पोषण आहार घोटाला / शिवराज- अफसरों की इतनी मजाल कि कैबिनेट का फैसला बदल दें; मंत्री शर्मा बोले- आपने निजी कंपनियों को दिया था 7800 करोड़ का काम

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान।
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मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान।मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान।

  • पूर्व मुख्यमंत्री चौहान ने राज्यपाल को लिखा पत्र- पोषण आहार में हुए भ्रष्टाचार की जांच हो
  • सरकार ने ईमानदार अफसर को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के लिए मजबूर किया: शिवराज

दैनिक भास्कर

Feb 18, 2020, 08:21 AM IST

भोपाल. पोषण आहार का काम निजी कंपनियों और ठेकेदारों को सौंपे जाने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री कमलनाथ से पूछा कि पोषाहार में ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए कैबिनेट का फैसला किसके इशारे पर बदला गया। उन्होंने कहा कि ऐसी अजीब सरकार मैने पहले कभी नहीं देखी, कैबिनेट के फैसले को मुख्य सचिव ने उड़ा दिया।

क्या किसी मुख्य सचिव की इतनी मजाल है कि मंत्रिमंडल के फैसले को बदल दे। ऐसे में कैबिनेट में शामिल मंत्रियों का क्या औचित्य। उन्हें सामूहिक रूप से इस्तीफा दे देना चाहिए। इन आरोपों का जवाब देते हुए मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि शिवराज ने 10 साल में 7800 करोड़ रुपए का काम निजी कंपनियों को दिया।  अब वे किस मुंह से सरकार की आलोचना कर रहे हैं। हमने तो टीआरएच में पूर्व सरकार के फैसले 70 फीसदी निजी और 30 फीसदी सरकार द्वारा किए जाने को बदला है। अब यह काम एमपी एग्रो से ही कराया जाएगा।

चौहान ने सोमवार को मीडिया से चर्चा में सरकार से सवाल किया कि तत्कालीन एसीएस गौरी सिंह ने भी कैबिनेट में विधिवत रूप से अपना पक्ष सरकार के समक्ष रखा, जिसमें निजी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान था, लेकिन बाद में इसे रिकार्ड में से बदल दिया गया। क्या कारण रहा इसे बदलने का। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब भ्रष्टाचारी अफसरों, ठेकेदारों के दबाव में ही आपकी सरकार ने ईमानदार अफसर को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के लिए मजबूर किया।

मामले की जांच होनी चाहिए- शिवराज

उन्होंने कहा कि मैने मुख्यमंत्री रहते ही पोषाहार वितरण में निजी कंपनियों और ठेकेदारों की भूमिका खत्म कर यह काम महिला स्वसहायता समूहों को देने का फैसला ले लिया था। इसके लिए 110 करोड़ रुपए की लागत से 7 आटोमेटिक संयंत्र स्थापित करने का काम शुरु कर दिया गया था, जिनमें से 5 बन गए हैं। इसके पीछे उद्देश्य था कि महिलाओं के स्वसहायता समूह टेक होम राशन तैयार करें और उसका वितरण करें जिससे कुपोषित बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पोषाहार मिल सके। इसके बाद वर्तमान सरकार ने क्यों इस फैसले को बदला। पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मामले की जांच कराए जाने के लिए राज्यपाल लालजी टंडन को भी पत्र लिखा है।

बगैर तथ्य व प्रमाण के झूठे आरोप लगाए हैं
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने कहा कि शिवराज पोषण आहार व्यवस्था में निजी कंपनियों या ठेकेदारों की भूमिका को खत्म करने की मुख्यमंत्री की घोषणा का स्वागत करने की बजाय बगैर तथ्य व प्रमाण के झूठे आरोप लगाए हैं।

कैबिनेट का फैसला क्यों बदल दिया?
वित्त और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग दोनों का प्रस्ताव था कि पोषाहार के काम का निजीकरण न हो। इसे कैबिनेट ने भी मंजूरी दे दी। बाद में फैसले को 1 से 10 तक यथावत रखा गया। 11वीं कंडिका, जिसमें लिखा था पोषाहार का निजीकरण नहीं किया जाएगा, क्यों उड़ा दिया।

आपने तो सुप्रीम कोर्ट की भी नहीं सुनी

आपके कार्यकाल में 45 लाख बच्चे कुपोषण के शिकार थे। 13.50 लाख बच्चों की मौत हो गई। 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि योजना से ठेकेदारों को बाहर करें, लेकिन आप उनसे सांठ-गांठ करते रहे। 2009 और 2015 में कैग की रिपोर्ट में कहा गया था कि 30 से 32% पोषण आहार का पैसा कंपनियां खा रही हैं।
 

मुख्य सचिव कैबिनेट के मिनट्स सक्षम अनुमोदन के बाद ही जारी करता है, उसके बाद ही विभाग आदेश देते हैं....
देर रात इस मामले पर जब भास्कर ने सीएस एसआर मोहंती से बात की तो उन्होंने कहा कि कैबिनेट के किसी भी निर्णय को बदलने का प्रश्न ही नही उठता है। कैबिनेट बैठक के मिनट्स सक्षम अनुमोदन के उपरांत ही सीएस जारी करता है, उसके बाद ही विभाग आदेश देते हैं। अगर इससे पहले कोई आदेश जारी हुआ है तो वह अनियमित है। मिनट्स आने के पहले और बाद के आदेश की तुलना उचित नहीं है। अनुमोदन के पूर्व जारी किसी भी आदेश का कोई कानूनी अस्तित्व ही नहीं है।

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