मध्यप्रदेश / मंत्री बोले- सरकार को अस्थिर करने के लिए भाजपा और संघ की साजिश



minister said - BJP and RSS conspiracy to destabilize the government
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minister said - BJP and RSS conspiracy to destabilize the government

  • बिजली पर वायरल ऑडियो क्लिप पर हाईवोल्टेज पॉलिटिकल ड्रामा
  • भाजपा का जवाब- सरकार चला नहीं पा रहे इसलिए बेबुनियाद आरोप 

Dainik Bhaskar

Jun 08, 2019, 03:15 AM IST

भोपाल . मोबाइल फोन पर दो लोगों के बीच बिजली कटौती कर सरकार को परेशान करने की बातचीत का ऑडियो वायरल होने के बाद मंत्री पीसी शर्मा ने भाजपा और संघ पर सरकार को कमजोर करने के आरोप लगाए हैं। जनसंपर्क मंत्री शर्मा ने शुक्रवार रात अपने सरकारी आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

 

इसमें उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा-संघ सरकार को बदनाम कर रहे हैं। इसके जवाब में भाजपा के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि कमलनाथ सरकार चला नहीं पा रहे, इसलिए भाजपा और संघ पर दोष मढ़ रहे। जिस ऑडियो का जिक्र किया जा रहा है, इसमें एक व्यक्ति की बातचीत से क्या सरकार अस्थिर हो जाएगी। जिस कलेक्टर के पास माॅनिटरिंग का जिम्मा होता है, उसके तो कांग्रेस सरकार में 4-5 ट्रांसफर हो गए। वे क्या करेंगे। सरप्लस बिजली होने के बाद भी वह ठीक तरह से सप्लाई नहीं कर पा रही और कमियां छिपाने की कोशिश कर रही है। 


 जिस कलेक्टर के पास मानिटरिंग का जिम्मा होता है, उसके तो कांग्रेस सरकार में 4-5 ट्रांसफर हो गए। वे क्या करेंगे। कांग्रेस की सरकार इस समय सिर्फ ट्रांसफर-पोस्टिंग में लगी है। जनता से उसका कोई लेना-देना नहीं। यह नाच न जाने आंगन टेढ़ा जैसी स्थिति है।

 

भाजपा-संघ सरकार को बदनाम कर रहे :  मंत्री शर्मा ने कहा- मप्र में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से भाजपा-संघ बिजली को लेकर सरकार को बदनाम करने का काम कर रही है। पर्याप्त बिजली सप्लाई होने के बाद भी बिजली कटना इसी का प्रमाण है। सायबर सेल और सीआईडी ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। इसके पीछे जिसकी भी साजिश है, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

2 मिनट 42 सेकंड का ऑडियो : जितनी बिजली हो सके, काटो
 

पहला- हैलो..हां राजीव..
दूसरा- हां जी सर...


पहला - मैं यह पूछ रहा था कि कोलार में हुआ है हंगामा, ऐसे ही कुछ कराओ प्रदेश में...
दूसरा - हां..


पहला- और सुनो..सुनो..मैं यह बोल रहा हूं अभी यह चुनाव आ रहे हैं, हिन्हा..और रतलाम बढ़िया चुनाव आ रहे हैं तो जरा वहां पर ज्यादा फोकस करो, जितनी ज्यादा हो सके उतनी ज्यादा बिजली काटो..
दूसरा - हां सर, वैसे हमारी कोशिश तो है भोपाल में भी हमने ये गोविंदपुरा, आनंदनगर, पिपलानी, बरखेड़ा, कोलार और सभी जगह पांच-पांच मिनट के लिए काट रहे हैं। 
 

पहला - नहीं..पांच-पांच मिनट क्या होता है यार...सुनाे तुम मैं जो बोल रहा हूं वो करो, कम से कम आधा घंटा बिजली कटनी चाहिए। 
दूसरा- नहीं सर, अभी हां सर, वही इंदौर में भी सर हमनें रऊ,रजवाड़ा और छतरपुर में भी दो जगह काटी है सर, सभी जिलों।  शेष | पेज 4 पर


पहला- सुनो, मैंने जो बोला वो करो आप। छोटे जिलों पर ज्यादा फोकस करो..ठीक है। ज्यादा से ज्यादा बिजली काटो और सरकार के खिलाफ इतना विरोध करा तो कि जिसका कोई हिसाब न हो..कमलनाथ को खूब बदनाम करो..ठीक है..सरकार को खूब बदनाम करो.. कोई दिक्कत की बात नहीं है..जितनी हो सके उतनी बिजली काटो..
दूसरा- सर...अभी सरकार अभी एक्शन में है, कभी सस्पेंड बगैरह न हो जाऊं..

 

पहला-क्या बात कर रहे हो यार तुम, मैं तो बैठा हंू यहां, क्या टेंशन है तुम्हें..
दूसरा- हां सर,थोडी पेमेंट मेंमेंट हो जाती कुछ

 

पहला- क्या पेमेंट हो गई, कितनी?
दूसरा - अभी 17 हो गए हैं..और कुछ हो जाता, क्योंकि नीचे जो है नीचे और लोगो को भी है, अधिकारी लोगों भी और भी लोगों को देना पड़ता है सर..

 

पहला- चलो मैं करा दूंगा उसकी टेंशन नहीं है..कितना और..
दूसरा- अभी तो 17 आ गए हैं और कर देते आप..

 

पहला - चलो मैं करा दूंगा और करा दूंगा, 15-20 करा दूंगा, उसकी िचंता मत करो तुम, जितना हो सके उतना कमलनाथ को बदनाम करो, सरकार को बदनाम करो
दूसरा - ठीक है सर, अभी आधे-आधे घंटे..

 

पहला - कम से कम आधा घंटा बिजली कटनी चाहिए..
दूसरा- जी.. बिल्कुल सर बिल्कुल..अभी हम आधे-आधे घंटे और सभी जगह आज काट देते हैं

 

पहला - गांव ज्यादा काटो, गांव में डेड़ घंटे काटो
दूसरा - हां सर..

 

पहला - कोई दिक्कत की बात नहीं...डेड़ घंटे बिजली काटो
दूसरा- ठीक है सर, आज ही हम आधे-आधे घंटे काट देते हैं सभी जगहों पर...

 

पहला- और मैं यह बोल रहा हूं कि फोन लगाना बार-बार मत करो..आप तो डायरेक्ट मिलो..रिकॉर्डिंग आज कल होने लगी हैं, ये बहुत दिक्कत की लाइनें हैं..आप ताे फेस टू फेस बात करो मुझसे..मिलो जहां आप बोलोगे मैं वहां आ जाऊंगा, या आप आ जाना..कोई एेसी बात नहीं है, ऑफिस में मिल लेना....
दूसरा - ठीक है ठीक है सर, बिल्कुल

 

पहला - चलाे ठीक है
दूसरा- ठीक है सर, धन्यवाद सर...

 

जलसंकट पर गृह विभाग की एडवाइजरी; भाजपा ने कहा- सीएम इस्तीफा दें, कांग्रेस बोली- हास्यास्पद

 

प्रदेश में दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे जलसंकट को लेकर शुक्रवार को गृह विभाग ने एडवाइजरी जारी कर दी। इसमें कहा गया कि जलसंकट के कारण कुछ जगह विरोध प्रदर्शन या अन्य कारणों से हालात बिगड़ सकते हैं, ऐसे में पुलिस महकमा सभी स्थितियों पर बारीकी से नजर रखे। इस एडवाइजरी के जारी होते ही सियासी बवाल खड़ा हो गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से इस्तीफा मांग लिया तो नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि गृह विभाग लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने के लिए ऐसा करता रहा है, ऐसे में इस पर सवाल उठाना हास्यास्पद है। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा कि भाजपा की बयानबाजी से लगता है कि वह जलसंकट बनाए रखना चाहती है।

 

दूसरी ओर गृह विभाग के प्रमुख सचिव एसएन मिश्रा का कहना है कि एेसा कोई सर्कुलर जारी नहीं किया गया। बताया जा रहा है कि गृह विभाग की ओर से जारी एडवाइजरी एक सामान्य प्रक्रिया है। इस समय कई जगहों पर टैंकरों से पानी की सप्लाई हो रही है। जल वितरण के दौरान कहीं व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए कहा गया है कि पुलिस एेसी जगहों पर मौजूद रहे।

भाजपा बोली- हालात बेकाबू हो रहे, कांग्रेस ने कहा- हर साल जारी होते हैं निर्देश
 

वाटर ऑडिट करा रहे हैं : जयवर्धन


गृह विभाग हमेशा एेसी कोशिश करता है कि किसी भी स्थिति में लाॅ एंड ऑर्डर बना रहे। सरकार की मंशा भी यही है कि सबको पर्याप्त पानी उपलब्ध कराएं। इसीलिए ‘वाटर आॅडिट’ कराया जा रहा है। जल्द ही पानी का अधिकारी कानून भी लाएंगे।

पानी पर पुलिस का पहरा : राकेश

 
कहीं बिजली वितरण ठीक करने के लिए इंटेलीजेंस लगाया जा रहा है तो कहीं, पानी पर गृह विभाग अलर्ट जारी कर पुलिस का पहरा बिठा रहा है। मध्यप्रदेश के इतिहास में यह पहली घटना है जब बिजली और पानी के लिए जनता इस हद तक परेशान हुई हो। प्रदेश में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री को पद से तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।

राकेश तब मौनी बाबा बने रहे : सलूजा


भाजपा की अपनी सरकार में राकेश सिंह पूरे समय मौनी बाबा बने रहे। अब कांग्रेस सरकार में रोज सुबह नींद से उठकर छोटी-मोटी बात पर मुख्यमंत्री का इस्तीफा मांगने लग जाते हैं। गृह विभाग की एडवाइजरी पर उनका सवाल उठाना हास्यास्पद है। आपदा प्रबंधन की व्यवस्था के तहत यह निर्देश हर साल जारी किए जाते हैं।

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