मंदसौर गोलीकांड: कैबिनेट की बैठक में पेश की जाएगी जस्टिस जेके जैन आयोग की रिपोर्ट में... / मंदसौर गोलीकांड: कैबिनेट की बैठक में पेश की जाएगी जस्टिस जेके जैन आयोग की रिपोर्ट में...

आयोग की रिपोर्ट में पहली नजर में प्रशासनिक चूक सामने आई है

dainikbhaskar.com

Jun 19, 2018, 11:47 AM IST
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भोपाल। मंदसौर गोली कांड बने आयोग की रिपोर्ट मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में पेश होगी। इस पर चर्चा के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। आयोग की रिपोर्ट में पहली नजर में प्रशासनिक चूक सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि जब पहले से ही पता था कि आंदोलन उग्र हो सकता है तो इंतजाम क्यों नहीं किए गए।

क्या है जस्टिस जेके जैन आयोग की रिपोर्ट में...

- रिपोर्ट में कहा गया है कि 6 जून 2017 को महू-नीमच फोरलेन पर फाटे के पास चक्काजाम किया गया था। असामाजिक तत्वों ने आंदोलनकारियों में शामिल होकर तोडफ़ोड़ की। दोपहर 12.30 बजे तत्कालीन सीएसपी साईं कृष्णा थोटा जवानों के साथ पहुंचे।

- इसी बीच आसमाजिक तत्वों ने सीआरपीएएफ एएसआइ सहित 7 जवानों को घेर लिया। उन पर पेट्रोल बम फेंके और मारपीट की। चेतावनी के बाद आरक्षक विजय कुमार ने दो गोली चलाई, जिससे कन्हैयालाल और पूनमचंद की मौत हो गई।

- एएसआइ बी शाजी ने तीन तो अरुण कुमार ने दो गोली चलाई जो मुरली, सुरेंद्र और जितेंद्र को लगी। थाना पिपल्यामंडी में घुसकर तोडफ़ोड़ करने वालों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस आरक्षक प्रकाश ने 4, अखिलेश ने 9, वीर बहादुर ने 3, हरिओम ने 3 और नंदलाल ने 1 गोली चलाई। इसमें चैनराम, अभिषेक और सत्यनारायण मारे गए। इसके अलावा रोड सिंह, अमृतराम और दशरथ गोली लगने से घायल हुए।

9 माह की देरी से सौंपी रिपोर्ट


- 6 जून 2017 को पिपल्यामंडी में आंदोलन कर रहे 5 किसानों की पुलिस की गोली लगने से मौत हो गई थी। सरकार ने घटना के दो दिन बाद ही मंदसौर के तत्कालीन कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह और एसपी ओपी त्रिपाठी को सस्पेंड कर दिया था।


- इस घटना की जांच के लिए राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस जेके जैन की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया था, जिसे अपनी रिपोर्ट तीन महीने यानि 11 सितंबर 2017 को सरकार को सौंपना था, लेकिन जांच आयोग ने 9 माह की देरी से सरकार को रिपोर्ट सौंपी।

211 गवाहों के बयान हुए


- आयोग ने घटना के 100 दिन बाद अपनी कार्रवाई शुरू की और 211 गवाहों के बयान लिए जिनमें 185 आम जनता से थे और 26 सरकारी गवाह थे।


- आयोग के समक्ष सरकारी गवाहों का प्रतिपरीक्षण वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद मोहन माथुर ने किया था। 20 सितंबर को आयोग ने अपना काम शुरू करते हुए पहला बयान दर्ज किया।


- अंतिम गवाह के रूप में 2 अप्रैल 2018 को तत्कालीन मंदसौर कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह के बयान दर्ज किए गए।


यह था घटनाक्रम
- 6 जून 2017 को मंदसौर से 12 किलोमीटर दूर बही पार्श्व नाथ चौपाटी पर दिन को 12.45 बजे सीआरपीएफ नीमच के जवानों ने आंदोलनकारी किसानों पर गोली चलाई।
- वहीं, दोपहर 1.30 बजे चौपाटी से डेढ़ किलोमीटर दूर मंदसौर नीमच फोरलेन पर स्थित पिपल्यामंडी थाने पर आरएपीटीसी इंदौर के जवानों ने गोली चलाई।

इनकी हुई थी मौत


- इन दोनों स्थानों पर हुए गोली चालन में बबलू जगदीश पाटीदार उम्र 25 वर्ष ग्राम टकरावद जिला मंदसौर, कन्हैयालाल धुरीलाल पाटीदार उम्र 38 वर्ष ग्राम चिल्लोद पिपलिया जिला मंदसौर, चेनराम गणपतलाल पाटीदार उम्र 22 वर्ष नया खेड़ा जिला नीमच, अभिषेक दिनेश पाटीदार उम्र 25 वर्ष ग्राम बरखेड़ा जिला मंदसौर, सत्यनारायण मांगीलाल गायरी ग्राम लोद जिला मंदसौर की मृत्यु हो गई।

आयोग ने ये उठाए सवाल


- अफसरों ने किसानों की मांगें जानने की कोशिश नहीं की।
- जिला प्रशासन का सूचना तंत्र कमजोर रहा।
- मंदसौर से 13 किमी दूर सुबह 10.30 बजे चक्काजाम हुआ।
- सूचना 2 घंटे बाद मिली। इससे स्थिति ज्यादा बिगड़ी। 5 जून को आंदोलनकारियों ने तोडफ़ोड़ व आगजनी की। उन पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई।
- 5 जून की घटना को देखते हुए प्रशासन ने पर्याप्त मात्रा में अग्निशामक उपाय नहीं किए।
- आंदोलन के पहले पुलिस ने असामाजिक तत्वों को पकडऩे में रुचि नहीं दिखाई।
- कलेक्टर ने एसपी को आदेश दिया था कि पुलिस के साथ कार्यपालक मजिस्ट्रेट व वीडियोग्राफर भेजा जाए, पर सीएसपी के साथ दोनों नहीं थे।

प्रशासन व पुलिस में सामंजस्य नहीं दिखा


- सीएसपी ने गोली चलने की तत्काल सूचना दी होती तो गोली चलने की दूसरी घटना रोका जा सकता था।
- अप्रशिक्षित बल से आंसू गैस के गोले चलवाए गए जो असफल साबित हुए।
- महत्वपूर्ण साक्ष्य सीआरपीएफ अफसरों व जवानों की जली वर्दी, जूते और राइफलें घटना के 13 दिन बाद जब्त किए।

न्याय नहीं मिला तो हाईकोर्ट में चुनौती देंगे

- किसान आंदोलन के हाईकोर्ट में पिटीशनर पारस सकलेचा (दादा ) का आरोप है कि जैन आयोग ने तीन महीने की जांच पूरा करने के स्थान पर एक साल का समय जानबूझकर लगाया।

- हमारी मांग पर कई महत्वपूर्ण गवाहों को बयान के लिए नहीं बुलाया तथा दो बार आवेदन के बाद भी मेरे बयान नहीं लिए।

- इससे हमे जैन आयोग की मंशा पर शंका है। अगर आयोग की जांच में उचित न्याय नहीं मिला तो हम हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।

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