देवास, उज्जैन, इंदौर, धार, मन्दसौर, रतलाम, खरगौन और खण्डवा में 19 मई को मतदान होगा।
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