माता-पिता ने तलाक के बाद की दूसरी शादी, बेटी बोली-मुझे भरण-पोषण दो

Bhopal News - अभी तक प|ी पति के खिलाफ भरण पोषण का प्रकरण लगाती थी, लेकिन फैमिली कोर्ट में एक बेटी ने अपने माता-पिता के खिलाफ भरण...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:06 AM IST
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अभी तक प|ी पति के खिलाफ भरण पोषण का प्रकरण लगाती थी, लेकिन फैमिली कोर्ट में एक बेटी ने अपने माता-पिता के खिलाफ भरण पोषण का प्रकरण लगाया है। सुनवाई के दौरान पिता की खुद जज ने काउंसलिंग की। जज का कहना था कि दोनों ने शादी कर ली, अब बेटी को किसके भरोसे छोड़ा। दोनों का दायित्व है, अपनी बेटी की देखभाल करते हुए उसका भरण-पोषण करें। मामला अभी फैमिली कोर्ट में विचाराधीन हैं। यह अकेला मामला नहीं है जिला विधिक प्राधिकरण में भी दो अलग-अलग परिवार के बच्चों ने अपने माता-पिता से भरण-पोषण दिए जाने की मांग की है। इसमें प्राधिकरण के सचिव की समझाइश के बाद माता-पिता बच्चों को भरण-पोषण के लिए रुपए देने तैयार हो गए।

नानी ने सामान बेचकर किया पालन, अब पढ़ाई के लिए चाहिए रुपए

फैमिली कोर्ट में अविवाहित बेटी ने अपने माता-पिता के खिलाफ भरण-पोषण का प्रकरण दायर किया। युवती ने अपने परिवाद में बताया कि उसके माता-पिता ने आपसी विवाद के बाद तलाक ले लिया। पिता ने उसकी कस्टडी नहीं ली। वह मां के साथ रही। इसके बाद उसकी नानी ने मां की शादी कर दी और उसे अपने पास रख लिया। नानी ने सामान बेचकर उसका पालन पोषण किया। अब वह कॉलेज में पढ़ रही है। इसलिए अब उसे भरण-पोषण के लिए रुपए चाहिए। मामले में पिता ने कोर्ट में उपस्थित होकर अपनी आर्थिक स्थिति की दुहाई दी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि वह बेटी की देखभाल के लिए रुपए नहीं दे सकता। इस पर कोर्ट ने काउंसलिंग कर समझाइश दी। कहा कि माता-पिता का दायित्व है कि बच्चों के आत्मनिर्भर बनने तक उनकी देखभाल करंे। काेर्ट की समझाइश के बाद युवती के पिता 2 हजार रुपए महीना देने तैयार हुए, लेकिन इसके लिए उन्होंने कोर्ट से समय मांगा है। कोर्ट ने पिता को दो माह का वक्त दिया है।

पिता की मौत के बाद मां ने की दूसरी शादी... जिला विधिक प्राधिकरण में तीन नाबालिग बच्चे मां से भरण-पोषण की राशि लेने के संबंध में विधिक सहायता लेने पहुंचे। उन्होंने प्राधिकरण के सचिव आशुतोष मिश्रा को बताया कि पिता की मौत हो गई है। मां ने दूसरी शादी कर ली है। हम लोग बेघर हो गए हैं। हमें मां और सौतेले पिता से रहने के लिए घर और तीनों की पढ़ाई और खाने पीने के लिए भरण-पोषण चाहिए। मामले में काउंसलिंग करने के बाद प्राधिकरण ने तीनों बच्चों की कस्टडी बच्चों के मामा को दे दी और मां ने बच्चों की देखभाल और भरण-पोषण के लिए 15 हजार रुपए हर माह देने का लिखित में वादा किया।

पति से अलग हुई बेटी, तो माता-पिता ने 12 लाख रुपए और एक मकान दिया

अन्य मामले में बेटी ने अपने परिजनों के खिलाफ जिला विधिक प्राधिकरण में शिकायत की वह अपने पति से अलग हो गई है। उसकी एक बेटी भी है। पति जो भरण-पोषण के लिए रकम देता है उससे गुजारा नहीं होता। उसके माता-पिता उसे रहने के लिए मकान और खर्च के लिए रुपए दें। मामले में काउंसलिंग के बाद महिला के माता-पिता ने बेटी को एक मकान और 15 लाख रुपए एक मुश्त देने का वादा किया।

अविवाहित बेटी मांग सकती है भरण-पाेषण

जिला विधिक प्राधिकरण के सचिव अाशुताेष मिश्रा ने बताया कि अविवाहित बेटी और नाबालिग बच्चे माता-पिता से भरण-पाेषण मांग सकते हैं। इसके अलावा यदि किसी काे भरण-पाेषण मिल रहा तो वह बढ़ाेतरी के लिए भी प्रकरण कर सकते हैं।

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