महाभारत 2019: नॉर्थ-ईस्ट में 7 राज्य, 11 सांसद, 9 दलों को साथ लेकर लड़ेगी भाजपा / महाभारत 2019: नॉर्थ-ईस्ट में 7 राज्य, 11 सांसद, 9 दलों को साथ लेकर लड़ेगी भाजपा

उत्तर-पूर्व का सियासी मिजाज यहां की चक्करदार पहाड़ियों जैसा ही जटिल है

Bhaskar News

Sep 14, 2018, 09:51 AM IST
Mahabharat Bjp planning for north east state

  • भाजपा ने 9 बड़े दलों के साथ बनाया है नार्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस
  • असम को छोड़कर बाकी सात राज्यों में लोकसभा की सिर्फ 11 सीटें

गुवाहाटी. उत्तर-पूर्व का सियासी मिजाज यहां की चक्करदार पहाड़ियों जैसा ही जटिल है। यहां असम को छोड़ बाकी सात राज्यों में लोकसभा की सिर्फ 11 सीटें हैं। इनमें मिजोरम को छोड़कर बाकी राज्यों में नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (नेडा) सरकार में है। नेडा जो भाजपा ने 9 बड़े दलों के साथ बनाया है। यहां की सरकारों के प्रदर्शन पर तय होगा कि 2019 में भाजपा चीन, भूटान, म्यांमार व बांग्लादेश की सरहदों को छूते इस हिस्से में कहां तक कामयाब होती है।

राजनीतिक विश्लेषक दिलीप कुमार शर्मा का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी की कथनी-करनी का फर्क अब साफ नजर आ रहा है। एनआरसी के मसले पर असम से शुरू हुआ विरोध पूरे उत्तर-पूर्व में असर डालेगा। इसके अलावा पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न के शिकार हिंदुओं को यहां बसाने के मसले पर भी यहां के लोग नाराज हैं। इनका मानना है कि ऐसा करके भाजपा एनआरसी को व्यर्थ सिद्ध कर रही है। इस लिहाज से यहां 11 सीटों पर भाजपा का दावा एकतरफा नहीं रहने वाला। जबकि अमित शाह यहां 85 फीसदी तक सीटें जीतने का दावा कर रहे हैं।

सात में से छह राज्यों में है भाजपा के नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (नेडा) की सत्ता: अरुणाचल प्रदेश- 2 सीट : एक पर कांग्रेस, दूसरी पर भाजपा है। थोक दलबदल के जरिए सरकारों की लगातार उलट-पलट वाले इस राज्य की राजनीति में पैसे का खेल एक बड़ी समस्या है। बिजली, सड़क और शिक्षा की हालत खस्ता है। पेमा खांडू मुख्यमंत्री रहे और कांग्रेस से बगावत कर भाजपा से जुंड़ गए। यहां भाजपा के साथ एनपीपी भी है।

मणिपुर- 2 सीट : दोनों पर कांग्रेस। कांग्रेस में रहे एन. बीरेनसिंह बगावत कर भाजपा से जुड़ गए। वे अब जोड़-तोड़ की सरकार के सीएम हैं। मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस में ही है। भाजपा के साथ पीडीएफ, एनपीपी व एमडीपीएफ भी हैं। मैतेई जनजाति प्रभावशाली है। यह मणिपुर में परमिट की पक्षधर है।

मेघालय- 2 सीट : एक पर कांग्रेस और दूसरी पर संगमा की एनपीपी काबिज है। काेनराड संगमा सीएम हैं, जिन्होंने भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई। लेकिन भाजपा इस ईसाई और जनजातीय बहुल राज्य में अलग दुविधा में है। क्योंकि बीफ इनके खानपान का हिस्सा है। यहां एनपीपी और पीडीएफ के अलावा यूडीपी और एचएसपीडीपी भी भाजपा के साथ हैं।

त्रिपुरा- 2 सीट : दोनों पर सीपीएम का कब्जा है। 2013 में भाजपा ने यहां की 60 विधानसभा सीटों में से 50 पर चुनाव लड़ा था। सारी सीटें हारीं। मगर अगले ही चुनाव में 35 सीट जीतीं। मगर अनुभवशून्य सीएम बिप्लव देव बयानों को लेकर ज्यादा सुिर्खयों में रहे हैं। स्थानीय जनजातियों में बंगालियों को बाहरी मानने का भाव है। यहां सीपीएम व भाजपा ही मुख्य मुकाबले में होंगे। आईपीएफटी के साथ लड़ रही भाजपा की बढ़त राज्य में उनकी सरकार के प्रदर्शन पर भी निर्भर करेगी।

मिजोरम- 1 सीट : जो कांग्रेस के कब्जे में है। नेडा में शामिल मिजो नेशनल फ्रंट और कांग्रेस ही प्रमुख पार्टियां हैं। सीएम ललथन हवला पुराने कांग्रेसी हैं। भाजपा ने अप्रैल में यहां कांग्रेस से गठजोड़कर चौंकाया। 20 सीटों वाले चकमा ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल में 6 सीटें पाने वाली कांग्रेस और 5 सीटों पर जीती भाजपा एकसाथ हो गईं। इस साल के अाखिर में 40 विधानसभा सीटों वाले राज्य में भाजपा भी सेमीफाइनल में उतरेगी और तब लोकसभा की एकमात्र सीट पर दावेदारी का अंदाजा लगेगा।

सिक्किम- 1 सीट : पवन चामलिंग 25 साल से सीएम हैं। सत्तारूढ़ सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट एनडीए का एक हिस्सा है। विपक्षी पार्टी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा बेदम है। 2019 में यहां लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव होंगे। 20 सीटों पर प्रभावी नेपाली समुदाय की 11 उपजातियां, जनजातीयों में शामिल नहीं हैं। इनकी मांगें चामलिंग के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती हैं। 15 फीसदी आबादी सिक्किम सब्जेक्ट (पहचान-पत्र) से वंचित है। इन्हें आयकर से छूट दिलाना एक बड़ा मसला है।

नगालैंड- 1 सीट : नगालैंड पीपुल्स फ्रंट के नेफ्यू रियो यहां तीन बार मुख्यमंत्री रहे और 2014 में केंद्र में आने की उम्मीद पूरी नहीं हुई तो फिर से विधानसभा में वापसी चाही। पार्टी में विरोध के चलते नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) नाम से पार्टी बनाई और भाजपा के साथ मिलकर विधानसभा का चुनाव लड़ा। मुख्यमंत्री बने। भाजपा को एनपीपी का भी साथ है। इधर, विद्रोही संगठन एनएससीएन (आईएम) की ग्रेटर नगालैंड बनाने की मांग दूसरे राज्यों से टकराव की स्थिति पैदा करती है। वे अपना अलग राज्य चाहते हैं।

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