मंदिरों के फूलों को कचरे में जाता देख आया आइडिया, बनाने लगे फूलों से अगरबत्ती

Bhopal News - मंदिरों के फूलों को कचरे में जाता देख आया आइडिया, बनाने लगे फूलों से अगरबत्ती सिटी रिपोर्टर | भोपाल राजधानी...

Apr 08, 2019, 06:46 AM IST
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मंदिरों के फूलों को कचरे में जाता देख आया आइडिया, बनाने लगे फूलों से अगरबत्ती

सिटी रिपोर्टर | भोपाल

राजधानी के दो युवा इंजीनियर प्रियंका गुप्ता और अमय वायंगणकर ने पिछले साल गणेशोत्सव और दुर्गोत्सव में इकट्ठा किए करीब 7 टन फूल से अगरबत्ती बनाने लायक 6 क्विंटल मटेरियल तैयार कर लिया है। इस मटेरियल से अगरबत्ती बनना भी शुरू हो गई है। दोनों युवाओं और उनके साथ जुड़े 70 दोस्तों ने न केवल मंदिरों और झांकियों से फूल इकट्ठा किए बल्कि उन्हें सुखाने और पिसाने से लेकर अगरबत्ती बनाने के लिए 50 से ज्यादा प्रेक्टिकल भी किए। इस सब में वे अब तक 35 हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। फिलहाल वे अपने पास उपलब्ध साढ़े चार किलो अगरबत्ती की पैकिंग कर अपने परिचितों को दे रहे हैं।

फूलों से अगरबत्ती का निर्माण जहां मंदिरों और तालाबों में होने वाली गंदगी को रोकेगा वहीं रोजगार का भी साधन बनेगा। इन युवाओं ने ‘फ्लावर पॉवर’ नाम से एक वालंटियर ग्रुप बनाया है। वॉट्स एप के जरिए सूचना इकट्ठा करते हैं। मैनिट से बी आर्क और उसके बाद नीदरलैंड से मास्टर इन डिजाइन के बाद भोपाल आकर नीति आयोग से जुड़े अमय वायंगणकर बताते हैं कि गणेशोत्सव के समय झांकियों में इकट्ठा होने वाले फूलों को कचरे में जाता देख उनके मन को अच्छा नहीं लगा। उन्होंने अन्य दोस्तों से बात की। मैनिट से ही बीई (बायो टैक) और भुवनेश्वर से एमबीए के बाद कंस्ट्रक्शन का व्यवसाय कर रही प्रियंका गुप्ता उनके साथ जुड़ गईं। प्रियंका और अमित जवाहरलाल स्कूल में साथ पढ़े हैं। दोनों ने अपने दोस्तों को जोड़ा। शहर के अलग-अलग मंदिरों और झांकियों में जाकर उन्हें फूल अलग रखने को कहा। फिर वे यह फूल लेकर आए। दुर्गोत्सव के समय वे नगर निगम के संपर्क में आ गए और दुर्गोत्सव में फूल इकट्ठा करने में निगम ने उनका सहयोग किया।

वॉट्स एप पर बनाया फ्लावर पॉवर नाम से वालंटियर ग्रुप

दो युवा इंजीनियर... अपने 70 साथियों के साथ मिलकर गणेशोत्सव व दुर्गोत्सव में इकट्ठा हुए 7 टन फूलों से बना रहे 6 क्विंटल अगरबत्ती

संघर्ष...फूलों को सुखाने और पिसाने से लेकर अगरबत्ती बनाने के लिए 50 से ज्यादा प्रेक्टिकल किए, तब मिली सफलता

फूल सुखाने से लेकर सेग्रीगेशन एक बड़ा चैलेंज

इन इकट्ठा किए हुए फूलों को तिरपाल से ढंक कर यादगारे शाहजहांनी पार्क और आईआईएफएम कैंपस में सुखाया। उसके बाद इन फूलों में मिक्स अन्य पूजन सामग्री को हाथों से अलग किया। यह अपने आप में एक बड़ा चैलेंज था। न्यू मार्केट में चक्की में ले जाकर इसे पिसाया।

अगरबत्ती बनी, पर जली नहीं... प्रियंका व अमित बताते हैं कि उन्होंने इधर-उधर से जानकारी जुटाकर अगरबत्ती बनाई, लेकिन वह जली नहीं। कम से कम 50 बार अलग-अलग तरह से मिश्रण बनाने के बाद प्रयोग सफल हुआ। अब पुराने शहर में एक अगरबत्ती निर्माता को वे मटेरियल मुहैया करा रहे हैं। गर्मी के बाद फिर से फूलों को इकट्ठा करने का अभियान चलाएंगे। उस समय घरों, कॉलोनियों व मंदिरों में इकट्ठा होने वाले फूल को वे निगम के सहयोग से कलेक्ट करेंगे। अभियान के शुरू होने के बाद इसके लिए वे फोन नंबर भी देंगे, जहां कॉल करके फूल इकट्ठा होने की जानकारी दी जा सकती है।

निगम का ‘गोल्डन लीफ’ प्रोजेक्ट... फूलों से अगरबत्ती बनाने का प्रयोग सफल होता देख नगर निगम ने युवाओं के साथ ‘गोल्डन लीफ’ प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसमें पतझड़ में इधर-उधर बिखरी पत्तियों को इकट्ठा कर कम्पोस्ट बनाया जाएगा। इसके लिए निगम के पार्कों के साथ दाना पानी, आरिफ नगर, जवाहर चौक और शाहजहांनी पार्क स्थित ट्रांसफर स्टेशनों पर व्यवस्था की गई है। इसके अलावा यदि कोई रहवासी संघ अपने क्षेत्र में कम्पोस्टिंग यूनिट स्थापित करना चाहे तो निगम उसमें भी सहयोग करेगा। इसके लिए कॉल सेंटर नंबर 155304 पर संपर्क किया जा सकता है।

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