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सांची स्तूप की प्रतिकृति होगा चूनाभट्‌टी का बौद्ध महाविहार

3 वर्ष पहले
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बौद्ध धर्म का अनुसरण करने वाले साधकों को अब ध्यान करने के लिए कहीं भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसकी वजह यह है कि कोलार के चूनाभट्टी स्थित मैत्रेय बौद्ध विहार के नजदीक ही महाविहार बनाया जा रहा है। इस महाविहार की डिजाइन बनकर तैयार हो गई है। यह महाविहार सांची स्तूप की प्रतिकृति होगा। इस महाविहार में 150 से अधिक साधक ध्यान कर सकेंगे। इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो गया है। यह महाविहार तीन साल में बनकर तैयार हो जाएगा।

चूना भट्टी स्थित मैत्रेय विहार में अभी भगवान बुद्ध की 25 फीट ऊंची प्रतिमा आकर्षण का केंद्र है। इसके अलावा यहां पर नागार्जुन हेल्थ केयर का संचालन मैत्रीय उपासिका संघ करती है। भदंत शाक्यपुत्र सागर ने बताया कि यहां बनने वाला महाविहार अतंरराष्ट्रीय स्तर का होगा। यह देखने में सांची के स्तूप की तरह होगा। इसमें अंतर केवल इतना होगा कि सांची के स्तूप में अंदर ध्यान नहीं सकते हैं, लेकिन यहां पर जो स्तूप बनेगा, उसमें साधक ध्यान कर सकेंगे। यही नहीं इसमें आध्यात्मिक गतिविधियां भी आयोजित होगी।

चूना भट्टी मैत्रेय विहार में बुद्ध की 25 फीट ऊंची प्रतिमा।

प्रोजेक्ट के लिए एक करोड़ का बजट, समाज के लोगों का भी सहयोग
भदंत शाक्यपुत्र सागर ने बताया कि इस महाविहार के निर्माण पर करीब एक करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके लिए समाज के लोग अपनी यथाशक्ति सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बुद्ध भूमि विहार उपासक संघ, अखिल भारतीय भिक्षुक संघ विशेष रूप से सहयोग कर रहा है।

यहां बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर होता है सबसे बड़ा महोत्सव
मैत्रेय विहार में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर सबसे बड़ा कार्यक्रम बुद्ध महोत्सव आयोजित होता है, जिसमें 6 से अधिक देशों के साधक आते हैं। शाक्यपुत्र ने बताया कि इस महाविहार के बनने के बाद सांची के बाद भोपाल में भी बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायी आएंगे।

महाविहार बनाने का उद्देश्य लोगों को सत्य और अहिंसा की शिक्षा देना है
इस महाविहार में बच्चे बौद्ध धर्म की शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। बच्चे शालेय शिक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक और धार्मिक शिक्षा भी ग्रहण करेंगे। भदंत शाक्यपुत्र सागर ने बताया कि महाविहार बनाने का उद्देश्य भगवान बुद्ध के विचारों के साथ लोगों को सत्य और अहिंसा की शिक्षा देना है। उन्हें जीवन जीने की कला सिखाना है।

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