भोपाल / 5 माह में 160 दुष्कर्म, लेकिन पुलिस ने 4 में ही दिया मुआवजे का आवेदन



mp news 160 rape 5 month in bhopal
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mp news 160 rape 5 month in bhopal

  • जिला विधिक प्राधिकरण द्वारा मांगने पर भी जानकारी नहीं दे रही पुलिस

Dainik Bhaskar

Jun 13, 2019, 03:49 PM IST

भोपाल। राजधानी में जनवरी से अब तक 160 से ज्यादा महिलाएं और बच्चियां दुष्कर्म का शिकार हुईं, लेकिन पुलिस के गैर जिम्मेदाराना रवैये के चलते एक भी पीड़िता को मुआवजा राशि नहीं मिल पाई है। जिला विधिक प्राधिकरण के पास अभी तक 11 पीड़िताओं के ही आवेदन पहुंचे हैं। इनमें से केवल चार मामले पुलिस द्वारा भेजे गए हैं, जबकि 7 आवेदन पीड़िताओं के परिजनों ने दिए हैं। वहीं जिला विधिक प्राधिकरण खुद संबंधित थानों को पत्र लिखकर पीड़िताओं की जानकारी मांग रहा है। 

 

गौरतलब है कि मप्र अपराध पीड़ित प्रतिकार योजना 2015 के अनुसार दुष्कर्म पीड़िताओं को सरकार तत्काल आर्थिक मदद उपलब्ध कराती है। मुआवजे के लिए आवेदन करवाने की जिम्मेदारी संबंधित थाने की होती है। जांच अधिकारी को एफआईआर के साथ पीड़िता या परिजनों से मुअावजे का फॉर्म भरवाना होता है, लेकिन ज्यादातर पुलिस वालों को इस नियम की जानकारी ही नहीं है। जिला विधिक प्राधिकरण द्वारा बार-बार जारी पत्रों के बाद भी पुलिस के रवैये में कोई बदलाव नहीं आ रहा है। जानकार कह रहे हैं कि पुलिस विभाग को मुआवजे को लेकर सभी थानों को आदेश जारी करना चाहिए। इस संबंध में महिला अपराध शाखा के एडीजी अन्वेष मंगलम का कहना है कि पीड़िताओं को मुआवजा मिलने की जानकारी पुलिस को है। मैं कल ही पता करवाता हूं कि इसके लिए सही प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं हो रहा है। हम जिला विधिक प्राधिकरण से भी बात करेंगे और इस व्यवस्था को और बेहतर बनाने का प्रयास करेंगे। 


लापरवाही... पुलिस ने डेढ़ माह बाद भी नहीं भेजा आवेदन 
30 अप्रैल को बुआ के साथ मनुआभान टेकरी पर गई 12 वर्षीय बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। आरोपी बुआ का ही दोस्त था। पुलिस ने डेढ़ माह बाद भी प्राधिकरण को मुआवजे का आवेदन नहीं भेजा है। कोहेफिजा पुलिस ने प्राधिकरण द्वारा अधिकृत लीगल वॉलंटियर को भी गोपनीयता का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार कर दिया है। अब प्राधिकरण ने थाने को पत्र लिखकर जानकारी मांगी है। साथ ही राजधानी में पिछले सप्ताह कमला नगर, पिपलानी और गांधीनगर थाने क्षेत्रों में 8 से 11 साल की बच्चियों के साथ हुए दुष्कर्म के मामलों की भी जानकारी मांगी है। इसमें मंडवा बस्ती में दुष्कर्म के बाद बच्ची की हत्या, सौतेले पिता द्वारा दुष्कर्म की शिकार बच्ची और पिपलानी की नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के आवेदनों की जानकारी मांगी गई है। प्राधिकरण का कहना है कि इतने चर्चित मामलों में भी पुलिस ने मुआवजे की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। 


यह है पीड़िताओं के लिए आवेदन की प्रकिया 
एफआईआर दर्ज करने के साथ ही पुलिस को मुआवजे का आवेदन भरवाकर जिला विधिक प्राधिकरण में भेजना होता है। प्राधिकरण केस की गंभीरता के आधार पर ही मुआवजे की राशि निर्धारित करता है। पहली किस्त एफआईआर दर्ज होने के तत्काल बाद पीड़िता को देे दी जाती है। दूसरी किस्त मामले के कोर्ट में पहुंचे के बाद, जबकि तीसरी किस्त कोर्ट का िनर्णय आने के बाद दी जाती है।  लीगल वॉलंटियर और सोशल वर्कर भी यह फाॅर्म भरवा सकते हैं। 

 

पुलिस अफसरों को ही नहीं है आवेदन की जानकारी 
प्राधिकरण के लीगल वालंटियर शिवराज कुशवाहा बताते हैं कि पीड़िताओं को मुआवजा मिलने के नियमों की जानकारी पुलिस और प्रशासन के बड़े अफसरों को भी नहीं है। पुलिस न तो खुद आवेदन देती आैर न ही हमें आवेदन भरवाने में सहयाेग करती है। गोपनीयता के नाम पर वे इस मामले में कोई भी जानकारी देने से ही इनकार कर देते हैं। ऐसे में हमें प्राधिकरण की ओर से पत्र जारी करवाना पड़ता है, जिसका जवाब आने में ही महीनों लग जाते हैं।

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