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अच्छी पहल / भारत में दिव्यांगों के लिए भी रोजगार की हैं अपार संभावनाएं: प्रशांत अग्रवाल



दिव्यांग बच्चों के साथ नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल। दिव्यांग बच्चों के साथ नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल।
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दिव्यांग बच्चों के साथ नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल।दिव्यांग बच्चों के साथ नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल।

  • 2011 की जनगणना के मुताबिक, भारत में 26,810,557 से अधिक लोग दिव्यांग हैं
  • शहरी और ग्रामीण इलाकों में पुरुष दिव्यांगों की तुलना महिलाओं से काफी अधिक है
  • पुरुष दिव्यांगों की संख्या 10 करोड़ तो महिलाओं की संख्या 8 करोड़ से अधिक है
     

May 18, 2019, 03:52 PM IST

भोपाल। पूरे देश में दिव्यांगों के लिए रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। लेकिन जानकारी के अभाव में दिव्यांग इसका फायदा नहीं उठा पाते। अगर दिव्यांगों का सही तरीके से मार्गदर्शन किया जाए तो ये किसी का सहारे न जीकर दूसरों को सहारा दे सकते हैं। ऑनलाइन ऐसे कई पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, जिन्हें दिव्यांग लोगों के सशक्तिकरण के लिए उन्हें ऑनलाइन ही सीखाया जा सकता है। इन पाठ्यक्रम को सीखने के बाद वे समाज में आम लोगों की तरह जिंदगी जी सकते हैं। ये कहना है उदयपुर (राजस्थान) नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल का।

 

प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि ग्रामीण और शहरी भारत में 60.21 प्रतिशत रोजगार की तुलना में 63.66 प्रतिशत दिव्यांग लोग काम न करने वाले हैं। दिव्यांग की की आठ श्रेणियां होती हैं, जिनमें देखना, सुनना, बोलना, चलना-फिरना, मानसिक मंदता, मानसिक बीमारी जैसी कई रोगों और विभिन्न दिव्यांगताओं को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों के बीच साक्षरता की बात की जाए तो 2011 की जनगणना के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश में 38.75% की सबसे कम साक्षरता दर दर्ज की, जिसके बाद राजस्थान 40.16% था। 

  • पर्सनल फाइनेंस

    ऑनलाइन शिक्षा  के जरिए से डिजिटल वित्तीय साक्षरता को हासिल किया जा सकता है, लेकिन इसके माध्यम से कारोबारी सिद्धांतों से संबंधित विशेषज्ञता, परिवार की वित्तीय योजना, कंपाउंड इंटरेस्ट, क़र्ज़ प्रबंधन, सेविंग तकनीकों, धन का मूल्य, ऑटो लोन, गिरवी लोन, बजट, कर-निर्धारण और रिटायरमेंट प्लान से सीखा जा सकता है। वित्तीय साक्षरता के बिना यह मुमकिन है कि आप ऐसा कोई निर्णय कर बैठें, जो आपकी वित्तीय सेहत के लिए खराब हो और जो आखिकार आपको नकारात्मक नतीजों की तरफ ले जाए। बता दें कि कोर्स को इंटरमीडिएट या स्नातक के बाद किया जा सकता है। 

  • मोबाइल रिपेयरिंग

    फ्लिपकार्ट, अमेजन, इंस्टाकैश, क्विकर सहित उदयुपर के नारायण सेवा संस्थान जैसे कुछ एनजीओ अपने स्मार्ट विलेज में दिव्यांग लोगों के लिए व्यावसायिक पाठ्यक्रम प्रदान कर रहे हैं और बाद में फ्री टूल्स भी मुहैया कराते है जिससे अपना स्टार्टअप या व्यापार कर सके।

  • साइबर सिक्योरिटी

    भारत में जितनी तेजी के साथ मोबाइल और सिस्टम यूजर बढ़ रहे हैं, उसके अनुरूप हमारे पास उचित साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ नहीं हैं जो धोखाधड़ी वाली ईमेल और सोशल मीडिया के माध्यम से साइबर हमलों और डेटा उल्लंघन को रोक सकते हो। यही कारण है कि कंपनियां और कॉर्पोरेट अपनी रक्षा प्रणाली पर मोटा पैसा खर्च कर रहे हैं। ताकि उल्लंघनों, डेटा लीक, और अधिक दुर्भावनापूर्ण साइबर युद्ध के हमलों से बचा जा सके। 

     

    • ऐसे छात्र बेसिक सैलरी के रूप में शुरुआती दौर में 20 से 25 हजार की कमाई आसानी से हो सकती है , बाद में बोनस और हर साल के हिसाब से सैलरी में इजाफा मिलेगा ।

  • मैनेजमेंट अकाउंटिंग

    दिव्यांग ऐसे कोर्सो के माध्यम से कॉमर्स, वित्तीय सेवाओं, कंसल्टेंसी, सार्वजनिक क्षेत्र या विनिर्माण उद्योग को आसानी से समझ सकते हैं। यह व्यावसायिक गतिविधि का मूल्यांकन करता है और उन्हें हितधारकों और नियामकों का विश्लेषण करने में मदद करता है। यह आंतरिक उद्देश्य और निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी सहायक है। इसके लिए उम्मीदवार को एक स्वीकृत बोर्ड से कक्षा 10 उत्तीर्ण होना चाहिए।

  • डेटा साइंस

    जैसे-जैसे दुनिया बड़े डेटा के युग में प्रवेश कर रही है, डेटा स्टोरेज करने की आवश्यकता भी बढ़ती जा रही है । डिजिटलीकरण  के दौर में उद्योगों के लिए मुख्य चुनौती है । माना जा रहा है कि डाटा साइंस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भविष्य है। 

    • दिव्यांगों के जीवन को नई दिशा स्पेशलाइज्ड कोर्स के जरिए दी जा सकती है ये सारे कोर्स 12वीं के बाद भी किए जा सकते है ।

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