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विजन 2035 को टारगेट बनाएं टेक्नोलॉजी से जुड़े लोग

Dainik Bhaskar

Sep 10, 2018, 02:11 AM IST

News - मेरे इतने सालों के तजुर्बे का निचोड़ आपको बता रहा हूं, जीवन में मेहनत करना बहुत जरूरी है। मंजिलें होती हैं बहुत...

Bhopal - विजन 2035 को टारगेट बनाएं टेक्नोलॉजी से जुड़े लोग
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मेरे इतने सालों के तजुर्बे का निचोड़ आपको बता रहा हूं, जीवन में मेहनत करना बहुत जरूरी है। मंजिलें होती हैं बहुत जिद्दी, हासिल कहां नसीब से होती हैं, ये तूफां भी हार जाते हैं जब कश्तियां अपनी ज़िद पर होती हैं। यह कहना है बीएचईएल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डीके ठाकुर का। वह मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नाेलॉजी (मैनिट) के 15वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा- टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सक्रिय होने के नाते यह हमारी जिम्मेदारी है कि अब हम सभी टेक्नोलॉजी विजन 2035 को अचीव करना अपना टारगेट बनाएं। स्पेस टेक्नोलॉजीज में इंडिया बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। नैनो टेक्नोलॉजी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, 3-डी प्रिंटिंग, डाटा एनालिसिस, लाइटिंग टेकनोलॉजी बेस्ड ऑन नैनो टेक्नोलॉजी आज के समय में उभरती हुई टेक्नोलॉजीज हैं। हमें इनसे भी आगे जाकर नए क्रिएशन के बारे में सोचना है।

ऐसा है भारत का टेक्नोलॉजी विजन 2035









इतनों को मिली डिग्री

(वर्ष 2016-17 और 2017-18 बैच)

644 ग्रेजुएशन 380 मास्टर्स 66 पीएचडी स्टूडेंट्स

प्रखर अग्रवाल

इंस्टीट्यूट टॉपर गोल्ड मेडल

एलिस जैन

ओवरऑल मेरिटोरियस स्टूडेंट

आदित्य विक्रम जैन

केमेस्ट्री टॉपर

मंजिलें होती हैं बहुत जिद्दी, हासिल कहां नसीब से होती हैं, ये तूफां भी हार जाते हैं जब कश्तियां अपनी जिद पर होती हैं...

ओवरऑल टॉपर के लिए कुट्टन मेमोरियल गोल्ड मेडल, टॉपर इन कंप्यूटर साइंस के लिए अर्पित गोयल मेमोरियल गोल्ड मेडल

आज तक कोई क्लास मिस नहीं की

स्टार्टअप और तरह-तरह के कॉम्पीटिशंस जीतने के लिए मैंने कभी क्लास मिस नहीं की। एग्जाम की जितनी तैयारी क्लासरूम में होती है, उतनी प्रिपरेशन बाद में नहीं हो सकती। क्लासरूम मिस करके खाली समय में उसे रिकवर करने से बेहतर है कि खाली समय में ब्रांच से जुड़ी एक्स्ट्रा चीजें पढ़ें। मैंने कोर्स के दौरान अपने सिस्टम, माउस और की-बोर्ड को ट्रैक करने की ऐसी डिवाइस तैयार की, जिसका यूज डिफेंस में किया जा सकता है।

गर्ल स्टूडेंट के लिए डॉ. एचबी खुरासिया गोल्ड मेडल

मुझे पढ़ाकर समझने की आदत, मां को पढ़ा दिया 90% सिलेबस

यूं तो पूरी पढ़ाई में सभी का सहयोग रहा, लेकिन मां ने इस डिग्री के लिए मेरे जितनी ही मेहनत की है। मुझे दरअसल पढ़ाकर पढ़ने और समझने की आदत है। मैं यदि किसी टॉपिक को पढ़ने के बाद उसे दूसरे को पढ़ा दूं तो वह मुझे याद हो जाता है। इस आदत के कारण मेरी मां ने भी मेरा करीब 90 प्रतिशत सिलेबस पढ़ लिया। अब चेन्नई की एक कंपनी एनएलटी लिमिटेड में जॉब ज्वाइन की है, यहां मैं शिप बिल्डिंग पर काम करूंगी।

हाइएस्ट मार्क्स इन केमेस्ट्री के लिए प्रो. एचएल कपूर गोल्ड मेडल

मेरी सलाह लेकर दवा लेती है फैमिली

11वीं में केमेस्ट्री पढ़ाने वाली टीचर का पढ़ाने का तरीका इतना इंट्रेस्टिंग था कि केमेस्ट्री मेरे लिए सबसे मजेदार सब्जेक्ट बन गया। मैं दवाइयों के केमिकल कम्पाउंड्स के बारे में बहुत पढ़ता हूं। हालत यह हो गई है कि मेरी पूरी फैमिली दवा लेने से पहले अब मुझसे पूछती है। मुझे टीचिंग में जाना है ताकि मेरी टीचर की तरह ही मैं भी स्टूडेंट्स का सब्जेक्ट फियर कम कर सकूं। मैं जॉब के बजाय अब इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज की प्रिपरेशन कर रहा हूं।

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