मप्र / 'जल पुरुष' ने कहा- पानी के अधिकार को कानूनी दर्जा देना क्रांतिकारी कदम, लेकिन काम गंभीरता से हो



राजेंद्र सिंह राजेंद्र सिंह
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  • 'राइट टू वॉटर' विषय पर आयोजित कार्यशाला भाग लेने भोपाल आए हुए हैं राजेंद्र सिंह
  • देश और प्रदेश के तकरीबन 30 से अधिक विषय विशेषज्ञों ने कार्यशाला में भागीदारी की

Dainik Bhaskar

Jun 24, 2019, 06:44 PM IST

भोपाल। 'जल पुरुष' के नाम से विख्यात मैग्सेसे पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह ने कहा है कि हम धरती से अनवरत पानी निकालते रहते हैं परंतु उसमें पानी डालने की हमने न तो चिंता की और न ही प्रयास किये। इसके चलते देशभर में पीने के पानी की समस्या विकराल रूप में सामने आ रही है। हमें इस स्थिति को बहुत गंभीरता से विचार कर जल संरक्षण के सघन प्रयास करने होंगे। राजेंद्र सिंह सोमवार को भोपाल में आयोजित 'राइट टू वॉटर' विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। 

 

राजेंद्र सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश सरकार ने पानी के अधिकार को कानूनी दर्जा देने के लिये क्रांतिकारी कदम उठाया है। लेकिन इस काम को पूरी गंभीरता से किए जाने की जरूरत है। वहीं देश के अन्य हिस्सों के लोगों में भी इस अधिकार के प्रति आस जागेगी। लिहाजा सभी राज्य सरकारों को इस अधिनियम को अपने-अपने हिस्से में लागू करना चाहिए। साथ ही कमलनाथ सरकार को जल संरचनाओं की भूमि का चिन्हीकरण, प्रमाणीकरण किए जाने के साथ नोटिकिकेशन जारी किया जाए। साथ ही जो संरचनाएं क्षतिग्रस्त हैं, उन्हें दुरुस्त किया जाए।


करोड़ों लोगों को पीने का साफ पानी नहीं: उन्होंने कहा कि भारत के ज्यादातर राज्यों में पानी की किल्लत है। गर्मियों में यह समस्या देश के कई हिस्सों में विकराल रूप धारण कर लेती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, भारत में लगभग 9.7 करोड़ लोगों को पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं होता। गांवों में तो स्थिति और भी खराब है। वहां लगभग 70 प्रतिशत लोग अब भी प्रदूषित पानी पीने को ही मजबूर हैं। 

 

पानी के संसाधन सिर्फ चार प्रतिशत: दुनिया की कुल आबादी में से 18 प्रतिशत भारत में रहती है, लेकिन केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश में महज चार प्रतिशत ही जल संसाधन हैं। यह बेहद गंभीर स्थिति है। सरकारी आंकड़ों से साफ है कि बीते एक दशक के दौरान देश में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता तेजी से घटी है।

 

दो दशक बाद नहीं बचेगा पानी: जानकारों का कहना है कि ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के प्रयास में लगातार नए बिजली संयंत्र बनाए जा रहे हैं। लेकिन इस कवायद में पानी की बढ़ती खपत को नजरअंदाज कर दिया जाता है। इन संयंत्रों को ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में पानी की खपत होती है। अगर ऊर्जा उत्पादन की होड़ इसी रफ्तार से जारी रही तो अनुमान है कि वर्ष 2040 तक लोगों की प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त पानी ही नहीं बचेगा।

 

मध्य प्रदेश पहला राज्य: कार्यशासा को संबोधित करते हुए प्रदेश के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सुखदेव पांसे ने कहा है कि मध्यप्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य होगा, जो पानी के अधिकार की शुरूआत करने जा रहा है। पानी का अधिकार कानून बनाने के लिये कार्यशाला में विषय-विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और कानून विशेषज्ञों के सुझावों पर मंथन के बाद इसमें जनता की भागीदारी सुनिश्चित कर कानून का रूप दिया जा सकेगा। 

 

रोजगार गारंटी योजना के तहत होगा काम: अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास गौरी सिंह ने बताया कि पंचायतों में रोजगार गारंटी योजना में सभी ग्राम पंचायतों में एक तालाब का निर्माण करवा कर जल संरक्षित किया जाएगा। देश-प्रदेश के तकरीबन 30 विषय विशेषज्ञों ने कार्यशाला में भागीदारी की।

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