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PTM संस्थापक ने युवाओं से कहा- अपने उद्देश्य के लिए पागल हो जाओ, रास्ता मिल ही जाएगा... गरीब कोई नहीं; जो मौका चूक गया, वो ही गरीब: विजय शेखर

3 वर्ष पहले
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भोपाल। दैनिक भास्कर समूह के संस्थापक रमेशचंद्र अग्रवाल की स्मृति में उनके 74वें जन्मदिवस पर प्रेरणा उत्सव का आयोजन किया गया। पेटीएम के फाउंडर विजय शेखर शर्मा उत्सव के पहले दिन के मेहमान बने। विजय शेखर ने रमेशजी को मेहनत और विजन का प्रतीक बताया और साथ ही अपनी कहानी भी सुनाई।


बताया कि किस तरह उन्होंने उत्तर प्रदेश के एक स्कूल में टाटपट्टी और पट्टी पर पढ़ाई शुरू की। आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली गए तो रोज के 40 रुपए बचाने के लिए करीब 10 किमी पैदल चलकर कॉलेज जाते थे। पहली नौकरी में मन नहीं लगा तो वो भी 11 महीने में ही छोड़ दी। लेकिन आज उनकी कंपनी पेटीएम एक लाख करोड़ रु. की कंपनी बन चुकी है और वारेन बफे भी उसमें इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं।
विजय ने कहा कि- 'स्कूल के दिनों में जब राष्ट्रगान सुनता था तो भारत भाग्य विधाता सुनकर आंखों में आंसू आ जाते थे। सपना था कि एक दिन देश मेरी ओर देखे और कहे कि ये लड़का भारत भाग्य विधाता है। मेरा नौकरी में मन नहीं लगता था। ये पैसे-पैसे की दौड़ से छुट्टी चाहता था। ये बात मुझे बड़ी जल्दी समझ आ गई थी कि लोग ये नहीं याद रखेंगे कि मैंने क्या कमाया, बल्कि ये याद रखेंगे कि मैंने क्या किया।'


विजय कहते हैं- 'गरीब कोई नहीं। जो मौके को स्वीकार नहीं कर पाया, भुना नहीं पाया, वो ही गरीब है।' उन्होंने 2003-04 का एक किस्सा भी सुनाया, जब बिजनेस शुरू करने के लिए 8 लाख रुपए लोन लिए थे। बिजनेस जोर नहीं पकड़ पाया। हालत ऐसी हो गई कि सारी कमाई लोन का ब्याज चुकाने में ही चली जा रही थी। घर का किराया देने तक के पैसे नहीं बच रहे थे। कंपनी के शेयर बेचकर लोन चुकाया, लेकिन यहीं से सोच लिया कि अब एक ही रास्ता है- जीत। नतीजा- अगले 3 साल में 100 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया।


विजय से उनके विजन पर भी सवाल हुआ। बोले- मेरा विजन तो शुरू से बड़ा साफ था। मैं जानता था कि मेरे पास ना तो 25 लाख रुपए हैं, जो मैं स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी जाकर पढू़ं, ना ही 3 लाख रुपए हैं जो आईआईएम जाकर पढ़ूं। इसलिए एक ही रास्ता था- कुछ ऐसा कर दूं कि स्टैनफोर्ड और आईआईएम वाले मेरी कंपनी में आकर काम करें..और ये किया भी।

खुद को हिप्पी बताने वाले विजय ने युवाओं को संदेश दिया कि- पागल हो जाओ। जो भी काम करो, उसमें इस कदर जुनून और जज्बे के साथ जुट जाओ कि लोग कहें कि यह पागल है, इसे अपने रास्ते आगे जाने दो।


विजय ने अपने लिए भी लक्ष्य तय कर लिया है- पेटीएम को फाइनेंशियल सर्विस कंपनी के तौर पर डेवलप करना। विजय ने जयशंकर प्रसाद की कविता भी सुनाई, जो स्कूल के दिनों में उन्हें प्रेरित करती थी- 'परिश्रम करता हूं अविराम, बनाता हूं क्यारी और कुंज। सींचता दृग-जल से सानन्द, खिलेगा कभी मल्लिका पुंज।'


स्कूली दिनों में जब वे बेहद गरीब थे। दसवीं कक्षा में उन्होंने एक कविता लिखी थी जो यह थी-
मैं गरीबी हूं।
मैं तुम्हे प्यार करती हूं।
मैं तुम्हें छोड़ नहीं सकती।
क्योंकि तुम मुझे उससे ज्यादा प्यार करते हो।


कार्यक्रम को मोडरेट किया सिद्धार्थ जराबी और भास्कर ग्रुप के डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल ने। संचालन शुभ और अर्जुन अग्रवाल ने किया। स्कूल के एम्फीथियेटर में अल्फाज और सुरों का जादू कार्यक्रम हुआ, जिसमें जाने-माने लेखक, गीतकार और अभिनेता पीयूष मिश्रा ने प्रस्तुति दी।

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