मैनिट / फैकल्टी का आरोप- चेहरे देखकर जाते हैं फिर नियम बनाए और तोड़े जाते हैं



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Dainik Bhaskar

Nov 09, 2019, 10:52 AM IST

भोपाल। मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) में लगभग दो साल में पहली बार बीओजी के चेयरमैन व आईआईटी दिल्ली के वर्किंग प्रोफेसर डॉ. भीम सिंह ने फैकल्टी से चर्चा करने मीटिंग रखी थी, जिसमें फैकल्टी ने मैनिट प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े किए। 

 

बैठक में मैनेजमेंट डिपार्टमेंट की प्रोफेसर डॉ. सुचि श्रीवास्तव ने कहा कि यहां पर चेहरे देखकर नियम बनाए व तोड़े जाते हैं। अन्य लोगों से भेदभाव होता है। बैठक में शामिल अन्य फैकल्टी तालियां बजाकर डॉ. सुचि श्रीवास्तव का समर्थन किया। वहीं डायरेक्टर का पक्ष लेते हुए डॉ. भीम सिंह बोले कि ऐसा होगा तो डायरेक्टर कभी भी नौकरी छोड़कर चले जाएंगे।


हम सिर्फ एडवायजरी हैं... बैठक करीब दो घंटे चली। फैकल्टी अपनी समस्याओं के साक्ष्य व दस्तावेजों के साथ पहुंची। फैकल्टी ने इस मामले में दखल देकर कार्रवाई करने की बात कही तो चेयरमैन ने कहा कि यह समस्याएं उनके क्षेत्राधिकार में नहीं आती हैं। वह सिर्फ एडवायजरी हैं। वहीं कहा कि उन्हें सीबीआई में जाने से कुछ नहीं मिलेगा। आप लोगों को आईआईटी के बराबर सैलरी मिलती है।


मेरा शोषण हो रहा है दूसरों को सभी लाभ मिल रहे हैं
कम्प्यूटर साइंस डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. वासुदेव देहलवार ने कहा कि जिस आधार पर मेरे खिलाफ कार्रवाई की उस आधार पर अन्य फैकल्टी पर कार्रवाई की जानी चाहिए थी, लेकिन मेरा डिमोशन किया गया और अन्य लोगों को सभी लाभ दिए जा रहे हैं।

गलत डॉक्यूमेंट लगाने वालों को प्रमोट कर दिया
इलेक्ट्रानिक्स विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मी कुमरे ने भर्ती-2017 पर सवाल खड़े किए। इसमें अनियमितताएं गिनाईं और कहा कि ऐसे लोगों को प्रमोट कर दिया गया, जिन्होंने गलत दस्तावेज लगाए। पेड रिसर्च जरनर्ल्स में पेपर पब्लिश कराने वाले को क्रेडिट अंक दे दिए गए। वहीं सही काम करने वाले दरकिनार कर दिए गए।

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