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सियासी घमासान / बेंगलुरु में बागियों से मिलने गए जीतू पटवारी को पुलिस ने हिरासत में लिया, छूटने पर बोले- क्या दोस्तों से मिलना गुनाह है?

बेंगलुरु में पुलिस से भिड़ते मंत्री जीतू पटवारी।
भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते विवेक तन्खा, साथ में दिग्विजय सिंह। भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते विवेक तन्खा, साथ में दिग्विजय सिंह।
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भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते विवेक तन्खा, साथ में दिग्विजय सिंह।भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते विवेक तन्खा, साथ में दिग्विजय सिंह।

  • मंत्री पटवारी और लाखन सिंह बेंगलुरु में 19 विधायकों से मिलने गए थे, पुलिस ने धक्का-मुक्की के बाद हिरासत में लिया
  • कांग्रेस नेता विवेक तन्खा और दिग्विजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि पुलिस ने ये कार्रवाई भाजपा के इशारे पर की 

दैनिक भास्कर

Mar 12, 2020, 07:03 PM IST

भोपाल.  मध्य प्रदेश के बागी विधायकों से मिलने बेंगलुरु गए मंत्री जीतू पटवारी और लाखन सिंह को कर्नाटक पुलिस ने गुरुवार को हिरासत में ले लिया। बाद में दोनों को पुलिस ने छोड़ दिया। रिसॉर्ट में पटवारी और लाखन की पुलिस अधिकारियों से धक्का-मुक्की हुई थी। दोनों नेता यहां ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के विधायकों से मिलने पहुंचे थे। जीतू पटवारी ने हिरासत से छूटने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि क्या दोस्तों से मिलना गुनाह है? वहीं, कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने आरोप लगाया है कि मंत्री पटवारी के साथ मारपीट की गई।

भावनात्मक दबाव डालकर विधायकों से फोन ले लिए गए- पटवारी

जीतू पटवारी ने कहा- कांग्रेस के कुछ विधायक हमसे मिलना चाहते थे। यहां पर मेरे चचेरे भाई मनोज चौधरी को भी रखा गया है। मैं अपने भाई से यहां मिलने आया, लेकिन हमें रोका गया। हम अपने दोस्तों से मिलना चाहते हैं तो क्या यह गुनाह है? क्यों नहीं मिलने दिया जा रहा है? भला हो शिवकुमारजी का, उन्होंने हमें पुलिस की गिरफ्तारी से बचाया। इन विधायकों ने 15 साल तक संघर्ष किया। उन पर भावनात्मक दबाव डालकर फोन ले लिए गए। भाजपा लोकतंत्र की हत्या कर रही है। सिंधिया राज्यसभा जाएंगे, मंत्री बन जाएंगे, लेकिन इस्तीफा देने वाले विधायकों का क्या होगा? मेरे साथी विधायकों की वेदना मैं समझ सकता हूं।

9-10 विधायकों को मनाने में कामयाब हो गए थे जीतू- कांग्रेस

कांग्रेस नेता विवेक तन्खा ने आरोप लगाया है कि पटवारी के साथ बेंगलुरु में ठहरे विधायक मनोज चौधरी के पिता भी थे। मनोज चौधरी को अपने पिता से भी मिलने नहीं दिया गया। चौधरी पर भाजपा ने दबाव बनाया हुआ है। हम इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। उन्होंने कहा कि पुलिस भाजपा के दबाव में काम कर रही है। पटवारी 9-10 विधायकों को भाजपा का साथ छोड़ने पर राजी कर चुके थे। लेकिन, भाजपा के दबाव में काम कर रही पुलिस ने मंत्रियों के साथ बदसलूकी की और उन्हें हिरासत में ले लिया।


पूर्व सीएम के बेटे को हराकर विधायक बने थे मनोज
मनोज चौधरी के पिता नारायण चौधरी कांग्रेस नेता रहे हैं। उन्होंने 2003 में कांग्रेस के टिकट पर खातेगांव से विधानसभा चुनाव लड़ा था। 2008 में उन्हें टिकट नहीं मिला तो वह निर्दलीय चुनाव लड़े। इसके बाद उनके बेटे मनोज चौधरी कांग्रेस में शामिल हो गए। 2018 में हाटपिपल्या से विधानसभा चुनाव में भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के बेटे दीपक जोशी को हराकर पहली बार चुनाव जीते।

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