मप्र / 'वचन' निभाने के लिए सत्र शुरू होने के बाद बदला 25 विषयों का सिलेबस



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  • उच्च शिक्षा विभाग अचानक ही दे दिए आदेश, अब एक लाख छात्र होंगे परेशान 

Dainik Bhaskar

Jul 14, 2019, 01:35 PM IST

भोपाल। उच्च शिक्षा विभाग छात्र-छात्राओं से मजाक कर रहा है। नया सत्र 2019-20 शुरू होने के 11 दिन बाद अंडर ग्रेजुएशन कोर्स बीए, बीएससी और बीकॉम के 25 विषयों के सिलेबस में किए गए बदलाव को इसी सत्र से लागू करने का अचानक आदेश दे दिया।


प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और सरकारी व प्राइवेट कॉलेजों को इसे इसी सत्र से पढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इस सत्र में लगभग एक लाख छात्र एडमिशन ले चुके हैं। अब परेशानी की बात यह है कि छात्रों को स्टडी मटेरियल उपलब्ध कैसे होगा। इस तरह सिलेबस में किया गया बदलाव छात्रों की जेब पर भारी पड़ेगा क्योंकि, नए सिलेबस के अनुसार जब तक किताबें बाजार में नहीं आ जाती तब तक उन्हें पुरानी किताबों से ही काम चलाना पड़ेगा। 


वहीं, नए सिलेबस के लिए उन्हें दोबारा नई किताबें भी खरीदनी पड़ेंगी। उधर, उच्च शिक्षा विभाग के ओएसडी डॉ. एएस यादव का कहना है कि सरकार के वचन पत्र को पूरा कराने के लिए बदलाव किया है। खास बात यह है कि फर्स्ट ईयर के सिलेबस में दो साल पहले ही बदलाव किया था। यह बदलाव वार्षिक पद्धति लागू होने के कारण किया था। ऐसे में दो साल बाद ही सिलेबस में बदलाव करने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। 


समस्या : बाजार में किताबें आने में दो महीने का लगेगा समय 
उच्च शिक्षा विभाग ने इस बार किताबों में 20 प्रतिशत तक बदलाव किया गया है। ऐसे में नए सिलेबस के अनुसार किताबें तत्काल मार्केट में नहीं मिल सकेंगी। यहां तक सरकार भी निशुल्क दी जाने वालीं किताबें भी छात्रों को उपलब्ध नहीं करा पाएगी, क्योंकि हिंदी ग्रंथ अकादमी को भी नए सिरे से किताबें प्रकाशित करनी पड़ेंगी। 


तैयारी : यूजीसी व यूपीएससी भी करने वाले हैं सिलेबस में बदलाव 
यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (यूजीसी) भी देशभर के विश्वविद्यालयों के लिए मॉडल सिलेबस जारी कर बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा यूपीएससी भी अपने सिलेबस में बदलाव करने वाला है। यह अगले वर्ष में लागू हो सकता है। उच्च शिक्षा विभाग के पूर्व अपर संचालक डॉ. राधा बल्लभ शर्मा के अनुसार इसलिए राज्य शासन को भी इनके बदले हुए सिलेबस के हिसाब से अपने सिलेबस में बदलाव करना चाहिए था। ऐसा होता तो छात्रों को मदद मिलती। प्रदेश के छात्रों का स्तर अन्य राज्यों की तुलना में कमजोर है। इससे उनके स्तर में सुधार होने की गुंजाइश कम रहेगी। 


एक्सपर्ट व्यू : हमेशा सत्र शुरू होने से पहले जारी होता है सिलेबस 
सिलेबस हमेशा सत्र शुरू होने के पहले ही जारी किए जाते हैं। सत्र शुरू होने के बाद सिलेबस जारी करने से छात्रों को पाठ्य सामग्री उपलब्ध नहीं हो सकेगी। इससे उन्हें पढ़ाई करने में परेशानी होगी। सिलेबस राज्यपाल के अनुमोदन के बाद लागू होते हैं, यदि उन्होंने 1 जुलाई के बाद इसे मंजूरी दी है तो इसे अगले सत्र से ही लागू किया जाना चाहिए। यदि इससे पहले मंजूरी मिली है तो अधिकारियों की लापरवाही है कि उन्होंने इसे अभी तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया। इसे लागू कराने में दिक्कत होगी क्योंकि, किताबें प्रकाशित होने में भी समय लगता है। प्रो. केएम जैन, पूर्व संयुक्त संचालक,उच्च शिक्षा विभाग 


इन विषयों के सिलेबस को किया अपग्रेड 
समाज शास्त्र, रसायन शास्त्र, इतिहास, भौतिक शास्त्र, गणित, अंग्रेजी (साहित्य), प्राणी शास्त्र, हिंदी (साहित्य), भूगोल, राजनीति शास्त्र, लोक प्रशासन, अर्थशास्त्र, सांख्यिकी, दर्शनशास्त्र, संस्कृत (साहित्य), मैनेजमेंट, जियोलॉजी, वनस्पति शास्त्र, मनोविज्ञान,पर्यावरण विज्ञान, सैन्य विज्ञान, समाज कार्य, उर्दू, वाणिज्य, आधार पाठ्यक्रम। 

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