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  • On March 31, there will be 10 to 12 thousand officer employees retired, who will have to pay 3500 crores

मप्र / 31 मार्च को 10 से 12 हजार अधिकारी-कर्मचारी होंगे सेवानिवृत्त, जिन्हें देना पड़ेंगे 3500 करोड़

वल्लभ भवन (फाइल फोटो) वल्लभ भवन (फाइल फोटो)
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वल्लभ भवन (फाइल फोटो)वल्लभ भवन (फाइल फोटो)

  • सरकार कर रही विचार... सेवानिवृत्ति के बाद 6 माह या 1 साल की संविदा नियुक्ति दी जाए, ताकि फिलहाल भुगतान से बचा जा सके
  • सरकार दे सकती है सेवानिवृत्ति के बाद 6 महीने या 1 साल की संविदा नियुक्ति  

Dainik Bhaskar

Feb 15, 2020, 06:29 AM IST

भोपाल . प्रदेश में 24 साल बाद अधिकारी-कर्मचारियों के रिटायरमेंट को लेकर अजीबो-गरीब स्थिति बन गई है। वजह बीते दो साल से रिटायरमेंट पर रोक लगी होना है। तत्कालीन भाजपा सरकार ने 31 मार्च 2018 से 31 मार्च 2019 के बीच होने वाले रिटायरमेंट पर रोक लगा दी थी, तब सेवानिवृत्ति की आयु 60 से 62 साल की गई थी। अब ऐसे करीब 10 से 12 हजार अधिकारी-कर्मचारी अगले महीने 31 मार्च को शासकीय सेवा की अवधि पूरी कर रहे हैं।

ऐसे में जहां अधिकारी वर्ग को रिटायरमेंट पर 80 लाख से 1 करोड़ रुपए और कर्मचारी को 25 से 30 लाख रुपए तक का भुगतान करना पड़ेगा। इस पर 3500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार का आकलन किया गया है, वह भी ऐसे में जब प्रदेश का खजाना खाली है। इसे लेकर सरकार पसोपेश में है। इसलिए सरकार में सेवानिवृत्ति के विकल्पों पर विचार चल रहा है। इसमें कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद 6 महीने या 1 साल की संविदा नियुक्ति दे दी जाए, जिससे रिटायरमेंट पर होने वाले भुगतान से फिलहाल बचा जा सके। हालांकि इस बारे में कोई भी खुलकर कहने से बच रहा है।


सेवानिवृत्ति पर 22 साल पहले भी बने थे ऐसे ही हालात
इसी तरह के हालात 22 साल पहले बने थे जब 1996 में शासकीय सेवकों की सेवानिवृत्ति की आयु 58 से बढ़ाकर 60 साल कर दी थी। सरकार को कर्मचारियों के रिटायरमेंट पर एकमुश्त भुगतान की इस स्थिति का सामना 31 मार्च 2021 में भी करना पड़ेगी, जब 1 अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2022 के बीच करीब 15 हजार कर्मचारी एक साथ रिटायर होंगे। उस दौरान भी 4000 करोड़ रुपए का एक साथ भुगतान करना पड़ेगा। इस बढ़े हुए खर्चे का इस साल इंतजाम होना मुश्किल है।

भाजपा सरकार ने सेवानिवृत्ति की आयु 60 से 62 साल कर दी थी

  • 80 लाख से 1 करोड़ रुपए तक भुगतान करना होगा अधिकारी वर्ग को रिटायरमेंट पर
  • 25 से 30 लाख रुपए तक भुगतान करना पड़ेगा सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट पर

ऐसे बढ़ गया खर्चा- यदि 31 मार्च 2018 को रिटायर होने वाले शासकीय सेवकों को विधिवत रिटायर किया जाता तो उस दौरान अधिकारियों को 5 लाख और कर्मचारियों को 2 लाख रुपए कम भुगतान करना पड़ता। दो साल में यह खर्चा 200 करोड़ रुपए बढ़ गया है। बहरहाल अब रिटायरमेंट पर कर्मचारियों को नियमानुसार साढ़े सोलह माह की ग्रेज्युटी, 10 माह का अवकाश नकदीकरण और स्वास्थ्य बीमा योजना में जमा हुई राशि और कर्मचारी भविष्य निधि में जमा राशि का ब्याज के साथ भुगतान करना होता है। यह राशि अधिकारियों के खाते में 80 लाख से 1 करोड़ तो कर्मचारियों के हिस्से में 25 से 30 लाख रुपए होती है।

सरकार के पास दो विकल्प

  •  सेवानिवृत्ति की आयु ही एक साल बढ़ा दी जाए, लेकिन दोनों मामलों पर जीएडी को परीक्षण और सेवावृद्धि की आयु बढ़ाने का फैसला वित्त विभाग को लेना है।
  •  सेवानिवृत्ति के बाद 6 माह या 1 साल की संविदा नियुक्ति दे दी जाए, जिससे फिलहाल भुगतान से बचा जा सके।

 करीब 8 हजार से ज्यादा कर्मचारियों का रिटायरमेंट होना है। सेवानिवृत्ति पर होने वाले भुगतान की राशि तो स्वाभाविक रूप से ज्यादा होती है। इसके इंतजाम किए जा रहे हैं। सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। बावजूद इसके आगे सभी विकल्पों पर विचार करेंगे। - तरुण भनोत, वित्त मंत्री
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