भिक्षावृत्ति रोके या शहर का ट्रैफिक कंट्रोल करें?

Bhopal News - डीबी स्टार

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:06 AM IST
Bhopal News - mp news control begging or city traffic
डीबी स्टार
राजधानी में इन दिनों खुशहाल नौनिहाल नामक अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान कांग्रेस के घोषणा पत्र का हिस्सा है, जिसमें लिखा है कि प्रदेश को भिक्षावृत्ति से मुक्ति दिलानी है। इसके तहत चौराहों पर भिक्षावृत्ति करने वाले बच्चों का रेस्क्यू कर बाल कल्याण समिति को सौंपा जाना है। यहां से बच्चों को जांच-पड़ताल के बाद उनके माता-पिता को सौंप दिया जाता है। या फिर किसी ऐसी संस्था के सुपुर्द कर दिया जाता है, जो इनकी बेहतर ढंग से देखरेख कर सके।

अब तक यह काम चाइल्ड लाइन, बाल कल्याण समिति के सदस्य और कुछ स्वयंसेवी संस्थाएं कर रही थीं। एक महीने पहले संभाग आयुक्त कल्पना श्रीवास्तव ने एक आदेश जारी कर इस काम में ट्रैफिक पुलिस को भी सहभागिता निभाने का फरमान जारी किया है।

लेकिन एक महीने में एक बच्चा भी ट्रैफिक पुलिस की मदद से रेस्क्यू नहीं किया गया, जबकि चाइल्ड लाइन और बाल कल्याण समिति ने अब तक करीब 150 बच्चों को रेस्क्यू कर उनके माता-पिता को साैंपा है। इस मामले में जब डीबी स्टार ने ट्रैफिक पुलिस कर्मियों से बात की तो कुछ जवानों ने ऐसे किसी आदेश से अनभिज्ञता जाहिर की। कुछ पुलिस कर्मियों ने नाम न छापने के अनुरोध पर कहा कि अगर हम भिक्षावृत्ति रोकने का काम करेंगे तो फिर ट्रैफिक कौन कंट्रोल करेगा?

इसलिए चुना ट्रैफिक पुलिस कर्मियों

ट्रैफिक पुलिस को इस अभियान का हिस्सा बनाने के पीछे मकसद यह है कि वे अक्सर चाैराहों पर मौजूद रहते हैं। इन्हीं चौराहों पर सर्वाधिक भिक्षावृत्ति होती है। ऐसे में इनकी नजर से बच्चे बच नहीं पाएंगे। आदेश अनुसार जैसे बच्चे भीख मांगते नजर आए तो पुलिसकर्मी उन्हें अलग ले जाकर समझाएं और चाइल्ड लाइन या अन्य किसी संस्था के सुपुर्द कर दें। लेकिन बीते एक महीने में एक भी बच्चा पुलिस ने रेस्क्यू नहीं किया, जबकि पूरे शहर में 200 से अधिक पुलिसकर्मी शहर में मौजूद रहते हैं।

सांकेतिक चित्र

बल की कमी से जूझ रही है राजधानी की ट्रैफिक पुलिस

शहर में ट्रैफिक नियंत्रित करने के लिए कुल 833 का बल स्वीकृत है। इसमें से 541 पद रिक्त पड़े हैं। जो 292 पुलिसकर्मी हैं, इनमें से करीब 100 लोग ऑफिस वर्क, वीआईपी ड्यूटी आदि में फंसे रहते हैं, जबकि शहर में इस समय करीब आठ लाख वाहन सड़क पर दौड़ रहे हैं, जिन्हें नियंत्रित करना है। ऐसे में यह नया काम ट्रैफिक पुलिस को रास नहीं आ रहा है।

बच्चों को भेजने का काम हमारा नहीं है

इस तरह का एक आदेश आया है और ट्रैफिक पुलिस की ट्रेनिंग भी हुई है। हमारी महिला अफसर सिग्नल पर भीख मांगने वाले बच्चों को समझाती हैं। लेकिन उन बच्चों को भेजने का काम हमारा नहीं है और न ऐसे आदेश दिए गए हैं। - प्रदीप चौहान, एएसपी, ट्रैफिक

ट्रैफिक पुलिस को भी बच्चे रेस्क्यू करना है

एक महीने पहले संभागायुक्त ने आदेश दिया था कि खुशहाल नौनिहाल अभियान में स्वंयसेवी संस्थाओं के साथ अब ट्रैफिक पुलिस भी मदद करेगी। हालांकि अब तक कोई परिणाम नहीं आए, लेकिन हमें आगे मदद मिलने की उम्मीद है। - राजीव जैन, सदस्य, बाल कल्याण समिति, भोपाल

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