मप्र / ज्यादा बारिश से फसलें बर्बाद, खेत की जल निकासी के बाद लगा सकते हैं चना; उकठा रोग को देगा मात

mp news trouble for farmers after heavy rains
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  • कृषि विशेषज्ञों ने कहा- चना कुदरत गोल्ड का दाना सुनहरा व बोल्ड होगा, एक फली में बनेंगे दो दाने

दैनिक भास्कर

Sep 18, 2019, 03:06 PM IST

भोपाल। इस साल मध्यप्रदेश झमाझम बारिश से तर-बतर हो गया है। बारिश के कारण आए नदी-नाले उफान की वजह से फसलें बह गई है तो अधिकांश जगहों पर अपेक्षाकृत धूप नहीं निकलने की वजह से पौधों की ग्रोथ नहीं हो पाई है। किसानों का मानना है बारिश से फसलों की ऐसी स्थिति हो गई है, जो स्प्रे या कीटनाशक छिड़काव करने के बाद भी नहीं सुधर सकती है।

 

मध्यप्रदेश समेत देशभर में पहली अक्टूबर से रबी सीजन शुरू हो जाएगा। ऐसे में प्राकृतिक आपदाओं की वजह से खराब हुई खरीफ फसलों के नुकसान की भरपाई किसान 'चना कुदरत गोल्ड' किस्म की बोकर कर सकता है। यह किस्म कृषि शोध संस्था वाराणसी के किसान प्रकाशसिंह रघुवंशी ने ईजाद की है। यह किस्म उप्र, बिहार, महाराष्ट्र, मप्र, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा, बंगाल, छत्तीसगढ़, पंजाब आदि राज्यों के लिए किस्म तैयार की है। 


चने की इस प्रजाति का दाना सुनहरा रंग का होता है। एक फली में दो दाने बड़े आकार के बनते हैं। पौधे में अधिक शाखाएं बन कर फैलती है। जिन पर अधिक मात्रा में फूल व फल आते हैं। अच्छी पैदावार मिलती है। यह प्रजाति फली छेदक व उकटा रोग अवरोधी है। गौरतलब है कि खेत में मौज्ूदा समय में पर्याप्त नमी है, इसका फायदा किसान भरपूर उठा सकते हैं। दलहनी फसलें खराब होने की वजह से चना फसल के दाम अच्छे मिल सकते हैं। इसे एक अक्टूबर से एक दिसंबर तक बो सकते हैं। प्रति एकड़ 25 किलोग्राम बीज लगता है। यह 100 से 110 दिन में पक जाएगी। उत्पादन प्रति एकड़ 13 क्विंटल होगा। 

 

ऐसे करें खेत की तैयारी

  • चना के लिए खेत की मिट्टी बहुत ज्यादा महीन या भुरभुरी बनाने की आवश्यकता नही होती।
  • खेत को तैयार करते समय 2-3 जुताई खेत को समतल बनाने के लिए पाटा लगाएं। पाटा लगाने से नमी संरक्षित रहती है।

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