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इस वर्ष नर्सिंग स्टूडेंट्स को नहीं मिल सकेगी स्कॉलरशिप

डीबी स्टार

Danik Bhaskar | Sep 11, 2018, 02:12 AM IST
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नर्सिंग काउंसिल की लापरवाही नर्सिंग की पढ़ाई कर रहे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों पर भारी पड़ सकती है। काउंसिल के अफसरों की लेटलतीफी के कारण 20 कॉलेजों को अभी तक पिछले साल की मान्यता नहीं मिली है। इसका खामियाजा वहां वहां पढ़ रहे स्टूडेंट्स भुगतेंगे और उन्हें स्कॉलरशिप नहीं मिल पाएगी। एससी-एसटी विभाग के अफसरों के मुताबिक कॉलेजों की मान्यता के आधार पर हर साल सत्र के आखिर में स्कॉलरशिप दी जाती है। इस बार भी यही प्रक्रिया अपनाई जाना थी, लेकिन जब कॉलेजों की मान्यता के दस्तावेजों की पड़ताल की तो उनमें से अिधकांश के पास वर्ष 2017-18 की मान्यता नहीं थी। यही वजह है कि विभाग को बजट के बावजूद छात्रवृत्ति रोकना पड़ी। इस बीच नया सत्र शुरू हो चुका है। यदि मान्यता की कार्रवाई जल्द पूरी नहीं हुई तो विद्यार्थियों को बिना छात्रवृत्ति नहीं मिल पाएगी।

नहीं बनी टीम

नर्सिंग काउंसिल के सूत्रों के मुताबिक मान्यता के लिए कॉलेजों के निरीक्षण की कार्रवाई जनवरी माह में शुरू होती है। जुलाई तक सभी कॉलेजों के दस्तावेज और मौका-मुआयना करने के बाद कॉलेजों को काउंसिल मान्यता जारी कर देता है। इस वर्ष निरीक्षण की कार्रवाई निर्धारित वक्त पर शुरू नहीं हो पाई। नतीजतन, मामला पिछड़ गया। अधिकारियों की लापरवाही के कारण छह माह बाद भी निरीक्षण दल का गठन नहीं हो सका है।

राशि एक साथ देंगे

नर्सिंग काउंसिल की पूरी कार्रवाई फिलहाल वर्ष 2017-18 की मान्यता को लेकर चल रही है। इसके बाद वर्ष 2018-19 (वर्तमान सत्र) की मान्यता प्रक्रिया शुरू होगी। अफसरों के मुताबिक तब तक यह सत्र खत्म हो जाएगा। ऐसी स्थिति में दोनों वर्ष की छात्रवृत्ति विद्यार्थियों को अगले साल ही मिल पाएगी। यानी छात्र-छात्राओं को दो शिक्षा सत्र बिना स्कॉलरशिप के पढ़ाना होगा।

बगैर मान्यता नहीं दे पाएंगे स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप

 बगैर मान्यता वाले 34 नर्सिंग कॉलेजों में से सिर्फ 14 कॉलेजों को मान्यता जारी हुई है। बाकी कॉलेजों के पास 2017-18 की मान्यता नहीं है। इसके चलते इन कॉलेजों के विद्यार्थियों की स्कॉलरशिप अटक गई है। उन्हें इस साल भुगतान नहीं कर पाएंगे। पूरी राशि मान्यता के बाद ही देंगे।


कॉलेज न लें छात्रों से फीस

सामान्य तौर पर कॉलेज संचालक छात्र-छात्राओं से फीस वसूल लेते हैं। आदिवासी विकास विभाग बाद में विद्यार्थियों को भुगतान कर देता है। इस बार मान्यता का पेंच फंसने से विभागीय अधिकारियों ने कॉलेज संचालकों से फीस न लेने के लिए कहा है। अगर कॉलेजों ने फीस वसूल ली तो विद्यार्थियों के लिए परेशानी खड़ी हो जाएगी। उन्हें अन्य खर्चों के लिए राशि जुटाना मुश्किल होगा।