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राघौगढ़ के इंजीनियर ने नौकरी छोड़ी, मुनि दीक्षा ली

3 वर्ष पहले
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राघौगढ़ (गुना) | इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर की नौकरी छोड़कर राघौगढ़ के अर्पित जैन ने मुनि दीक्षा ली। अब उनका नाम मुनिश्री निर्लेप सागर होगा। उन्हें आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने ललितपुर में पंचकल्याणक महोत्सव के दौरान जैनेश्वरी दीक्षा दी है। राघौगढ़ निवासी अनिल जैन-मीना जैन के घर जन्में अर्पित ने जेपी इंजीनियरिंग कॉलेज से कम्प्यूटर साइंस से बीटेक और एमटेक किया है।





इसके बाद भोपाल और इंदौर में बतौर इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर रहते हुए जॉब की। उनके परिजनों के अनुसार पूर्व में उनका धर्म के प्रति कोई खास लगाव न था। 2016 में जब आचार्यश्री विद्यासागर महाराज का भोपाल में चातुर्मास चल रहा था, तभी अर्पित के एक मित्र ने उन्हें आचार्य के दर्शन कराए। आचार्यश्री के दर्शन करते ही अर्पित के मन में आध्यात्म का बीज अंकुरित हो गया। इसी दौरान उनका ट्रांसफर इंदौर हो गया। यहां उन्हें मुनिश्री समय सागर महाराज का ससंघ सानिध्य मिला तो यह आध्यात्म का बीज और फल-फूलने लगा। आध्यात्म के मार्ग पर आगे बढ़ते हुए अर्पित ने वर्ष 2017 में रामटेक महाराष्ट्र में चातुर्मास आचार्य से आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया। व्यवसाय करने वाले उनके पिता अनिल जैन-मीना जैन रावत के वे एकमात्र पुत्र हैं, उनकी एक बहन की शादी गुना में हुई है। वे राघौगढ़ के पूर्व नपा अध्यक्ष डॉ. अजित रावत एवं जैन समाज राघौगढ़ के अध्यक्ष अजय रावत के भतीजे हैं।

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