मध्यप्रदेश / अनुमान से बजट आवंटन होने से हर साल बढ़ रहा है स्थापना व्यय

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दैनिक भास्कर

Sep 15, 2019, 12:03 PM IST

भोपाल। सरकार ने तीन साल पहले से वेतन पर खर्च होने वाली राशि का तरीका बदल दिया है। इसमें कर्मचारियों की संख्या नहीं बल्कि पदों के अनुमान के हिसाब से विभागों को बजट का आवंटन किया जा रहा है। नए सिस्टम में किस वर्ग के कितने अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं उनके वेतन पर कितनी राशि खर्च होगी इसकी जानकारी नहीं रहती है। 

 

इससे वेतन पर खर्च होने वाली बड़ी राशि विभागों के पास बची रह जाती है, जिसे वे पुनर्वियोजन के नाम पर मनमाफिक खर्चा कर रहे हैं। वेतन मद में खर्च होने वाली राशि का सही हिसाब-किताब न होने से सरकार का एक साल में ही वेतन पर 3296 करोड़ रुपए खर्च बढ़ने का अनुमान है, यानी वित्तीय वर्ष 2018-19 में वेतन मद में खर्च 31919 करोड़ रुपए खर्च था, यह राशि 2019-2020 में बढ़कर 35215 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, यानी सालभर में वेतन मद में खर्च होेने वाली राशि 3296 करोड़ रुपए बढ़ गई। हालांकि वित्त विभाग इस बड़ी हुई राशि के पीछे तर्क दे रहा है कि यह राशि कर्मचारियों के वेतन भत्तों में बढ़ोतरी होने के कारण बढ़ जाती है।


कर्मचारियों की संख्या से नहीं अब पदों के अनुमान से वेतन पर खर्चा
ऐसे हुई गफलत... 2016 तक सरकार के 52 विभागों से वित्त विभाग के लिए जो बजट डिमांड भेजी जाती थी, उसमें अंतिम पेज पर सूची संलग्न रहती थी। इसमें कितने कर्मचारी किस वर्ग के हैं, कितने पद सेंक्शन है, कितने खाली हैं, उनके वेतन पर कितनी राशि खर्च होगी, यह जानकारी दी जाती थी। डिमांड में यह जानकारी न होने पर वित्त विभाग जिस विभाग का प्रस्ताव मिलता था उसे वापस कर देता था। 


2017 से शुरू हुई नई व्यवस्था में विभाग को स्थापना व्यय के नाम पर बजट आवंटन किया जा रहा है। इसमें वेतन मद का हिस्सा होता है। इस तरह प्राप्त होने वाली राशि बजट कंट्रोलिंग ऑफिसर (बीसीओ) को स्थापना व्यय के नाम पर मिल जाती है। इस मद से ड्राइंड डिस्बर्समेंट अॉफिसर (डीडीओ) जरूरत के हिसाब से सालभर राशि निकालते हैं। इस प्रक्रिया में वेतन मद का बड़ा हिस्सा खर्चा नहीं हो पाता है, जिसे विभाग मनमाफिक (पुनर्वियोजन) खर्च कर रहे हैं। इस बारे में वित्त मंत्री तरुण भानौत का सिर्फ इतना ही कहना है कि वे इस पूरे मामले को दिखवाएंगे।

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