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सालभर से भटक रहे थे छात्र, लोकपाल ने 7 दिन में सुलझाईं समस्याएं

बरकतउल्ला विवि के ही यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (यूआईटी) से बीई कर रहा छात्र अहमद पराह अपनी...

Dainik Bhaskar

Sep 10, 2018, 03:20 AM IST
Bhopal - सालभर से भटक रहे थे छात्र, लोकपाल ने 7 दिन में सुलझाईं समस्याएं
बरकतउल्ला विवि के ही यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (यूआईटी) से बीई कर रहा छात्र अहमद पराह अपनी स्काॅलरशिप को प्राप्त करने के लिए परेशान था। इसे जम्मू-कश्मीर सरकार से मिलने वाली स्कॉलरशिप मिलती है। यह स्कॉलरशिप विवि के खाते में आती। इससे पहले ही यूआईटी के संचालक ने इसे अपने संस्थान की फीस जमा करा ली और आश्वासन दिया कि स्कॉलरशिप की राशि विश्वविद्यालय को मिलने पर उसे वापस कर दी जाएगी। लेकिन एेसा नहीं हुआ। दो महीने तक वह परेशान घूमता रहा। जब इस छात्र ने लोकपाल से शिकायत की तो उसे यह राशि अगले सात दिन में ही मिल गई। खास बात यह है कि छात्र ने अपने आवेदन में करीब 46,165 रुपए का जिक्र किया था। लेकिन, लोकपाल और रिटायर्ड डिस्ट्रिक जज शिशिरकांत चौबे के स्तर पर की गई जांच के बाद यह राशि 50 हजार निकली। यह पूरी राशि छात्र को दिलाई गई।

बीयू ऐसे ही स्कॉलरशिप, माइग्रेशन, डिग्री और एडमिशन संबंधी ममामले लाेकपाल के सामने आए, जिनके लिए छात्र सालभर से भटक रहे थे, उनका 7 दिन के भीतर निराकरण किया गया।

बरकतउल्ला विवि

रोजाना लग रही कोर्ट, विश्वविद्यालय में हर कर्मचारी और अधिकारी की जिम्मेदारी तय की, ताकि छात्रों की समस्याएं जल्दी सुलझें

छात्राओं को मिला हॉस्टल, माइग्रेशन भी तुरंत मिल गया

लॉ डिपार्टमेंट में छात्र रमन साहू ने एलएलएम कोर्स में एडमिशन के लिए आवेदन किया था। इसका पहली मेरिट लिस्ट में नाम आने के बाद भी तय समय सीमा में फीस जमा नहीं की गई। इसमें छात्र की कोई गलती नहीं थी। दूसरी मेरिट लिस्ट से इसका नाम हटा दिया गया। लोकपाल स्तर पर हुई जांच के बाद इसे एडमिशन दिया गया।

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तीन माह में 40 प्रकरणों में 300 से अधिक छात्रों को मिला लाभ...

रिटायर्ड डिस्ट्रिक जज शिशिरकांत चौबे कोर्ट की तर्ज पर कार्रवाई कर रहे हैं। जिसमें छात्र की शिकायत होने पर एक निर्धारित तारीख में सुनवाई की जाती है। इसमें छात्र के साथ अधिकारियों काे भी बुलाकर समस्या का हल कराया जा रहा है। इसके कारण एक छोटे से कर्मचारी से लेकर रजिस्ट्रार व कुलपति भी अपनी भूमिका से नहीं बच पा रहे हैं। तीन माह में पहुंची शिकायतों के आधार पर 89 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इसमें 40 प्रकरणों में 300 से अधिक छात्रों की समस्या हल की जा चुकी है।

आदिवासी वर्ग की चार छात्राओं ने बीयू के शैक्षणिक डिपार्टमेंट में एडमिशन लिया है। लेकिन, विवि की वार्डन ने इन्हें हॉस्टल में एडमिशन देने से इंकार कर दिया। इन छात्राअों ने लोकपाल से शिकायत की तो इन्हें हाॅस्टल देने के लिए विवि तैयार हुआ।

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छात्रा दीक्षा भाटी को इंदौर के बीएड कॉलेज में एडमिशन लेना था। आवेदन करने पर माइग्रेशन नहीं दिया जा रहा था। दीक्षा ने इसकी शिकायत लोकपाल से की तो विवि माइग्रेशन तुरंत देने को तैयार हो गया। अन्य छात्रों को डिग्री, व पीएचडी सर्टिफिकेट भी दिलाए गए।

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जल्द शुरू की जाएगी ऑनलाइन व्यवस्था


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