सुहागरात में पत्नी न घूंघट में मिली, न शरमाई, तलाक के लिए पति पहुंचा कोर्ट

2 वर्ष पहले
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  • फिल्मों जैसा सीन नहीं दिखा तो पत्नी के चरित्र पर उठा दिए सवाल
  • शादी के बाद दो साल तक रहे साथ, अब फैमली कोर्ट में लगाई याचिका

भोपाल (वंदना श्रोत्रिय). फिल्मों में दिखने वाला सुहागरात का सीन जब असल जिंदगी में नहीं दिखा तो पति ने नई-नवेली दुल्हन के चरित्र पर सवाल उठा दिए। यही नहीं, तलाक लेने के लिए वह फैमिली कोर्ट भी पहुंच गया। कोर्ट को दोनों के अलग होने की वजह पता चली तो पति की मनोचिकित्सक से काउंसलिंग कराई गई। मामला अभी कोर्ट में ही विचाराधीन है। 
 
मामला 2017 का है। शादी की पहली रात जब पति कमरे में गया तो दुल्हन घंूघट में नहीं मिली। पास गया ताे वह शरमाई भी नहीं। सहज तौर पर उससे बात करने लगी। यही बात दूल्हे को बुरी लग गई। परिवार के दबाव में उसने जैसे-तैसे दो साल तक संबंध निभाया, लेकिन अब तलाक के लिए फैमिली कोर्ट में याचिका लगा दी। आरोप लगाया कि पत्नी का चरित्र ठीक नहीं है। यह भी कहा कि उसके दूसरे पुरुषों से संबंध हैं। कोर्ट ने मनोचिकित्सक से पति की काउंसलिंग कराई, तब पता चला कि पति को सुहागरात पर वैसा कुछ नहीं मिला, जैसा उसने फिल्मों में देखकर सोचा था। उसने कल्पना की थी, जब वह पहली बार दुल्हन के कमरे में जाएगा तो वह घूंघट डाले शरमाती मिलेगी। ऐसा न होने पर वह डिप्रेशन में आ गया और संबंध तोड़ने के लिए आवेदन दे दिया।
 
फैमिली कोर्ट की काउंसलर सरिता राजानी के मुताबिक महिला ने बताया उनकी शादी 2017 में हुई थी। शादी के बाद पति ने केवल घूंघट उठाया, उसके बाद से वह दूर-दूर रहने लगा। पति के मन की बात जानने के लिए उसने कई प्रयास किए, लेकिन वह बात करने को तैयार नहीं है। महिला ने कहा यदि पति में कोई कमजोरी भी है तो कम से कम बात तो करे। काउंसलर ने जब पुरुष से पूछा तो उसने बताया वह शारीरिक रूप से फिट है। 
मनोचिकित्सक डॉ. नीरज बांगडे से काउंसलिंग के समय पति ने कहा जब उसने पत्नी का घूंघट उठाया था तो वह बिलकुल भी नहीं शरमाई। छूने पर भी काेई प्रतिक्रिया नहीं दी। उसे पहली रात उसके पास आने में बिलकुल झिझक नहीं हुई। इससे साबित होता है वह चरित्रहीन है। पति ने कहा, इसी वजह से वह पत्नी से दूर रहता है। डॉ. बांगडे ने बताया युवक फिल्म और दोस्तों की बातों में आकर पूर्वाग्रह ग्रसित है।

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