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सीहोर / पेशवाकालीन स्वयंभू चिंतामन गणेश की दाेपहर 12 बजे हुई महाआरती; 10 दिवसीय मेला शुरू



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  • महिला-पुरुष श्रद्धालुओं अलग-अलग कतारों में लगने की व्यवस्था की गई है
  • 10 दिनों तक श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह में प्रवेश पूरी तरह से बंद रखा गया है

Dainik Bhaskar

Sep 02, 2019, 03:47 PM IST

सीहोर. पेशवाकालीन स्वयंभू चिंतामन गणेश मंदिर में सोमवार से गणेशोत्सव शुरू हो गया। मंदिर के किनारे की तरफ मेला स्थल बनाया गया है। जहां पर प्रसादी के अलावा खाद्य सामग्री की दुकानों के अलावा महिलाओं और बच्चों के खेल-खिलौने की दुकानें लगी हैं। सुबह से ही श्री गणेश के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा है।  

 

दर्शन के लिए महिला और पुरुष वर्ग की अलग-अलग कतारें लगी हैं। बुधवार और रविवार को जब श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ेगी। उस दिन श्रद्धालुओं को अधिक घूमकर पैदल दर्शन करने जाना होगा, इसके लिए भी प्रशासन ने होल्डअप एरिया निर्धारित कर लिया है।


मंदिर के प्रबंधक पं. नरेंद्र व्यास और पं. चारूचंद्रा व्यास ने बताया कि सोमवार को दोपहर 12 बजे श्री गणेश चतुर्थी पर जन्म महाआरती की गई। इसके साथ ही 10 दिनों तक श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह में प्रवेश पूरी तरह से बंद रखा गया है। जन्म महाआरती के साथ ही यहां 10 दिवसीय मेला शुरू हो गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के यहां मंदिर में दर्शन सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक होंगे। दिन के 12 बजे और रात 9 बजे आरती होगी। 

 

इसलिए है मंदिर का विशेष महत्व 
सीहोर के चिंतामन गणेश मंदिर का अपना पौराणिक महत्व है। बताया जाता है कि देश के चार स्वयंभू मंदिरों में से यह एक है। प्रदेश के अलावा देश के अन्य प्रांतों से भी यहां श्रद्धालु आते हैं। चिंतामन सिद्ध भगवान गणेश की देश में चार स्वयं भू-प्रतिमाएं हैं। इनमें से एक रणथंभौर सवाई माधोपुर राजस्थान, दूसरी उज्जैन स्थित अवन्तिका, तीसरी गुजरात में सिद्धपुर और चौथी सीहोर में चिंतामन गणेश मंदिर में विराजित हैं। यहां साल भर लाखों श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन करने आते हैं।

 

सीवन के कमल पुष्प से बने हैं चिंतामन..

प्राचीन चिंतामन सिद्ध गणेश को लेकर पौराणिक इतिहास है। इस मंदिर का इतिहास करीब दो हजार वर्ष पुराना है। युति है कि सम्राट विक्रमादित्य सीवन नदी से कमल पुष्प के रूप में प्रकट हुए भगवान गणेश को रथ में लेकर जा रहे थे। सुबह होने पर रथ जमीन में धंस गया। रथ में रखा कमल पुष्प गणेश प्रतिमा में परिवर्तित होने लगा। प्रतिमा जमीन में धंसने लगी। बाद में इसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया। आज भी यह प्रतिमा जमीन में आधी धंसी हुई है।  

 

प्रतिदिन रूप बदलेंगे..

गणेशोत्सव में गणेश प्रतिदिन रूप बदलेंगे। भगवान का नित्य नया श्रृंगार किया जाएगा। यहां 10 दिन तक भव्य मेला का आयोजन किया जा रहा है। मेले में इस वर्ष सागर व भोपाल आदि के बड़े झूले और दुकानें, मनोरंजक आकर्षक आइटम मेले की शोभा बढ़ाएंगे।

 

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