एमपी बोर्ड /मेहनत से लिखी सफलता की इबारत, चायवाले और चौकीदार के बच्चे बने टॉपर



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  • मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल परीक्षा का 10वीं और 12वीं परीक्षा परिणाम बुधवार को घोषित 
  • 10वीं की मेरिट लिस्ट में पहले पांच स्थानों पर सागर के ही छात्र रहे हैं 
  • मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दी मेरिट में स्थान बनाने वाले छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं 

Dainik Bhaskar

May 16, 2019, 11:44 AM IST

भोपाल. मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने बुधवार को 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट घोषित कर दिया। 10वीं में 61.32% और 12वीं में 72.37% परीक्षार्थी पास हुए। 10वीं में गगन दीक्षित और आयुष्मान ताम्रकार ने 499 अंकों ( 99.8%) के साथ टॉप किया है। दूसरे नंबर पर 497 अंकों के साथ दीपेंद्र कुमार अहिरवार हैं। 496 अंकों के साथ तीसरे नंबर पर 6 छात्र हैं। इसमें 63.69% छात्राएं और 59.15% छात्र हैं। 

 

12वीं की मेरिट में सिवनी की दृष्टि सनोडिया ने प्रदेश में टॉप किया। वहीं कॉमर्स समूह में भोपाल के विवेक गुप्ता ने टॉप किया है। वहीं अशोकनगर की आर्या जैन ने 500/486 अंक लाकर प्रथम रहीं। 10वीं की मेरिट लिस्ट में पहले पांच स्थानों पर सागर के ही छात्र हैं। कहीं चायवाले तो कहीं चौकीदार के बच्चे ने मेरिट लिस्ट में टॉप पोजीशन हासिल की। 

 

  • बगैर कोचिंग के पढ़ाई की  

    बगैर कोचिंग के पढ़ाई की  

    एमपी बोर्ड के 12वीं में सिवनी की दृष्टि सनोडिया ने टॉप किया। दृष्टि के पिता शिवशंकर सनोडिया टीचर हैं। उन्होंने कहा, "मुझे पहले से ही ये यकीन था कि बेटी सूबे में टॉप करेगी। अपनी सफलता से खुश दृष्टि कहती हैं, "मैं हर रोज 6-7 घंटे की पढ़ाई करती थी, मेरे डाउट्स टीचर दूर करते थे। मैंने पढ़ाई के लिए कोई कोचिंग नहीं की थी। मध्य प्रदेश में टॉप करने की उम्मीद थी, बल्कि मैं सोच रही थी कि इससे भी ज्यादा नंबर आते हैं।"

    आईएएस बनना सपना : बगैर कोचिंग के ही ये मुकाम हासिल करने वाली दृष्टि का सपना आईएएस अफसर बनना है। पेपर देने से ठीक पहले मैं पापा के साथ पढ़ती थी। जिसके बाद मेरा पेपर बहुत अच्छा जाता था।"

  • कलेक्टर बनना चाहते हैं 10वीं के टॉपर गगन 

    कलेक्टर बनना चाहते हैं 10वीं के टॉपर गगन 

    गोरझामर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के छात्र गगन दीक्षित 10वीं की मेरिट लिस्ट में पहला स्थान हासिल किया है। उसे 500 में से 499 अंक प्राप्त किए। गगन के पिता राजेश दीक्षित खेती किसानी करते हैं। 

    स्ट्रेस फ्री स्टडी के लिए रूटीन बनाया :  गगन ने बताया कि वे हर दिन रात 10 बजे तक ही पढ़ते थे और सबुह पांच बजे से फिर पढ़ाई करते थे। रोजाना छह घंटे पढ़ाई करना उन्होंने अपने डेली रुटीन में शामिल कर लिया था। उनकी कोशिश हमेशा स्ट्रेस फ्री स्टडी की रही। गगन ने सोशल मीडिया का यूज बिलकुल नहीं करते। गगन कलेक्टर बनना चाहते हैं। 

  • पिता चाय की गुमटी चलाते हैं, बेटा मेरिट में 

    पिता चाय की गुमटी चलाते हैं, बेटा मेरिट में 

    आगर मालवा जिले में चाय की गुमटी चलाने वाले दुर्गा प्रसाद सोनी के बेटे राजकुमार सोनी ने 10वीं बोर्ड में प्रदेश में तीसरी रैंक हासिल की है। सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल सुसनेर में पढ़ने वाले छात्र राजकुमार ने कुल 500 में से 496 अंक लाकर अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है।

    पिता का सपना, बेटा बड़ा अफसर बने : अपनी इस उपलब्धि के लिए राजकुमार ने अपने माता-पिता और गुरुजन को श्रेय दिया है। चाय की छोटी सी गुमटी से अपने परिवार चलाने वाले राजकुमार के पिता दुर्गा प्रसाद और उसकी मां ने उसकी इस उपलब्धि को उसकी कठिन परिश्रम का फल बताते हैं। पिता दुर्गा प्रसाद चाहते हैं कि बेटा अब बड़ा अफसर बनकर नाम रोशन करे। 

  • हर विषय को एक घंटे दिया 

    हर विषय को एक घंटे दिया 

    कॉमर्स ग्रुप में भोपाल के विवेक गुप्ता ने टॉप किया। वो शासकीय सुभाष हायर सेकेंड्री स्कूल के छात्र हैं. उन्हें 500/486 अंक मिले। वो अपनी सफलता का श्रेय अपने टीचर्स को दे रहे हैं। विवेक ने बताया, "उसे पता था कि आखिरी महीने में पढ़ाई पर पूरा जोर लगाना पड़ेगा, इसलिए दोस्तों से मिलना जुलना बंद कर दिया था। "

    तीन महीने बंद कर दिए सोशल एकाउंट : विवेक गुप्ता ने आखिर के तीन महीने के लिए अपने सोशल एकाउंट बंद कर दिए थे। ताकि पढ़ाई में पूरा फोकस बना रहे। विवेक का लक्ष्य सीए बनना है। उन्होंने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। 

  • पिता के बदले कई बार करनी पड़ी चौकीदारी

    पिता के बदले कई बार करनी पड़ी चौकीदारी

    सागर के आयुष्मान किराने की दुकान में काम करता था, जिससे फीस भर सके 10वीं में टॉप करने वाले आय़ुष्मान ताम्रकार के लिए ये कामयाबी किसी सपने से कम नहीं है। आयुष्मान को पढ़ाई के लिए वक्त निकालना पड़ता था। ऐसा इसलिए क्योंकि कई बार पिता की गैर मौजूदगी में उसे चौकीदारी करने जाना पड़ता था। आयुष्मान इस दौरान किराने की दुकान में काम करके अपनी फीस का इंतजाम करता था। 

    बेटा इंजीनियर बने, यही इच्छा : मां की इच्छा बेटा आयुष्मान इंजीनियर बने। मां ने बताया कि, पति वॉचमैन हैं। ऐसे में जरुरत पड़ने पर आयुष्मान उनके साथ चौकीदार करने जाता था। दिन में पढ़ने का वक्त नहीं मिलता तो रात में जागकर बहन के साथ पढ़ाई करता। अब उसे इंजीनियर बनते हुए देखना चाहती हूं। 

  • दीपेंद्र अहिरवार का इंजीनियर बनना सपना 

    दीपेंद्र अहिरवार का इंजीनियर बनना सपना 

    10वीं की मेरिट में दूसरे स्थान पर भी सागर के दीपेंद्र अहरिवार रहे हैं। वो भी सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल के छात्र हैं। दीपेंद्र ने परीक्षा में 500 में से कुल 497 अंक मिले हैं। दीपेंद्र ने अपनी इस कामयाबी का श्रेय माता-पिता और स्कूल के टीचर्स को दिया है। 
    रोज 6-7 घंटे की पढ़ाई : आगे इंजीनियर बनना उनका सपना है। दीपेंद्र के मुताबिक मैं रोज 6-7 घंटे पढ़ाई करता था। किसी विषय में अटकने पर टीचर्स से मदद लेता था।

  • ममता का लक्ष्य आईएएस बनना है 

    ममता का लक्ष्य आईएएस बनना है 

    सागर की ही महिमा ने भी मेरिट लिस्ट में अपनी जगह बनाई है। उसने 99.2 फीसदी अंक हासिल किए हैं। महिमा की सफलता का राज आखिरी महीने में हर रोज 10-12 घंटे की पढ़ाई थी। उन्होंने कहा कि आखिरी एक महीने में मैंने हर विषय के लिए 6 दिन बांट लिए थे। इस दौरान मैं रोज 10-12 घंटे पढ़ती थी। इस दौरान बहनों और स्कूल के टीचर्स का काफी सहयोग मिला। मेरा लक्ष्य अब आईएएस बनना है।

  • मां नहीं पढ़ पाई तो बेटी को पढ़ाया 

    मां नहीं पढ़ पाई तो बेटी को पढ़ाया 

    हरदा जिले में 12वीं की बोर्ड परीक्षा में टॉप करने वाली चेतना की मां नहीं पढ़ पायी थीं इसलिए बेटी को पढ़ाया। चेतना हरदा के सरस्वती शिशु मंदिर की छात्रा हैं। वो दसवीं में भी ज़िले में टॉप कर चुकी हैं। अपनी स्टूडेंट की कामयाबी पर पूरा स्कूल खुश है। चेतना राजपूत गोदागांव की रहने वाली हैं। उनके पिता एक छोटे से किसान हैं। गांव में हायर सेकेंड्री स्कूल तक नहीं है। इसलिए घर से दूर हरदा में किराए के एक कमरे में रहकर उन्होंने पढ़ाई की और बायलॉजी ग्रुप में चौथे नंबर पर रहीं। चेतना को 473 अंक मिले। 

    आर्मी स्कूल में डॉक्टर बनने का सपना : चेतना आर्मी में डॉक्टर बनकर सैनिको का इलाज करना चाहती हैं. बेटी की इस सफलता पर पूरा परिवार झूम उठा। वो कहती हैं सच्चे मन से की गयी मेहनत कभी बर्बाद नहीं जाती। वो कहती हैं मेहनत मैंने की और उसमें पेरेंट्स और टीचर्स सबने मदद की।

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