डाइस कोड में उलझा स्कूली छात्रों का भविष्य, घट सकती हैं सुविधा

Bhopal News - डीबी स्टार

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:06 AM IST
Bhopal News - mp news future of school students entangled in dice code can be reduced
डीबी स्टार
स्कूल शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में टीचर्स की कमी दूर करने के लिए एक परिसर एक शाला योजना शुरू की है। इसके तहत सभी स्कूलों का डाइस कोड एक कर दिया गया है। यह फैसला शिक्षकों की परेशानी का सबब बन गया है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती स्कूलों का रिकॉर्ड मेंटेन करने की है। साथ ही किस छात्र को कौन सी सरकारी योजना का लाभ दिया जाना है, इसका रिकॉर्ड विभाग को जुलाई माह तक उपलब्ध कराना है।

इस मामले मेंे सबसे बड़ी बाधा डाइस कोड की आ रही है। यह राज्य शिक्षा केन्द्र (आरएसके) एवं आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के बीच उलझकर रह गया है। दोनों ही विभागों को अपना रिकॉर्ड एक करना है। इसमें दिक्कत यह है कि इस काम को कौन अंजाम देगा। सभी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी ढोल रहे हैं। दोनों का एक रिकॉर्ड बनने के बाद उसे चैक करना भी चुनौती भरा काम है। इस कारण कोई भी अधिकारी इस मामले में कुछ बोलने को तैयार नहीं है। लेकिन इस व्यवस्था से शिक्षक खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि विभाग ने उन्हें कई काम सौंप रखे हैं। ऐसी स्थिति में जुलाई तक रिकॉर्ड दुरुस्त करना मुश्किल लग रहा है।

423 स्कूल भोपाल के शामिल

गौरतलब है कि डीपीआई ने दो किलोमीटर तक के स्कूलों को एक परिसर में मर्ज कर दिया है। इसमें प्रदेश के 30 हजार सरकारी स्कूलों को एक ही परिसर में ला दिया गया है। इसमें भोपाल के 423 स्कूल भी शामिल हैं। इन्हें नए डाइस कोड दिए गए हैं। डाइस कोड में एक परिसर में स्थित प्राइमरी, मिडिल और हाई स्कूल एवं हायर सेकंडरी स्कूलों की पूरी कुंडली दर्ज की जानी है। यह काम स्कूलों में शुरू जरूर हो गया है, लेकिन रिकॉर्ड की शुद्धि को लेकर भ्रम की स्थिति है।

शिक्षकों में बढ़ा असमंजस

शिक्षकों के अनुसार पहली से आठवीं तक की जिम्मेदारी आरएसके पास है। कक्षा 9 से 12वीं का संचालन डीपीआई से होता है। इसके चलते शासन की योजनाआें के लाभ का जिम्मा अलग-अलग होता है। सभी योजनाओं की जिम्मेदारी ऑनलाइन दी जाती है। डाइस कोड एक होने से इन योजनाओं का संचालन कैसे होगा? इसको लेकर शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

समाप्त नहीं होने थे कोड

सूत्रों की मानें तो योजना का मकसद विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी दूर करना था। जो शिक्षक हेड मास्टर बनकर अध्यापन से दूर हो गए थे। उस समय निर्देश दिए गए थे कि एक परिसर में होने के बाद भी किसी स्कूल का डाइस कोड समाप्त नहीं किया जाएगा। लेकिन उक्त आदेश के विरुद्ध डाइस कोड एक कर दिया गया। जिससे शिक्षकों के सामने नया काम बढ़ गया है। जिसे जुलाई से पहले हर हाल में पूरा करना है।

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