• Home
  • Madhya Pradesh News
  • Bhopal News
  • News
  • Bhopal - पर्यूषण पर्व आत्मा को निर्मल व स्वच्छ बनाने का देता है संदेश : साध्वी श्रीजी
--Advertisement--

पर्यूषण पर्व आत्मा को निर्मल व स्वच्छ बनाने का देता है संदेश : साध्वी श्रीजी

श्वेतांबर जैन समाज के मंदिरों में पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने बड़ी संख्या में...

Danik Bhaskar | Sep 09, 2018, 04:21 AM IST
श्वेतांबर जैन समाज के मंदिरों में पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। वहीं, तुलसी नगर श्री आदिनाथ मंदिर से शनिवार को कल्पसूत्र ग्रंथ का चल समारोह निकाला गया। श्री आदिनाथ मंदिर में चातुर्मास कर रहीं साध्वी देवेंद्रश्रीजी ने प्रवचन में पोषध व्रत का महत्व समझाते हुए कहा कि पोषध अर्थात एक दिन साधु व्रत का पालन करना। उन्होंने स्नात्र पूजा के महत्व को बताते हुए कहा कि पर्यूषण पर्व आत्मा को निर्मल और स्वच्छ बनाने का संदेश देता है। इस पर्व में जप-तप-त्याग से जीवन जीना चाहिए।

इधर, श्वेतांबर जैन मंदिर मारवाड़ी रोड चौक में पर्यूषण पर्व के तहत साध्वी संस्कार श्रीजी ने पोषध व्रत का महत्व समझाया। वहीं, कोहेफिजा जैन मंदिर में जिन शिशु प्रज्ञाश्रीजी ने कहा कि परमात्मा के दूर दर्शन नहीं देव दर्शन करना चाहिए। दूरदर्शन से दुर्गति होती है और देवदर्शन से सद्गति मिलती है। आत्मा की शुद्धि के लिए तप किया जाता है। समाज की प्रवक्ता रीता लोढ़ा ने बताया कि रविवार को सुबह 8 बजे पोथाजी का चल समारोह निकलेगा, इसमें चांदी की पालकी में भगवान महावीर विराजमान रहेंगे।

आदिनाथ मंदिर से शनिवार को कल्पसूत्र ग्रंथ का चल समारोह निकाला।

विश्वशांति रथयात्रा आज तुलसी नगर में

तुलसी नगर स्थित श्री आदिनाथ मंदिर के अध्यक्ष डॉ. शैलेष लूणावत ने बताया रविवार को वरघोडा चल समारोह निकाला जाएगा। कृष्णा नगर मैसूर से प्रारंभ हुई विश्व शांति रथयात्रा रविवार को मंदिर पहुंचेगी। यहां यात्रा की अगवानी की जाएगी। उन्होंने बताया कि चल समारोह के बाद मंदिर में कल्पसूत्र ग्रंथ पर प्रवचन होंगे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहेंगे।

श्री सिद्ध चक्र विधान में आराधना

पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर पंचशील नगर में शनिवार को श्री सिद्ध चक्र महामंडल का विधान कर माणने सजाए गए। इस अवसर पर मूलनायक पार्श्वनाथ का अभिषेक और मंत्रोच्चारित शांतिधारा की गई। इस अवसर पर अर्घ्य समर्पित किए गए। विधान में इंद्र-इंद्राणी बने श्रद्धालुओं ने आराधना करते हुए भक्ति भाव से नृत्य किए।