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मप्र / ट्रेन से चोरी हुए थे गहने, उपभोक्ता फोरम का आदेश- महिला को 6 लाख रुपए दे रेलवे

Dainik Bhaskar

May 16, 2019, 04:54 PM IST



mp news consumer forum ordered railways to pay six lakhs to victim of theft in bhopal express train
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mp news consumer forum ordered railways to pay six lakhs to victim of theft in bhopal express train

  • 29 जून 2015 को ट्रेन में भोपाल से हजरत निजामुद्दीन के लिए सवार हुई थीं गाजियाबाद की कशिश मोहम्मद 
  • रेलवे का तर्क- घटना के समय सो रही थी यात्री इसमें हमारी कोई गलती नहीं है 
  • फोरम- सोने के लिए ही बुक कराई थी बर्थ, रेलवे अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता

ग्वालियर/भोपाल। यात्रा के दौरान ट्रेन में एक महिला यात्री का पर्स चोरी हो गया था। इसमें साढ़े छह लाख रुपए कीमत के गहने थे। मामले की सुनवाई करते हुए उपभोक्ता फोरम ने इसे रेलवे की लापरवाही मानते हुए यात्री को छह लाख रुपए चुकाने के आदेश दिए हैं। रेलवे ने फोरम में तर्क दिया था कि यात्रा के दौरान ट्रेन में यात्री सो रही थीं, इसलिए हमारी गलती नहीं है। लेकिन, फोरम ने इसे सेवा में कमी माना और कहा कि यात्री के सामान की हिफाजत की जवाबदेही रेलवे की है।

 

घटना 29 जून 2015 की है। गाजियाबाद निवासी कशिश पत्नी मोहम्मद अब्बास के साथ भोपाल स्टेशन से हजरत निजामुद्दीन जाने के लिए भोपाल एक्सप्रेस में सवार हुईं थीं। झांसी पर जब ट्रेन रुकी तो मोहम्मद टॉयलेट जाने के लिए उठे और उन्होंने कशिश को सामान देखने के लिए कहा। जब वे लौटकर आए तो देखा कि पर्स गायब है। इसमें साढ़े छह लाख रुपए की कीमत के सोने के जेवरात रखे हुए थे। इसकी शिकायत उन्होंने 30 जून को हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर दर्ज कराई। जांच के बाद मामला ग्वालियर स्थानांतरित हो गया। 2 फरवरी 2017 को कशिश ने उपभोक्ता फोरम में दावा पेश किया। मामले में फोरम ने नार्थ सेंट्रल रेलवे को 6 लाख रुपए के साथ वाद पेश करने में हुए खर्च के एवज में 2000 रुपए देने का आदेश दिया।

 
रेलवे के वकील ने कहा- यात्री का गलती: 26 माह तक चले इस केस में रेलवे के वकील ने कशिश के दावे को खारिज करने की मांग करते हुए तर्क दिया कि घटना के समय वह सो रही थीं। इसलिए इस घटना में रेलवे की कोई गलती नहीं है। फोरम के अध्यक्ष अरुण सिंह तोमर ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यात्री ने सोने के लिए ही बर्थ बुक कराई थी, मात्र सो जाने से यात्री को चोरी के लिए दोषी नहीं माना जा सकता और न ही इस आधार पर रेलवे अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ सकता है। सुरक्षा की जवाबदेही रेलवे की है और इसलिए उसे यात्री के नुकसान की भरपाई करनी होगी। 


पहले सोचा था किस्मत खराब: मामले को उपभोक्ता फोरम तक ले जाने वाली कशिश की मां शहाना जेहरा ने दैनिक भास्कर को बताया कि 2008 में भी उनके परिजन का पर्स छत्तीसगढ़ से चोरी हो गया था। इस दौरान मैं भी ट्रेन में थी। तब ये मान लिया था कि भाग्य खराब है। ऐसे मामले में कुछ नहीं होता इसलिए रिपोर्ट भी दर्ज नहीं कराई थी। लेकिन इस बार जब चोरी हुई तो ठान लिया था कि नुकसान रेलवे से ही वसूलेंगे। इसलिए वकील से सलाह ली और फोरम में दावा पेश किया। सुनवाई के दौरान चोरी गए गहनों के संबंध में रसीद भी पेश की। ये साबित किया कि हमारा नुकसान हुआ है, जिसकी जवाबदेही सिर्फ और सिर्फ रेलवे की है।

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