मिट्‌टी की महिमा और भूलने की दास्तां

Bhaskar News Network

Jun 15, 2019, 06:25 AM IST

Bhopal News - चिल्ड्रंस थिएटर अकादमी की ओर से शहीद भवन में आयोजित राष्ट्रीय बाल नाट्य समारोह के दूसरे दिन शुक्रवार को पहले 13 साल...

Bhopal News - mp news mud and glory tales
चिल्ड्रंस थिएटर अकादमी की ओर से शहीद भवन में आयोजित राष्ट्रीय बाल नाट्य समारोह के दूसरे दिन शुक्रवार को पहले 13 साल के हनी भार्गव के निर्देशन में नाटक ये माटी हमारी का मंचन किया, जबकि दूसरी प्रस्तुति रंग त्रिवेणी संस्था के बाल कलाकारों ने रचना मिश्रा के निर्देशन में नाटक भुलवा भुलक्कड़ की दी। इन दाेनाें ही नाट्य प्रस्तुतियाें में बाल कलाकाराें का अभिनय, उनकी संवाद अदायगी अाैर अापसी तालमेल दृश्याें काे प्रभावी बना गया, जिसे हॉल में उपस्थित दर्शकों ने भी खूब सराहा।

अंग्रेज अफसर को नतमस्तक कर देता है सरपंच

नाटक ये माटी हमारी की कहानी 1936 के समय की है। इसमें दिखाया गया कि गांव के हरे-भरे खेत देखकर अंग्रेज किसानों पर लगान का दबाव बनाते हैं। तब गांव का सरपंच कुछ दिन की मोहलत मांगता है। कुछ दिन बाद अंग्रेज अफसर सरंपच को गिरफ्तार कर लेते हैं। सरपंच अफसर से कहता है, मेरी माटी मुझे बचा लेगी। तब परिस्थितियां ऐसी बनती हैं कि सरपंच को सजा नहीं हो पाती है और अंग्रेज भी माटी के आगे नतमस्तक हो जाता है।

अमीर बन जाता है भुलवा

भुलवा भुलक्कड़ में गांव का एक लड़का है, जो पल भर में बातें भूल जाता है। एक दिन उसकी दादी उसे राजा जी के पास से सिलवाने के लिए कपड़े लाने भेजती हैं। वह भूल न जाए, इसके लिए रटता-रटता महल के लिए जाता है। रास्ते में मिलने वाले लोग उसे कुछ और रटा देते हैं। आखिरी में वो राजमहल पहुंचता है, वहां उसके कारण राजमहल में चोरी हाेने से बच जाती है। राजा उसे खूब धन-दौलत उपहार के रूप में देता है। इतनी दौलत पाकर उसे जो कुछ भी याद था, वह सब भूल जाता है। यहां तक कि अपने गांव और दादी को भी भूल जाता है।

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