Hindi News »Madhya Pradesh »Bhopal »News» Challenges Of Forming Synergy In Front Of Journalism, Spoke At The Conclave Of MCU Vice President Wakaya Naidu

मातृभाषा आँख है और दूसरी भाषा 'चश्मा', आँख ही नहीं होगी तो चश्मे का क्या उपयोग : उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू

माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में 202 विद्यार्थियों को प्रदान की गई उपाधियां, तीन विद्वानों को डीलिट।

प्रवीण पांडेय | Last Modified - May 16, 2018, 08:57 PM IST

  • मातृभाषा आँख है और दूसरी भाषा 'चश्मा', आँख ही नहीं होगी तो चश्मे का क्या उपयोग : उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू
    +1और स्लाइड देखें
    माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पीएचडी स्कॉलर्स को डिग्री देते उपराष्ट्रपति।

    भोपाल. भारत के उपराष्ट्रपति वैंकैया नायडू ने कहा कि देशभर में संचालित पाठ्यक्रम भारतीय भाषाओं में होने चाहिए। यह असंभव नहीं है। प्रयास करेंगे तो संभव होगा। भाषा और भावनाएं साथ-साथ चलती हैं। मातृभाषा में ही अपनी भावनाएं अच्छे से अभिव्यक्त होती हैं। दूसरी भाषाएं सीखने से दिक्कत नहीं है, लेकिन मातृभाषा पहले सीखनी चाहिए। मातृभाषा 'आँख' है और दूसरी भाषा 'चश्मा' है। यदि आँख ही नहीं होगी तो चश्मे का कोई उपयोग नहीं है। उपराष्ट्रपति एवं विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष वेंकैया नायडू माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।

    -दीक्षांत समारोह का आयोजन विधानसभा परिसर में स्थिति मानसरोवर सभागृह में किया गया। इस अवसर पर महापरिषद के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान,विधानसभा अध्यक्ष श्री सीतासरन शर्मा, जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा, सांसद श्री आलोक संजर और कुलपति श्री जगदीश उपासने उपस्थित रहे।

    -उपराष्ट्रपति एवं कुलाध्यक्ष श्री नायडू ने अपनी विदेश यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि लैटिन अमेरिका के देश में लोग अपनी मूलभाषा भूल गए हैं, उसकी जगह स्पेनिश आ गई है। भारत में भी अंग्रेजों ने इस प्रकार का प्रयास किया, किंतु महान शक्ति के कारण हमारी भाषाएं बच गईं। अभी खतरा बरकरार है। यदि हमने आने वाली पीढ़ी को मातृभाषा से नहीं जोड़ा तो दिक्कत होगी। हमें घर में बच्चों से मातृभाषा में बात करनी चाहिए। शिक्षा में मातृभाषा को अनिवार्य करना चाहिए। हमें गंभीरता से अपनी भाषाओं में शिक्षा देने की नीति बनानी चाहिए।

    भेदभाव समाप्त कर आगे बढऩा होगा : उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश बदल रहा है। देश मजबूत कदमों से बढ़ रहा है। सामाजिक जागरण भी हो रहा है। इस समय में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। सकारात्मक विचार से हमें अपना योगदान करना चाहिए। एक समय में भारत विश्वगुरु था। तक्षशिला और नालंदा में दुनिया से पढऩे के लिए लोग आते थे। जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को जल्द से जल्द समाप्त करना होगा। महिलाओं के साथ होने वाला अत्याचार दु:खद है। हमारे देश में महिलाओं का बहुत सम्मान रहा है। हम अपने देश को 'भारतमाता' कहते हैं, 'भारतपिता' नहीं। नदी और प्रकृति को भी माँ के रूप में मान्यता है। शिक्षा, अर्थ और शक्ति की आराध्या देवी हैं।

    विकास को गति देने में मदद करे मीडिया : उपराष्ट्रपति श्री नायडू ने कहा कि संसद में अच्छे काम होते हैं, लेकिन हंगामा मीडिया में महत्व प्राप्त करता है। आवश्यकता है कि मीडिया अच्छे कार्य को महत्व दे। जो सांसद अध्ययन कर प्रश्न पूछते हैं और जो मंत्री उनका अच्छे से जवाब देते हैं, उनको समाचार में प्रमुखता से स्थान देने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सदन का चलना आवश्यक है। चार 'सी' का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कास्ट, कम्युनिटी, कैश और क्रिमिनलिटी यदि राजनीति में प्रभावी होगी तो लोकतंत्र कमजोर होगा। इसलिए दूसरी चार 'सी' - कैरेक्टर, कैपेसिटी, कलीबर और कन्डक्ट पर ध्यान देना होगा।

    देश के नवनिर्माण में भूमिका निभाए पत्रकार :मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

    विश्वविद्यालय की महापरिषद एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने श्रेष्ठ कार्य किया है। विश्वविद्यालय से निकले पत्रकारों ने नैतिकता के नये मानदण्ड स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने यह कार्यक्रम भारतीय वेश-भूषा और हिंदी में सम्पन्न कर अभिनंदनीय कार्य किया है। आज मीडिया के सामने संतुलन बना कर चलने की चुनौती है। उन्होंने कहा कि पत्रकार सिर्फ पत्रकार नहीं होता, वह समाज सुधारक भी होता है।

    202 मेडल दिए गए
    -दीक्षांत समारोह में मास्टर्स कोर्स के 202 विद्यार्थियों को मेडल दिए गए हैं। वहीं, एमफिल के 39 और पीएचडी के 27 स्टुडेंट्स को डिग्री दी गईं। प्रदेश के 3 विद्यानों को डिलीट उपाधि दी गई। इसमें वरिष्ठ पत्रकार महेश श्रीवास्तव, साहित्यकार व पर्यावरणवादी अमृतलाल बेगड़ और वरिष्ठ पत्रकार एएमजी बैद्य को दिया गया है।

  • मातृभाषा आँख है और दूसरी भाषा 'चश्मा', आँख ही नहीं होगी तो चश्मे का क्या उपयोग : उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू
    +1और स्लाइड देखें
    इस मौके पर विद्यार्थियों ने पगड़ी के साथ परंपरागत ड्रेस पहना था।
Topics:
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×