मप्र बजट / स्वास्थ्य और शिक्षा पर जोर, शहरों में डीजल बसों के स्थान पर इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी



Madhya Pradesh Budget 2019
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Madhya Pradesh Budget 2019

  • वर्ष 2023 तक भोपाल और इंदौर में मेट्रो ट्रेन सेवा शुरू हो जायेगी
  • 7 स्मार्ट सिटी के अतिरिक्त अन्य 9 शहरों को माडल सिटी के रूप में विकसित किया जायेगा
  • 378 नगरीय निकायों में हर घर में लगेगें नल कनेक्शन
  • भोपाल और इंदौर को मेट्रोपोलिटन एरिया के रूप में विकसित किया जायेगा

Dainik Bhaskar

Jul 10, 2019, 04:40 PM IST

भोपाल। मध्यप्रदेश की लगभग छह माह पुरानी कांग्रेस सरकार के वित्त मंत्री तरुण भनोत की ओर से आज विधानसभा में वित्त वर्ष 2019 20 के लिए पेश किए गए बजट में स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं पर भी काफी जोर दिया गया है। वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि स्वस्थ समाज ही सुखी और समृद्ध हो सकता है। बीते 15 वर्षों से यह बताया जा रहा था कि राज्य बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर आ गया है। लेकिन पंद्रहवें वित्त आयोग ने इस संबंध में आइना दिखा दिया है। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में देश की औसत के सापेक्ष राज्य में सुधार नहीं होना गंभीर विषय है। 

 

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जनता को उपयुक्त स्वास्थ्य सुविधाएं और स्वच्छ वातावरण उपलब्घ कराना है। सरकार मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर और सकल प्रजनन दर कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि राज्य में छह नवीन सिविल अस्पताल, 70 नवीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 329 नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 308 नवीन उप स्वास्थ्य केंद्रों के स्थापना की कार्ययोजना बनायी गयी है। 

 

वित्त मंत्री ने बताया कि चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बैकलॉग के 1065 पदों पर चयन और 525 एमबीबीएस चिकित्स्कों की बंधपत्र के अनुक्रम में पदस्थापना की कार्रवाई की जा रही है। नागरिकों के स्वास्थ्य के संबंध में स्वास्थ्य का अधिकार लागू करने का चुनौतीपूर्ण निर्णय लिया गया है। राज्य के अधिसूचित क्षेत्रों में योग्य चिकित्सकों की पदस्थापना के लिए मुख्यमंत्री सुषेण संजीवनी योजना प्रारंभ करने का निर्णय भी लिया गया है।

 

उन्होंने कहा कि इस वर्ष से तीन नए सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय प्रारंभ करने और विद्यमान महाविद्यालयों में सीट वृद्धि के साथ कुल 850 सीटों की वृद्धि होगी। चिकित्सा क्षेत्र में सुधार संबंधी अन्य कदमों का भी जिक्र उन्होंने अपने भाषण में किया। श्री भनोत ने कहा कि चिकित्सा से जुड़े कार्यक्रमों के लिए दस हजार 472 करोड़ रूपयों का प्रावधान किया गया है। महिलाओं और बच्चों के विकास कार्यक्रमों के लिए पांच हजार दो सौ 93 करोड़ रूपयों का प्रावधान किया गया है।


वित्त मंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में उठाए जाने वाले कदमों का जिक्र किया और कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 24 हजार 499 करोड़ रूपयों के बजट का प्रावधान है, जो पिछले वर्ष से दो हजार 775 करोड़ रूपए अधिक है। बजट में सरकार ने किसी नए कर का प्रावधान नहीं किया है। मंत्री ने कहा कि सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने के लिए अधिक संसाधन जुटाने प्रतिबद्ध है। इसके लिए आबकारी, परिवहन, पंजीयन और खनिज क्षेत्रों में नवीन नीतियों के माध्यम से अतिरिक्त राजस्व जुटाने के निर्णय लिए गए हैं। 


शहरों में घर-घर लगेंगे नल कनेक्शन : नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्द्धन सिंह ने कहा है कि जल का अधिकार अधिनियम में प्रदेश के सभी 378 नगरीय निकाय के अंतर्गत घर-घर नल कनेक्शन दिया जाकर प्रतिदिन जल प्रदाय किया जायेगा। इस वर्ष के बजट में शहरों में विकास के लिए विभाग को 15 हजार 666 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह गत वर्ष की तुलना में 31 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा है कि बजट में सभी क्षेत्रों में विकास का ध्यान रखा गया है।

 

जयवर्द्धन सिंह ने कहा कि वर्ष 2023 तक भोपाल और इंदौर में मेट्रो ट्रेन सेवा शुरू हो जायेगी। उन्होंने कहा है कि प्रदेश की 7 स्मार्ट सिटी के अतिरिक्त अन्य 9 शहरों को माडल सिटी के रूप में विकसित किया जायेगा। बजट में किये गये प्रावधान अनुसार बड़े शहरों में संचालित डीजल बसों के स्थान पर इलेक्ट्रिक बसें चलाई जायेंगी। इससे शहर में प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि शहर में महिलाओं को ट्रेनिंग देकर ई-रिक्शा दिलवाये जायेंगे। भोपाल और इंदौर को मेट्रोपोलिटन एरिया के रूप में विकसित किया जायेगा। उन्होंने कहा है कि शहरों के आवासहीनों और झुग्गी वासियों को आवासीय भूमि के पट्टे दिये जायेंगे।

 

पीएचई विभाग को मिलेगी 46 प्रतिशत अधिक राशि : लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सुखदेव पांसे ने कहा है कि इस वर्ष प्रदेश के बजट प्रस्ताव में पेयजल प्रबंधन के लिए एक हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि बजट में ग्रामीण पेयजल व्यवस्था के लिए 4 हजार 366 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो गत वर्ष की तुलना में 46 प्रतिशत अधिक है। राज्य सरकार ने जल के सम्यक उपयोग, जल स्त्रोतों के संरक्षण और पेयजल गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 'जल का अधिकार अधिनियम' बनाने की कार्यवाही की है। इससे आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित होगा।

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