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निजी विश्वविद्यालयों को एक बार फिर से फायदा पहुंचाने की तैयारी, फिर बदलेगा एक्ट

प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों को आयोग पहले ही राहत दे चुका है।

राहुल शर्मा | Last Modified - May 01, 2018, 03:35 AM IST

  • निजी विश्वविद्यालयों को एक बार फिर से फायदा पहुंचाने की तैयारी, फिर बदलेगा एक्ट

    भोपाल.प्रदेश के दो दर्जन से अधिक निजी विश्वविद्यालयों को राहत देने के िलए सरकार िफर मेहरबान होने जा रही है। मप्र निजी विवि विनियामक आयोग विश्वविद्यालयों के िलए एक बार िफर एक्ट में बदलाव की तैयारी कर रहा है। इसके तहत विश्वविद्यालयों द्वारा आयोग में जमा की जाने वाली फीस के िलए करीब 45 दिन की मोहलत और दी जा रही है। इसी तरह दूसरी किस्त अप्रैल तक जमा की जा सकेगी।

    आयोग इसके पूर्व भी आयोग एक्ट में संशोधन कर चुका है। अब तक िनजी विश्वविद्यालयों को छात्रों के कुल एडमिशन की एक फीसदी फीस 30 दिन के भीतर आयोग में जमा करना हाेती है। आयोग के 2013 में बने एक्ट में यह प्रावधान है कि अगर तय समय में निजी विवि आयोग के पास फीस जमा नहीं करता है तो लेट फीस पर 14% का जुर्माना लगाया जाता है।

    जमीन मामले में पहले ही मिला फायदा

    प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों को आयोग पहले ही राहत दे चुका है। पहले विवि खोलने के िलए कम से कम 50 एकड़ भूमि की बाध्यता थी। बाद में आयोग ने 2013 में एक्ट में संशाेधन कर 25 एकड़ जमीन का प्रावधान कर दिया। इसके अलावा 2016 में पालन प्रतिवेदन की समय सीमा तय कर दी गई।

    संशोधन का प्रस्ताव तैयार

    िनजी विवि आयोग ने एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव तैयार कर िलया है। जिसके तहत जुलाई में जो दािखले होते हैं उन छात्रों से 30 सितंबर तक ली गई फीस िनजी विवि को अक्टूबर में जमा करना होगी। इस प्रकार निजी विश्वविद्यालयों को फीस जमा करने में करीब 45 दिन की मोहलत और मिल जाएगी। इसी तरह अक्टूबर के बाद अगर विवि में दािखले होते हैं या स्कॉलरशिप आती है तो इसकी राशि संंबंधित निजी विवि को अप्रैल में जमा करना होगी। इस तरह विश्वविद्यालयों को करीब छह महीने का समय मिल जाएगा।

    संशोधन की जरूरत इसलिए
    अधिकारियों के मुताबिक एक्ट में संशोधन की जरूरत इसलिए पड़ रही है, क्योंकि बहुत से छात्र ऐसे होते हैं, जिनकी स्कॉलरशिप का पैसा देर से आ पाता है। वे तय समय पर फीस नहीं चुका पाते। एेसी दशा में निजी विश्वविद्यालयों पर जाे जुर्माना लगता है वे उसे छात्रों से ही वसूलते हैं। ऐसे में छात्राें पर ही आर्थिक दबाव पड़ता है। इस कारण एक्ट में संशोधन की तैयारी की जा रही है।

    निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर एके पांडेय ने बताया कि कई बार छात्रों को समय से स्कॉलरशिप नहीं मिलती और वे फीस जमा नहीं कर पाते। ऐसे में एडमिशन फीस की 1% राशि विवि नहीं चुका पाते। जब उन पर जुर्माना लगता है ताे विवि इसे छात्रों से ही लेते हैं। निजी विवि ने मांग की थी कि इसमें राहत दी जाए। इस पर विचार चल रहा है।

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Web Title: Prepare To Once Again Benefit Private Universities
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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