भोपाल / राजधानी में अत्यधिक बारिश से परेशान लोगों ने कराया मेंढक-मेंढकी का तलाक



भोपाल के इंद्रपुरी के एक मंदिर में मेंढ़क-मेंढ़की का विधि-विधान से तलाक कराया गया। भोपाल के इंद्रपुरी के एक मंदिर में मेंढ़क-मेंढ़की का विधि-विधान से तलाक कराया गया।
मंदिर में मेंढ़क-मेंढ़की के तलाक के पहले पूजा-अर्चना हुई। मंदिर में मेंढ़क-मेंढ़की के तलाक के पहले पूजा-अर्चना हुई।
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भोपाल के इंद्रपुरी के एक मंदिर में मेंढ़क-मेंढ़की का विधि-विधान से तलाक कराया गया।भोपाल के इंद्रपुरी के एक मंदिर में मेंढ़क-मेंढ़की का विधि-विधान से तलाक कराया गया।
मंदिर में मेंढ़क-मेंढ़की के तलाक के पहले पूजा-अर्चना हुई।मंदिर में मेंढ़क-मेंढ़की के तलाक के पहले पूजा-अर्चना हुई।

  • राजधानी के इंद्रपुरी इलाके में मंदिर में विधि-विधान से तलाक कराकर मेंढ़की मायके भेजा 
  • बारिश नहीं होने पर कराया जाता है मेंढ़क-मेंढ़की का विवाह, पूजा-अर्चना 

Dainik Bhaskar

Sep 14, 2019, 04:12 PM IST

भोपाल. यूं तो आपने इंद्रदेवता को खुश करने के लिए पूजा-अर्चना, अखंड रामायण और भंडारे कराने के साथ ही मेंढ़क-मेंढ़की का विवाह कराते देखा होगा। लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग है। लगातार हो रही बारिश से परेशान होकर राजधानी के लोगों ने मेंढक-मेंढकी का तलाक भी करवा दिया है। गुरुवार को धार्मिक रीति-रिवाज से मेंढक से मेंढकी का तलाक करवाकर मायके भेजा गया।

 

ऐसी मान्यता है कि मेंढक-मेंढकी के साथ रहने से अच्छी बारिश होती है। अभी तक की बारिश ने राजधानी में वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अत्यधिक बारिश होने से लोग परेशान होने लगे हैं, इसलिए लोग इस प्रकार के रिवाजों का सहारा ले रहे हैं।

 

मंदिर में रीति-रिवाज से कराया मेंढ़क-मेंढ़की का तलाक 

भारी बारिश को रोकने के लिए इंद्रपुरी स्थित महादेव मंदिर में लोगों ने विधि-विधान से मेंढक से मेंढकी को अलग रखने मेंढकी को मायके भेजने की रस्म अदायगी की। प्रतीकात्मक रूप में हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार मेंढक-मेंढकी का दूल्हा-दुल्हन की तरह श्रृंगार किया गया। लोगों ने वर-वधु के परिजनों के रूप में भूमिका निभाई। यह आयोजन ओम शिव शक्ति सेवा मंडल के तत्वावधान में आयोजित किया गया।

 

आयोजन के मुखिया रिंकू भटेजा का कहना है कि अब अत्यधिक बारिश से जनजीवन प्रभावित हो गया है। मौसमी बीमारियां भी लोगों को घेर रही हैं, इसलिए प्रतीक स्वरूप मिट्टी से निर्मित मेंढक-मेंढकी को अलग-अलग रखने वर्षा जल में प्रवाहित किया।

 

जुलाई में कराया गया था विवाह

इस साल प्रदेश में मानसून देरी से आया था, इससे बारिश के मौसम में भी जून जैसी गर्मी पड़ रही थी। प्रदेश में अच्छी बारिश के लिए मंडल के पदाधिकारियों ने इंद्रपुरी स्थित महादेव मंदिर में 19 जुलाई को विधि-विधान से मेंढक-मेंढकी का विवाह कराया और मंत्रोच्चार के साथ सात फेरे लगवाने की विधि संपन्न् की गई थी।

 

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