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मप्र / आदमपुर छावनी में कचरे से बिजली के लिए नगर निगम तलाशेगा नए विकल्प



Municipal Corporation will explore new options for electricity from waste in Adampur Cantonment
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Municipal Corporation will explore new options for electricity from waste in Adampur Cantonment

  • सरकार बिजली खरीदने को तैयार हुई तो अब कंपनी बैकफुट पर आई
  • कंपनी का दावा- हमने 20 करोड़ खर्च िकए, 10 करोड़ के बिल भी निगम को दिए
  • कंपनी के साथ अब टेक्नोलॉजी भी बदलेगा नगर निगम

Dainik Bhaskar

Nov 10, 2019, 05:54 AM IST

भोपाल . आदमपुर छावनी में कचरे से 23 मेगावाट बिजली बनाने के लिए नगर निगम को अब नए विकल्प तलाशना होंगे। लंबी जद्दोजहद के बाद राज्य सरकार पूर्व निर्धारित दर 6.39 रुपए प्रति यूनिट पर बिजली खरीदने को राजी हो गई है, लेकिन अब एस्सेल इंफ्रा ने इस प्रोजेक्ट में रुचि लेना बंद कर दिया है।

 

शुक्रवार को नगर निगम और एस्सेल इंफ्रा के बीच हुई बैठक में कंपनी के प्रतिनिधियों ने औपचारिक रूप से भले ही प्रोजेक्ट क्लोज करने की बात नहीं की लेकिन उन्होंने अफसरों को संकेत दे दिए कि अब हम इसमें निवेश नहीं करेंगे। नगर निगम के अफसरों ने कहा कि वे अब नए विकल्प तलाशेंगे। इसमें कंपनी के साथ टेक्नाेलॉजी भी बदली जा सकती है। 

 

कंपनी ने वर्ष 2016 में 23 करोड़ की बैंक गारंटी दी है। तीन सालों में सड़क, बाउंड्रीवॉल और अन्य कार्यों के लिए कंपनी, निगम को 10 करोड़ के बिल दे चुकी है। हालांकि कंपनी का दावा है कि वह 20 करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर चुकी है। समय पर पीपीए नहीं किए जाने के आधार पर कंपनी 23 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी की वापसी के साथ ही अब तक हुए निवेश का भुगतान भी करने की मांग करेगी। नगरीय आवास एवं विकास विभाग के अधिकारी बताते हैं कि इस पर अंतिम फैसला विभाग के आयुक्त करेंगे।

 

दो बड़ी अड़चनों से आगे नहीं बढ़ सका प्रोजेक्ट

पहली- अनुबंध के बाद बदल गए स्वच्छ भारत मिशन के मापदंड
नगर निगम ने 2016 में आदमपुर छावनी में कचरे से बिजली बनाने के लिए मुंबई की एस्सेल इंफ्रा से अनुबंध किया था। दिसंबर 2017 से आदमपुर छावनी में कचरा इस उम्मीद के साथ डम्प किया गया था कि अगले कुछ दिनों में कचरे से बिजली बनना शुरू हो जाएगी। उस समय कचरे के सेग्रीगेशन का प्रावधान नहीं था। यह प्रोजेक्ट भी मिक्स कचरे की टेक्नालॉजी पर बनाया गया था। लेकिन अब स्वच्छ भारत मिशन के मापदंडों के तहत सेग्रीगेशन जरूरी हो गया है। ऐसे में टेक्नालॉजी भी बदलना होगी।

 

दूसरी- 40 फीसदी सब्सिडी के कारण पीपीए में देरी, अब कंपनी राजी नहीं
पावर पर्चेज एग्रीमेंट (पीपीए) के अनुसार निगम, कंपनी को 465.76 करोड़ की 40 प्रतिशत राशि लौटाएगा। बिड डॉक्यूमेंट में बिजली की दर 6.39 रुपए यूनिट बताई गई है। मप्र विद्युत नियामक आयोग ने बिजली के लिए टैरिफ 6.39 रुपए यूनिट ही तय किया है, लेकिन उसमें स्पष्ट कहा गया है कि इस दर में सब्सिडी को शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में पावर मैनेजमेंट कंपनी इस दर पर अनुबंध करने को राजी नहीं हुई और कंपनी कम दर पर राजी नहीं हो रही थी। नगर निगम ने कंपनी को बताया कि अब राज्य सरकार 6.39 रुपए प्रति यूनिट पर बिजली लेने पर राजी हो गई है।

 

हम तलाश रहे हैं िवकल्प
 एस्सेल इंफ्रा के साथ हुई बैठक में यह स्पष्ट हो गया है कि अब कंपनी इस प्रोजेक्ट को नहीं करेगी। हम नए विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। प्रोजेक्ट क्लोज करने के साथ ही बैंक गारंटी आदि का भी हिसाब किया जाएगा।
बी विजय दत्ता, कमिश्नर, नगर निगम

 

कंपनी बोर्ड करेगा अंतिम निर्णय
 नगर निगम अधिकारियों के साथ बैठक हुई है। उन्होंने पीपीए के बारे में जानकारी दी है। अब प्रोजेक्ट को करने के बारे में अंतिम निर्णय कंपनी का बोर्ड करेगा। हमने मुख्यालय के उच्च अधिकारियों को जानकारी दे दी है।  
नारायण राव, प्रोजेक्ट मैनेजर, एस्सेल इंफ्रा

 

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