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फ्लैशबैक 2019 / मध्य प्रदेश: कांग्रेस के खांटी नेताओं की हार और सुमित्रा ताई का चुनाव मैदान छोड़ जाने के लिए याद किया जाएगा यह साल

2019 की शुरुआत में लोकसभा चुनाव में दिग्विजय और प्रज्ञा के बीच मुकाबला सुर्खियां बटोरता रहा। 2019 की शुरुआत में लोकसभा चुनाव में दिग्विजय और प्रज्ञा के बीच मुकाबला सुर्खियां बटोरता रहा।
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2019 की शुरुआत में लोकसभा चुनाव में दिग्विजय और प्रज्ञा के बीच मुकाबला सुर्खियां बटोरता रहा।2019 की शुरुआत में लोकसभा चुनाव में दिग्विजय और प्रज्ञा के बीच मुकाबला सुर्खियां बटोरता रहा।

  • भोपाल सांसद प्रज्ञा ठाकुर बयानों को लेकर चर्चाओं में रहीं, संसद में माफी भी मांगनी पड़ी 
  • प्रदेश सरकार के मंत्री सिंघार और दिग्विजय सिंह के बीच विवाद भी सुर्खियां बटोरता रहा 
  • इंदौर से आठ बार की सांसद सुमित्रा महाजन ने टिकट में देरी होने पर चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया

दैनिक भास्कर

Dec 30, 2019, 04:38 AM IST

भोपाल. मध्य प्रदेश में साल 2019 में कुछ ऐसी राजनीतिक घटनाएं हुईं, जो याद की जाएंगी। भोपाल सांसद प्रज्ञा ठाकुर की लोकसभा चुनाव में जीत और दिग्विजय सिंह की हार। गुना की परंपरागत सीट से ज्योतिरादित्य सिंधिया की हार और प्रज्ञा सिंह ठाकुर के विवादित बयान चर्चाओं में बने रहे। ऐसी ही प्रमुख राजनीतिक घटनाओं के बारे में 2019 की एक रिपोर्ट...

  • जब देश की सबसे चर्चित सीट बन गई भोपाल

    लोकसभा चुनाव में भोपाल से भाजपा ने प्रज्ञा ठाकुर को उतारा तो कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह को टिकट देकर मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया। यहां प्रज्ञा ठाकुर ने दिग्विजय को करारी शिकस्त दी। हालांकि, भोपाल भाजपा की परंपरागत सीट रही है। यहां से पार्टी लंबे वक्त से चुनाव जीतती आ रही है। प्रज्ञा ने दिग्विजय को 3,64,822 वोटों के अंतर से हराया। 15 साल बाद चुनाव लड़ने मैदान में उतरे दिग्विजय को तगड़ा झटका लगा। चुनाव हारने के बाद दिग्विजय ने कहा था कि देश में महात्मा गांधी के हत्यारे की विचारधारा की जीत हुई है, जबकि गांधी की विचारधारा हार गई है। यह मेरे लिए चिंता का विषय है।

  • कमलनाथ सरकार ने अटकलों के बीच फ्लोर टेस्ट पास किया

    कमलनाथ सरकार ने अटकलों के बीच फ्लोर टेस्ट पास किया

    सीएम कमलनाथ फिलहाल पूरी मजबूती से मप्र में सरकार चला रहे हैं।

    17 दिसंबर 2018 को शपथ लेने वाली कांग्रेस की कमलनाथ सरकार की सांसें छह महीने तक अटकीं रहीं। दरअसल, भाजपा की तरफ से लगातार बयानबाजी होती रही कि जब चाहेंगे कांग्रेस सरकार गिरा देंगे। मई 2019 में लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के बाद लगा कि कमलनाथ सरकार संकट में है। लेकिन सीएम कमलनाथ ने भाजपा को झटका दिया और जुलाई में बजट सत्र के आखिरी दिन फ्लोर टेस्ट करा लिया और पास भी कर लिया। विधानसभा में दंड विधि संशोधन विधेयक को लेकर मत विभाजन कराया गया, जिसमें कमलनाथ सरकार के पक्ष में 122 वोट पड़े। 

    खास बात यह रही कि भाजपा के 2 विधायकों ने अपनी ही पार्टी को झटका देते हुए कमलनाथ सरकार का साथ दिया। भाजपा के मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी और शहडोल के ब्योहारी से विधायक शरद कौल ने क्रॉस वोटिंग की। इसके बाद कमलनाथ सरकार को गिराने को लेकर भाजपा की बयानबाजी बंद हो गई। 

  • सांसद बनने के बाद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के विवादित बयान 

    सांसद बनने के बाद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के विवादित बयान 

    भोपाल की सांसद प्रज्ञा ठाकुर साेशल मीडिया पर भी लगातार ट्रेंड होती रहीं।

    भोपाल सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने मई में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद और पहले अपने विवादित बयानों से लगातार सुर्खियों में रहीं। कभी गोडसे को देशभक्त बताकर तो कभी कार्यकर्ताओं से सफाई अभियान को लेकर दिए बयान की वजह से। गांधी के हत्यारे गोडसे को देशभक्त बताने के बयान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि इसे बयान के लिए वो उन्हें कभी दिल से माफ नहीं कर पाएंगे। 

    सांसद बनने के बाद उन्होंने सीहोर में अपने कार्यकर्ताओं से कहा था, ''ध्यान से सुन लो, हम नाली साफ करवाने के लिए नहीं बने हैं। आपका शौचालय साफ़ कराने के लिए बिल्कुल नहीं बनाए गए हैं। हम जिस काम के लिए बनाए गए हैं वो काम हम ईमानदारी से करेंगे।'' साध्वी प्रज्ञा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। 
    शीतकालीन सत्र के दौरान सांसद प्रज्ञा ने एक बार फिर से महात्मा गांधी की हत्या के दोषी नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था, जिसके बाद संसद में जमकर हंगामा मचा था। एक चुनावी सभा के दौरान प्रज्ञा ने कहा था कि उनके श्राप से हेमंत करकरे की मौत हुई। इस पर भी काफी विवाद हुआ। 

  • आठ बार से इंदौर की सांसद ताई ने चुनाव लड़ने से इंकार किया

    आठ बार से इंदौर की सांसद ताई ने चुनाव लड़ने से इंकार किया

    इंदौर की पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन ताई का भाजपा ने टिकट काट दिया था।

    इंदौर संसदीय क्षेत्र से लगातार आठ बार से सांसद चुनी गईं सुमित्रा महाजन लोकसभा चुनाव में टिकट में देरी होने पर चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया। मई में हुए लोकसभा चुनाव में उनके ही शिष्य माने जाने वाले शंकर ललवानी को टिकट दिया गया और उन्होंने इंदौर से बड़ी जीत दर्ज की। शुरुआत में मामूली कार्यकर्ता के रूप में भाजपा की सेवा करने वाली ताई काफी संघर्ष के बाद लोकसभा अध्यक्ष तक पहुंचीं। मीरा कुमार के बाद महाजन लोकसभा अध्यक्ष बनने वाली दूसरी महिला हैं। महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के चिपलुन में 12 अप्रैल 1943 में जन्मी महाजन ने 1982 में इंदौर नगर निगम के पार्षद के तौर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। इसके बाद वे 1984-85 तक शहर की उप महापौर भी रहीं। 
    1989 में ताई पहली बार इंदौर से चुनावी मैदान में उतरीं थीं। उनका सामना कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रकाशचंद्र सेठी से था। इस चुनाव में उन्होंने सेठी से कहा था कि वह इंदौर की बहू के रूप में चुनावी लड़ रही हैं। इस नाते उन्हें इंदौर की चाबी सौंप दी जाए। इस चुनाव में ताई ने अच्छे अंतराल से जीत हासिल की। इसके बाद अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 

  • कभी कांग्रेसी रहे भाजपा के केपी सिंह यादव से हारे सिंधिया 

    कभी कांग्रेसी रहे भाजपा के केपी सिंह यादव से हारे सिंधिया 

    ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना से लोकसभा चुनाव हार गए।

    2002 से 2014 तक लगातार चार बार गुना लोकसभा सीट से चुनाव जीतते आ रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी पांचवीं चुनावी लड़ाई भारतीय जनता पार्टी के कृष्णपाल सिंह यादव से 1,25,549 वोटों के भारी अंतर से हार गए। 2019 के चुनावों में गुना लोकसभा सीट के नतीजे मध्यप्रदेश कांग्रेस के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी पार्टी के लिए निराशा का कारण बन कर उभरे। ख़ास तौर पर इसलिए क्योंकि इस सीट को सिंधिया परिवार का गढ़ माना जाता रहा है। 

    मध्यप्रदेश के अस्तित्व में आने के बाद से ही विजयाराजे सिंधिया, माधवराव सिंधिया और ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत सिंधिया परिवार के अलग-अलग सदस्य इस सीट से जीतते रहे थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया की ये हार इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि आजादी के बाद ग्वालियर राजघराने या 'महल' के किसी व्यक्ति की पहली चुनावी हार थी। सिंधिया परिवार के गढ़ में पहली बार सेंध लगाने वाली भाजपा की जीत और ज्योतिरादित्य सिंधिया की ऐतिहासिक हार ने देशभर में सुर्खियां बटोरीं। हालांकि इससे मध्यप्रदेश की राजनीति में सिंधिया परिवार का महत्व कम नहीं हुआ, लेकिन इस हार ने सिंधिया को निराश कर दिया।

  • आकाश के बल्ला मारने पर पीएम ने कहा था- ये व्यवहार बर्दाश्त नहीं

    आकाश के बल्ला मारने पर पीएम ने कहा था- ये व्यवहार बर्दाश्त नहीं

    विधायक आकाश विजयवर्गीय भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे हैं।

    26 जून को इंदौर-3 क्षेत्र से भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय ने नगर निगम के एक अधिकारी को एक जर्जर भवन गिराए जाने पर बल्ले से मारने का वीडियो वायरल हो गया था। बल्ला से पीटने का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने आकाश को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई और वह रिहा हो गए।

    इस घटना से नाराज पीएम मोदी संसदीय दल की बैठक के दौरान साफ कर दिया था कि आकाश विजयवर्गीय का व्यवहार अस्वीकार्य है, और उनके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों से कहा था, "अगर हमें एक विधायक खोना पड़ता है, तो यही सही... ऐसा दोबारा होने से रोकने के लिए हमें उदाहरण प्रस्तुत करना होगा...।"  निगम अधिकारी की क्रिकेट बैट से पिटाई किए जाने का ज़िक्र 'इंदौर की घटना' के रूप में करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "वह कोई भी हों, किसी के भी पुत्र हों, इस तरह का घमंड, व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए...।" 

  • मंत्री सिंघार ने दिग्विजय को कहा- ब्लैकमेलर नंबर वन

    मंत्री सिंघार ने दिग्विजय को कहा- ब्लैकमेलर नंबर वन

    वन मंत्री उमंग सिंघार और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के बीच विवाद हुआ था।

    कमलनाथ सरकार में वन मंत्री उमंग सिंघार ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था और उन्हें 'ब्लैकमेलर नंबर वन' तक कह डाला था। उन्होंने दिग्विजय पर पर्दे के पीछे से सरकार चलाने का आरोप लगाया था। उमंग ने दिग्विजय के अवैध रेत उत्खनन और शराब कारोबार में शामिल होने को लेकर पर्दे के पीछे से सरकार चलाने के आरोप लगाया था। इस पर दिग्विजय ने चुप्पी साध रखी थी, उन्होंने सिंघार के चाय के निमंत्रण पर केवल इतना ही कहा था कि वह कड़वी चाय नहीं पीते हैं। सिंघार-दिग्विजय विवाद बढ़ने पर मामला कांग्रेस की अनुशासन समिति को भेजा गया था। जिसमें उमंग को दोषी माना गया था। 
    सिंघार के बयानों के समर्थन में आई भाजपा ने सवाल खड़े किए थे। भाजपा ने कहा था कि उमंग के आरोपों की सच्चाई सामने आनी चाहिए।

  • विधायक प्रहलाद लोधी को सजा, निष्कासन, फिर बहाली

    विधायक प्रहलाद लोधी को सजा, निष्कासन, फिर बहाली

    भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है।

    पवई से भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी को तहसीलदार से पिटाई के एक पुराने मामले में भोपाल की स्पेशल कोर्ट ने दोषी मानते हुए 2 साल की सजा सुनाई थी। जिस पर जबलपुर हाइकोर्ट ने स्टे दे दिया था। मामले में लोधी को जमानत भी मिल गई थी, लेकिन मध्यप्रदेश विधानसभा के स्पीकर एनपी प्रजापति ने विधानसभा से प्रहलाद लोधी की सदस्यता को रद्द करते हुए सदन में एक पद रिक्त होने की सूचना चुनाव आयोग को भेज दी थी। इसे लेकर भाजपा और कांग्रेस में जमकर सियासत भी हुई। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा था कि भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता खत्म करने का फैसला राजनीतिक बदले की भावना से लिया गया था। 
    बाद में प्रहलाद लोधी को सुप्रीम कोर्ट से उनके पक्ष में फैसला आया और मप्र सरकार को झटका लगा था। इसके बाद शीतकालीन सत्र में विधानसभा स्पीकर ने लोधी की सदस्यता को फिर से बहाल कर दिया।

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