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प्रॉप्स, पॉपकॉर्न और एक अकेले बालेंद्र

Bhopal News - शहीद भवन में हम थिएटर ग्रुप के दो दिवसीय नाट्य समारोह के अंतिम दिन मंगलवार को नाटक पॉपकॉर्न का मंचन किया गया। इसका...

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2018, 02:11 AM IST
Bhopal - प्रॉप्स, पॉपकॉर्न और एक अकेले बालेंद्र
शहीद भवन में हम थिएटर ग्रुप के दो दिवसीय नाट्य समारोह के अंतिम दिन मंगलवार को नाटक पॉपकॉर्न का मंचन किया गया। इसका निर्देशन आशीष पाठक ने किया। नाटक दिखाता है कि देश में फैली बेरोजगारी और एक अच्छी अर्थव्यवस्था के लिए सभी चिंतन करते हैं, लेकिन अच्छा इंसान बनाने के लिए कोई चिंतन नहीं करता। समाज में ऐसी मशीन ईजाद होनी चाहिए, जिससे अच्छा इंसान पैदा किया जा सके। युवा रंगकर्मी बालेंद्र सिंह बालू के एकल अभिनय से सजे इस डेढ़ घंटे के नाटक में समाज की वास्तविकता देखने को मिली।

सेना के जवानों को देख रूपक उन्हें पॉपकॉर्न खिलाने जाता है

नाटक का प्रमुख पात्र एक पढ़ा-लिखा युवक रूपक है, जो नौकरी पाने के लिए कई प्रयास कर चुका है। भ्रष्टाचार के चलते जब उसे हर ओर से निराशा ही हाथ लगती है, तो एक दिन उसे उसके गुरु जी मिलते हैं। वह उसे समझाते हैं कि वह सेना में भर्ती होने की बजाए पॉपकॉर्न बेचे। गुरु की बात मानकर वह रेलवे स्टेशन पर पॉपकॉर्न बेचना शुरू कर देता है। वह ट्रेन में सेना के जवानों को पॉपकॉर्न खिलाने जाता है पर जवान उसे पीट देते हैं। वे एक महिला और बच्ची से भी दुर्व्यवहार करते हैं। इस घटना से रूपक दुखी हो जाता है और सेना में जाने का ख्याल छोड़ देता है। नाटक के अंत में वह इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि अगर शासक की इच्छाशक्ति दृढ़ नहीं होगी तो अच्छी से अच्छी अर्थव्यवस्था सही नही होगी और धीरे-धीरे ढेर हो जाएगी।

शहीद भवन में मंचित नाटक पॉपकॉर्न एक ऐसे युवा की कहानी है, जो सैनिक बनना चाहता है

देश के विकास के लिए चिंतकों की आवश्यकता लोन से भी अधिक है

अच्छा आदमी बनने के लिए कोई चिंतन नहीं करता और अच्छा इंसान बनाने की मशीन कोई नहीं बनाता।

नाटक

में कटाक्ष

प्लाई से बनाई ट्रेन की बोगी

रेलवे प्लेटफॉर्म। पीछे ट्रेन खड़ी है, कहीं रेलवे का यार्ड, कहीं सिग्नल टाॅवर। रेलवे स्टेशन की तरह हालिया रिलीज फिल्मों के पोस्टर भी चिपके हैं। इसके बीच पॉपकॉर्न का झोला लेकर मंच पर उतरे एक्टर-डायरेक्टर बालेंद्र सिंह। इस प्ले में वह अकेले एक्टर थे।

मंच सज्जा भी उतनी ही प्रभावकारी

मंच पर स्टेशन का दृश्य व इसका संयोजन काफी प्रभावकारी और खास था। इसमें लाइट, बिजली के खंभे, बैंच, रेलिंग, फिल्म के पोस्टर, प्लाई की बनी बोगी और पॉपकॉर्न आदि का प्रयोग किया गया। यह मंच देखने में स्टेशन की तरह दिखाई दे रहा था। नाटक की वेशभूषा अशमी सिंह, संगीत अमित विश्वकर्मा, मंच निर्माण आदित्य तिवारी का रहा।

फोटो : अनिल दीक्षित

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