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मरीज भूखे न रहें इसलिए प्राचार्य, प्रोफेसर व छात्र रोज लाते हैं रोटी

शासकीय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी साइंस एंड कॉमर्स काॅलेज (पुराना बेनजीर कॉलेज) असहायों की मदद करने के लिए आगे आया...

Dainik Bhaskar

Sep 10, 2018, 03:21 AM IST
Bhopal - मरीज भूखे न रहें इसलिए प्राचार्य, प्रोफेसर व छात्र रोज लाते हैं रोटी
शासकीय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी साइंस एंड कॉमर्स काॅलेज (पुराना बेनजीर कॉलेज) असहायों की मदद करने के लिए आगे आया है और इसके लिए कॉलेज परिसर में रोटी बैंक बनाया गया है। ताकि ऐसे लोगों की मदद की जा सके जो मीलों दूर आकर शहर के अस्पताल में आकर अपना या अपने परिजनों का इलाज करा रहे हैं। इसमें कॉलेज में आने वाली प्राचार्य से लेकर टीचिंग फैकल्टी व नॉन टीचिंग स्टाफ के अलावा छात्र-छात्राओं से रोजाना एक से अधिक रोटी लाने की अपील की है। शुरुआती दिनों में ही रोटी के कलेक्शन की संख्या रोजाना ही 500 से 600 तक पहुंच रही है। इसमें बढ़ोतरी हो सकती है।

प्राचार्य डॉ. विभा शुक्ला ने बताया कि बीएससी के छात्र सुमित का लिखित आवेदन प्राप्त था। उसने मांग की थी कि वह कॉलेज में रोटी बैंक खाेलना चाहता हूं। यह छात्र कुछ अस्पतालों में विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा चलाए जाने वाले लंगरों में जाकर उनकी साथ हाथ बंटाता था। इस छात्र ने परेशानी बताई कि अस्पतालों मरीजों के परिजनों कई बार पेटभर रोटी नहीं मिल पातीं। दो या तीन रोटी दी जाती है। जबकि वे इससे अधिक की मांग कर लेते हैं। यह सुझाव असहाय लोगों की मदद करने वाला और छात्रों को सामाजिक सरोकार से जोड़ने वाला लगा। इसलिए यह रोटी बैंक शुरू किया गया। साथ ही तय किया गया कि इसमें सभी छात्रों व स्टॉफ की स्वैच्छिक रूप से भागीदारी कराई जाएगी। अब इसमें अन्य छात्र और फैकल्टी भी जुड़ रही है। इस बैंक की शुरुआत एक छोटे डिब्बे से की गई।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी साइंस एंड कॉमर्स काॅलेज के स्टूडेंट्स आैर फैकल्टी मेंबर्स और नॉन टीचिंंग स्टाफ ने की पहल

30 अगस्त से हुई थी रोटी बैंक की शुरुआत

छात्रसंघ प्रभारी डॉ. राजेश श्रीवास्तव के अनुसार रोटी बैंक की शुरुआत 30 अगस्त को की गई है। इस दिन से लगातार रोटी बैंक में छात्र व फैकल्टी अपनी सहभागिता दे रहे हैं। कॉलेज खुलने का समय सुबह 8:30 है। वहीं इसमें दोपहर 3 बजे तक रोटी कलेक्शन के लिए डिब्बा रख रखा है। इसके बाद अस्पतालों में यह रोटी पहुंचाई जाती हैं। इसमें छात्र भी आगे आते हैं। इसके लिए मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्वयं सेवा से जुड़े शिक्षकों व छात्रों का सहयोग है।

अभी 700 रोटियां, 2000 से ज्यादा जा सकती है संख्या

कॉलेज में 30 टीचिंग फैकल्टी, 15 नॉनटीचिंग स्टाफ और लगभग 2000 छात्र-छात्राएं हैं। इनमें यह रोजाना सिर्फ एक रोटी भी ला लाते हैं तो 2000 से अधिक संख्या में कलेक्शन होगा। इससे बड़ी संख्या में लोगों कम से कम एक वक्त की रोटी मिल सकेगी। यह काम सतत रूप से चले इसलिए इसके लिए छात्रों के ग्रुप बनाए जा रहे हैं। जिससे हर एक छात्र की सहभागिता तय हो सके। कॉलेज प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि यह अनिवार्य नहीं है। लेकिन, सामाजिक सरोकार के लिए छात्र आगे आएं इसलिए उन्हें प्रेरित किया जा रहा है।

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