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मप्र / गुना में 15 दिन में 2500 से ज्यादा चमगादड़ मरे और स्वास्थ्य विभाग को पता ही नहीं



More than 2500 bats have died in 15 days in Guna and the Health Department does not know
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More than 2500 bats have died in 15 days in Guna and the Health Department does not know

  • एक दिन पहले ही स्वास्थ्य विभाग ने निपाह वायरस को लेकर अलर्ट जारी किया है 
  • 10 दिन पहले एनएफएल डॉक्टर ने राघौगढ़ नपा को सूचना दी तो अमले ने समेटकर फेंक दिया था 
  • मौत के कारण जानने गुरुवार देर शाम तक वेटनरी डॉक्टर नहीं पहुंचे क्योंकि सरकारी वाहन ही नहीं था

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2019, 06:20 PM IST

गुना. निपाह वायरस को लेकर एक दिन पहले ही स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी किया, वहीं एनएफएल टाउनशिप में 15 दिन में 2500 से ज्यादा चमगादड़ मर गए, लेकिन किसी ने भी यह जानने की कोशिश नहीं कि इसके पीछे वजह क्या है? स्वास्थ्य विभाग को गुरुवार दोपहर एनएफएल के डॉक्टर ने सूचना दी, इसके बाद वह जागे और देर शाम वहां पहुंचे। 

 

इन चमगादड़ों की मरने की वजह से लोगों में डर बना हुआ है। जबकि निपाह वायरस से यह मरते नहीं है लेकिन संक्रामित चमगादड़ के संपर्क में आने, इनके झूठे फलों के सेवन और सुअर के संपर्क में आने से मनुष्य में वायरस प्रवेश करता है। 10 दिन पहले नगर पालिका राघौगढ़ में भी सूचना भेजी जा चुकी थी, वहां से पहुंचे कर्मचारियों ने सफाई की और मरे हुए चमगादड़ों को फेंक दिया। कायदे से इसकी सूचना पशु चिकित्सालय विभाग को देनी थी। ताकि पीएम के बाद इनके मरने के कारण साफ हो पाते। स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को ही अलर्ट जारी कर खानापूर्ति कर डाली। 


वेटनरी डॉक्टर को सीएमएचओ भी लेने पहुंचे 
चमगादड़ों के मरने की सूचना सीएमएचओ डॉ. पी बुनकर ने पशु चिकित्सा विभाग को दी। लेकिन वहां से जबाव मिला कि शासकीय वाहन नहीं है। इसलिए उन्हें खुद डॉ. बुनकर अपने वाहन से ले जाने के लिए तैयार हो गए। शाम 6 बजे तक इंतजार किया, इसके बाद विभाग से सूचना आई कि आप चलें जाएं, हम अपने स्तर से आ जाएंगे। शाम 7 बजे स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची लेकिन पशु चिकित्सा विभाग से कोई नहीं पहुंचा। 

 

पहली बार मलेशिया में फैला था वायरस 
WHO की मानें तो 1998 में मलेशिया के काम्पुंग सुंगई में पहली बार NiV इंफेक्शन का पता चला था। इस वायरस का नाम भी उस सुंगई निपाह गांव के नाम पर ही पड़ा जहां पहली बार इस वायरस का पता चला था। मलेशिया में यह बीमारी संक्रमित सूअरों की चपेट में आने की वजह से किसानों में फैली थी। वहीं बंगाल में दोनों ही बार में इस दुर्लभ वायरस के 71 केस सामने आए थे जिसमें से 50 लोगों की मौत हो गई थी। 

 

कैसे बचा जा सकता है 
डॉक्टरों की मानें तो फ्रूट बैट्स की वजह से यह बीमारी मुख्य रूप से फैलती है। जब इंसान या कोई जानवर चमगादड़ों द्वारा झूठे किए फल या सब्जियों को खाते हैं तो उनमें भी यह वायरस फैल जाता है। लिहाजा सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है कि जमीन पर गिरे फल न खाए जाएं। 

 

लक्षण : 24 घंटे में कोमा में मरीज 
सांस लेने में तकलीफ, तेज बुखार, जलन, सिरदर्द, चक्कर आना और बेहोशी इस बीमारी के लक्षण हैं। डाक्टरों के अनुसार यह वायरस बहुत तेजी से असर करता है। मरीज को तुरंत इलाज न मिले तो 48 घंटे के अंदर वह कोमा में जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इस वायरस का अभी तक वैक्सीन विकसित नहीं हुआ है। इलाज के नाम पर मरीजों को इंटेंसिव सपोर्टिव केयर ही दी जाती है। 


क्यों डरे हुए हैं लोग
दरअसल मामला इसलिए भी ज्यादा गंभीर हो गया है, क्योंकि, हाल ही में निपाह वायरस को लेकर केरल में अलर्ट जारी किया गया था. डॉक्टरों के अनुसार निपाह वायरस बहुत तेज़ी से असर करता है. यदि मरीज को तुरंत इलाज नहीं मिले तो 48 घंटे के अंदर मरीज कोमा में जा सकता है. इस वायरस की वैक्सीन भी फिलहाल विकसित नहीं हो पाई है. चमगादड़ों की मौत पर NFL प्रबंधन कुछ भी बोलने से बच रहा है. वहीं मुख्य स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी मामले की गंभीरता को बखूबी समझ रहे हैं.

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