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मध्यप्रदेश / एक महीने से गायब बाघ-बाघिन की मिली लोकेशन, कालर आईडी की बैटरी हो गई थी कमजोर



movement tracs became a tiger tigress in nauradehi sanctuary
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movement tracs became a tiger tigress in nauradehi sanctuary

  • बांधवगढ़ के विशेषज्ञों ने अभियान चलाया 
  • 15 दिन की तलाश के बाद मिली सफलता
     

Dainik Bhaskar

Dec 06, 2018, 02:52 PM IST

दमोह। नौरादेही अभयारण्य में बाघ-बाघिन राधा-किशन के कॉलर आईडी की बैटरी खराब होने से लोकेशन गायब हो गई। गड़बड़ी को ठीक करने के लिए बांधवगढ़ के फील्ड डायरेक्टर मृदुल पाठक के नेतृत्व में अभियान चलाया गया है। 15 दिन की तलाश के बाद दोनों की लोकेशन मिल गई है।

 

दरअसल, टाइगर बसाने की योजना के तहत कान्हा और बांधवगढ़ के जंगल से बाघ-बाघिन राधा किशन का जोड़ा अभ्यारण में छोड़ा गया है। टाइगर जोडे़ का मॉनीटरिंग करने जो सिस्टम लगाया गया था, वह फेल हो गया। जानकारों के अनुसार टाइगर को लगाई गई कालर आईडी की बैटरी कमजोर पड़ने के कारण लोकेशन मिलना बंद हो गई। अमले को टाइगर गतिविधियों पर नजर रखना मुश्किल हो गया था। बाद में इसकी जानकारी बांधवगढ़ के विशेषज्ञों की टीम को दी गई। जिसने जंगल से टाइगर को खोजकर मॉनिटरिंग सिस्टम में सुधार किया।

 

किया गया सुधार: सूत्रों के अनुसार नौरादेही के जंगल में करीब आठ माह पूर्व दो चरणों में पहले कान्हा से फीमेल फिर बांधवगढ़ बे मेल टाइगर को ले जाकर छोड़ा गया था। इनकी निगरानी के लिए कालर आईडी लगाई गई थी, मगर पिछले माह से सिग्नल मिलना बंद हो गए। जानकारी लगने पर वन विभाग के अधिकारी सक्रिय हुए तो पता चला कि टाइगर की कालर में लगी बैटरी के सेल कमजोर हो गए हैं, जांच पड़ताल के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया। पिछले दिनों विशेषज्ञों की टीम ने नौरादेही में डेरा डाला और काफी मशक्कत के बाद टाइगर जोडे़ के मॉनिटरिंग सिस्टम में सुधार किया। 

 

बैटरी कमजोर हो गई थी: झापन रेंज के रेंजर गवले ने बताया कालर आईडी कमजोर होने के बाद इस बात की आशंका थी, कि टाइगर जोड़ा लंबे ऐरिया में न निकल जाए, या फिर बस्ती की ओर रुख न कर ले, लेकिन बांधवगढ़ की टीम ने कॉलर आईडी ठीक कर दी है। अब लोकेशन मिलने लगी है। टीम के सदस्य वन्य प्राणी विशेषज्ञ मनीष कुलश्रेष्ठ ने बताया कि नौरादेही में छोड़ा गया टाइगर जोडा पहले बाडे़ में रहता था, नौरादेही में उन्हें प्राकृतिक आवास मिलने के कारण उनकी सेहत में सुधार हुआ है। उनका दावा है कि अब जल्द ही टाइगर का कुनबा बढ़ने वाला है। 

 

सैटेलाइट से होती है निगरानी : सूत्रों के अनुसार टाइगर जोडे़ की अत्याधुनिक तरीक़े से सेटेलाइट से निगरानी की जाती है, करीब एक माह पूर्व से टाइगर जोडे़ की गतिविधियों नजर नहीं आने पर वन विभाग सक्रिय हुआ और हाथी लाकर जंगल में टाईगर जोड़ा की तलाश कराई गई और सिस्टम में सुधार कार्य करवाया गया।

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