बीमा के फर्जी दस्तावेजों से फायनेंस कर दी टाटा सफारी

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:00 AM IST

Bhopal News - ट्रांसपोर्ट रिपोर्टर | भोपाल एक शोरूम पर एक ट्रैवल्स संचालक ने गाड़ी की फर्जी बीमा पॉलिसी देने के आराेप लगाए हैं।...

Bhopal News - mp news tata safari financed by fake documents of insurance
ट्रांसपोर्ट रिपोर्टर | भोपाल

एक शोरूम पर एक ट्रैवल्स संचालक ने गाड़ी की फर्जी बीमा पॉलिसी देने के आराेप लगाए हैं। शिकायतकर्ता ने शोरूम से अगस्त 2018 में एक टाटा सफारी फाइनेंस कराई थी। फर्जी कागजात की बात सामने आने के बाद उन्होंने पुलिस और एक्सीडेंट के डर से घर के बाहर गाड़ी नहीं निकाली है। 10 महीने से भटक रहे शिकायतकर्ता को अब तक राहत नहीं मिली है। गाड़ी फाइनेंस कराने के कारण उन्हें हर महीने किस्त भी चुकानी पड़ रही है।

राहुल नगर निवासी प्रवीण बौद्ध ट्रैवल्स संचालक हैं। उन्होंने अगस्त 2018 में वरेण्यम मोटर्स के शोरूम से टाटा सफारी गाड़ी खरीदी थी। गाड़ी उन्होंने फाइनेंस कराई थी। प्रवीण ने बताया कि रजिस्ट्रेशन कार्ड आने पर उन्होंने बीमा पॉलिसी देखी तो दोनाें में अंतर था। इसकी शिकायत उन्होंने कंपनी से की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। शोरूम पर करीब तीन बार शिकायत करने के बाद इसकी शिकायत आरटीओ और फिर लोकपाल में की। प्रवीण ने आरोप लगाए कि गाड़ी देते समय उनसे बीमा के नाम पर 31 हजार रुपए लिए गए थे। जब उन्होंने ऑनलाइन इसकी जांच की, तो उन्हें गाड़ी का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। शिकायत मिलने के बाद आरटीओ ने शोरूम संचालक को नोटिस जारी कर दिया है। प्रवीण ने बताया कि उन्होंने जिंसी स्थित वरेण्यम मोटर्स के मैनेजर विशाल सक्सेना से गाड़ी ली थी।

शिकायत मिलने पर शोरूम संचालक को आरटीओ ने जारी किया नोटिस

यह थी गड़बड़ी

प्रवीण ने सफेद रंग की गाड़ी ली थी, जबकि पॉलिसी में उसे ब्लैक रंग का दिखा दिया गया। इंजन और चेचिस नंबर भी गलत है। इतना ही नहीं ऑनलाइन चेक करने पर उनके नंबर पर 100 रु का बीमा दिख रहा है।

शोरूम से हुई गड़बड़ी

आरटीओ का काम पूरी तरह से ऑनलाइन हो गया है। इसमें शोरूम संचालक को ही पूरी जानकारी भरनी होती है। गाड़ी और ग्राहक से लेकर उसके कागजात तक की डिटेल शोरूम से ही ऑनलाइन भरी जाती है। जानकारी पूरी तरह फीड होने के बाद ऑटोमेटिक नंबर जारी हो जाता है। इसके बाद अारटीओ में उस गाड़ी की एक फाइल बन जाती है। आरटीओ के पास ऐसा कोई सिस्टम नहीं है, जिससे उनके कागजात और शोरूम द्वारा भरी गई जानकारी की जांच की जा सके।

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