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इशारों ही इशारों में झगड़ने लगे पति-पत्नी, परिजनों को लगा दोनों प्यार से बातचीत कर रहे हैं,  तलाक तक जा पहुंचा रिश्ता

Dainik Bhaskar

Feb 12, 2019, 09:48 AM IST

Bhopal News - मध्यप्रदेश न्यूज: दोनों की ही साइन लैंग्वेज अलग-अलग है इसलिए वो इशारों में की गई बातों को ठीक प्रकार से समझ नहीं पाते।

Bhopal News - mp news do not understand the gesture therefore the relationship reached to divorce
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  • जिला विधिक प्राधिकरण पहुंचा मूक-बधिर दंपती के बीच झगड़े का केस।
  • साइन लैग्वेंज अलग -अलग होने की वजह से हो रही है समस्या।

भोपालपति-पत्नी दोनों ही मूक बधिर...इशारों ही इशारों में झगड़ा हुआ और मामला तलाक तक जा पहुंचा। जी हां, सुनने में भले ही आश्चर्य लगे लेकिन ऐसा ही एक मामला कुटुम्ब कोर्ट में आया है। झगड़े की वजह जानने के लिए काेर्ट ने काउंसलिंग का फैसला लिया। अड़चन थी कि काउंसलिंग कैसे हो, इसलिए साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट सौरभ जैन की मदद ली गई।

बातों को ठीक प्रकार से समझ नहीं पाते दोनों
सोमवार को 6 घंटे तक चली काउंसलिंग के बाद जैन ने बताया कि दंपती के बीच किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं है। दरअसल, दोनों की ही साइन लैंग्वेज अलग-अलग है इसलिए वो इशारों में की गई बातों को ठीक प्रकार से समझ नहीं पाते। ऐसे में ही दोनों के बीच विवाद गहरा गया है। दरअसल, दोनों की शादी मई 2018 में हुई थी। शादी के तीन माह बाद ही दोनों में इशारों ही इशारों में झगड़े होने लगे। पहले तो परिजनों को लगा कि दोनों एक दूसरे से प्यार से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन बाद में पता चला कि उनके बीच झगड़ा शुरू हो गया है।

सास डाइनिंग टेबल में बैठकर खाना खाने नहीं देती

एक दिन झगड़ा इतना बढ़ा कि लड़की ने मोबाइल में मैसेज भेजकर परिजन को बुलाया और उनके साथ मायके चली गई। उसने बताया कि पति प्रताड़ित करता है और ताने मारता है। सास डाइनिंग टेबल में बैठकर खाना खाने नहीं देती। पति ने आरोप लगाया कि पत्नी शादी के तीन माह बाद से मां के यहां बैठी है, लेने जाओ तो परिजन उसे नहीं भेजते। काउंसलर निरूनिशा खान का कहना है कि दोनों के बीच साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट के सहयोग से काउंसलिंग की गई। दोनों के बीच झगड़े छाेटी-छोटी बातों पर हए हैं। दोनों बेहतर तरीके से संवाद स्थापित नहीं कर पा रहे हैं। साइन लैग्वेंज भी अलग -अलग है, जिसकी वजह से समस्या हो रही है। युवती के अभिभावक परिवार बसाना चाहते हैं। वे उसे समझाने में सहयोग कर रहे हैं।

भाषा के आधार पर बदल जाती है साइन लैंग्वेज
जैन ने बताया कि इस मामले में युवक पूरी तरह से मूक बधिर है और लड़की तकरीबन 80 प्रतिशत मूक बधिर है। लड़की साइन लैंग्वेज और लिप्सिंग के माध्यम से भाषा समझ जाती है। लेकिन लड़की जो कहना चाहती है वह लड़का इशारों में समझ नहीं पाता। दोनों की साइन लैंग्वेज अलग-अलग है, जिसकी वजह से परेशानी हो रही है। दरअसल भाषा और क्षेत्रीयता के आधार पर साइन लैंग्वेज बदल जाती है। सचिव आशुतोष मिश्रा के मुताबिक प्राधिकरण परिसर में पहली बारी साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट के माध्यम से मूक बधिर दंपती की काउंसलिंग की गई। उम्मीद है कि एक और काउंसलिंग के बाद दोनों का परिवार बस जाएगा।



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