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भास्कर एक्सक्लूसिव: ई-वे बिल की छोटी सी गलती को भी टैक्स चोरी मान वसूली जा रही पेनाल्टी

ट्रक पर लदे माल का वजन और रेट दोनों चैक किए जाना भी बना परेशानी की वजह।

Dainik Bhaskar

Jul 02, 2018, 07:34 AM IST
राजधानी में रोजाना 10 हजार से ज् राजधानी में रोजाना 10 हजार से ज्

भोपाल. वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ई-वे बिल की गलतियां ट्रांसपोर्टर्स पर भारी पड़ रही हैं। एक जानकारी गलत होने पर पूरे ट्रक में लदे माल पर पेनाल्टी लग रही है। विभाग न तो गलती की वजह जानना चाहता, न ही उसे सुधारने का कोई मौका। बड़े ट्रांसपोर्टर्स संगठित होकर काम करते हैं, इसलिए वे ई-वे बिल का पार्ट-बी ठीक से भरवा ले रहे हैं, लेकिन छोटे ट्रांसपोर्टर्स पर बड़े पैमाने पर पेनाल्टी लगाई जा रही है। जानकार कहते हैं कि सरकार जीएसटी इसलिए लेकर आई थी, क्योंकि टैक्स चोरी करने वाले इसके दायरे में आएं, लेकिन इन मामलों में वह माल लाने वाले के इरादे पर गौर तक नहीं कर रही। भले ही उसकी मंशा टैक्स चोरी की न हो। राजधानी में रोजाना 10 हजार से ज्यादा ट्रक आते-जाते हैं। इनके लिए 60 हजार से ज्यादा ई-वे बिल रोजाना जनरेट किए जा रहे हैं। विभाग का तर्क है कि हम इनमें से रोजाना 1000 वाहन ही चैक कर पा रहे हैं। इनमें से 2 या तीन में ही गड़बड़ी मिल रही है। राजधानी में करीब 60% कारोबार छोटे ट्रांसपोर्टर्स करते हैं। उनके पास 8 से 10 गाड़ियां हैं। ऐसे में वे सिर्फ ई वे-बिल भरने के लिए कोई स्टाफ नहीं रख सकते। ऐसे में उनकी ओर से ज्यादा गलतियां हो रही हैं।

कुछ ऐसी भी परेशानी: ट्रक पर लदे माल का वजन और रेट दोनों चैक किए जा रहे हैं। अगर वजन बराबर हो तो अधिकारी रेट क्रॉस चैक करते हैं और इस तर्क के साथ पेनाल्टी लगा दी जाती है कि सामान का जो रेट लिखा है वह बाजार मूल्य से कम है, जबकि नियमानुसार रेट के बारे में अधिकारी पूछताछ नहीं कर सकते।

इन चार उदाहरणों से समझ आती है ई वे-बिल की परेशानी

1. फिनिश्ड आयरन रॉड लेकर एक ट्रक रायपुर से मंडीदीप आया। ट्रांसपोर्टर ने जो ई वे-बिल जनरेट किया, उसमें मंडीदीप (इंदौर) लिख दिया। गाड़ी पकड़ ली गई। लाख सफाई दी कि मंडीदीप की पोजिशन को लेकर थोड़ी गफलत थी, इसलिए यह गलती हो गई, लेकिन विभाग ने वाहन में लदे माल का मूल्यांकन करके उस पर पेनाल्टी लगा दी।

2. दिल्ली से पिपरिया के व्यापारी का मशीनरी का सामान लेकर एक ट्रक दिल्ली से भोपाल आया। चूंकि दिल्ली से सीधे पिपरिया के लिए गाड़ी नहीं मिलती, इसलिए ट्रांसपोर्टर ने भोपाल लाकर दूसरे ट्रक से माल पिपरिया भेजा। ट्रांसपोर्टर ने गाड़ी नंबर एमपी 04 टीएस की जगह टीएफ कर दिया। रास्ते में गाड़ी पकड़ ली गई, जो पेनाल्टी लेकर ही छोड़ी गई।

3. माल लेकर ट्रक दिल्ली से आया। ई-वे बिल पर लिखा था कि माल पिपलानी में खाली होगा, लेकिन गोडाउन में जगह नहीं होने के कारण माल कोलार स्थित गोडाउन में खाली कर दिया। व्यापारी द्वारा कारण बताने के बाद भी विभाग ने भारी-भरकम पेनाल्टी लगा दी।

4. वाहन चैकिंग के दौरान महाराष्ट्र के जालना से आए एक ट्रक में ई-वे बिल पर तिथि गलत लिखी थी। ड्राइवर ने पूछताछ के दौरान यह बात मान ली। उसने माल के मालिक से बात कराई। उसने भी समझाने की कोशिश की, लेकिन विभाग नहीं माना और पूरे माल पर पेनााल्टी लगा दी।

मामूली गलतियां भी बख्शी नहीं जा रहीं

भोपाल टैक्स लॉ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एस कृष्णन के मुताबिक, विभाग को चाहिए कि वह लोगों को इंटेंशन देखे। अगर कोई जानकारी भरने में त्रुटि की गई है तो उसे माफ करने का भी प्रावधान होना चाहिए। लिपिकीय गलती का अर्थ यह तो नहीं लगाना चाहिए कि वह टैक्स चोरी कर रहा है।

छोटे व्यापारी कारोबार से ही बाहर हो जाएंगे
ट्रांसपोर्टर कमल पंजवानी ने बताया कि यह समस्या बेहद गंभीर है। देशभर के ट्रांसपोर्टर्स 20 जुलाई से राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर जा रहे हैं। इनमें डीजल की बढ़ती कीमतों के साथ ई-वे बिल भी अहम मुद्दा है। ऐसे में तो छोटे ट्रांसपोर्ट्स कारोबार से ही बाहर हो जाएंगे।

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