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निमाड़ी, मालवी, बघेली और बुंदेली में गाए वर्षा गीत

बादल राग-16 में सोमवार को चार क्षेत्रीय बोलियों में वर्षा ऋतु के गीतों की प्रस्तुति दी गई। भारत भवन में हुईं इन...

Danik Bhaskar | Sep 11, 2018, 02:12 AM IST
बादल राग-16 में सोमवार को चार क्षेत्रीय बोलियों में वर्षा ऋतु के गीतों की प्रस्तुति दी गई। भारत भवन में हुईं इन अलग-अलग बोलियों में गीतों की प्रस्तुतियों से श्रोता मुग्ध हो गए। इस आयोजन में निमाड़ी, मालवी, बघेली और बुंदेली वर्षागीतों पर आधारित लोकगीतों की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में खंडवा की संगीता पाराशर ने निमाड़ी बोली में वर्षा गीतों की प्रस्तुति दी। उन्होंने पहली प्रस्तुति गणेश वंदना हमारे अंगणा में आज पधारो गणपतिजी... से की। इसके बाद पाणीं की पयली फुहारजी, भींज हारी रेशम की साड़ी... गाया। प्रस्तुति की अगली कड़ी में चौमासा गीत मारुजी पांच अरज हारी आज सूणों नणदो रा वीराजी... को पेश किया।

भारत भवन में बादल राग-16 के तहत प्रदेश की चार अलग-अलग बोलियों में गायक-गायिकाओं ने वर्षा गीतों से समां बांधा

Singing Performance

आयो-आयो छे वावणी को दिन रे खेत...

संगीता पाराशर ने निमाड़ी बोली में फसल बोने के उल्लास में बोनी गीत आयो-आयो छे वावणी को दिन रे खेत मड वतर घणों... को सुनाया। इसके बाद उन्होंने रक्षा बंधन पर गाए जाने वाले गीत,राधा-कृष्ण की भक्ति पर आधारित झूला गीत से अपनी प्रस्तुति का समापन किया। इस प्रस्तुति में सुषमा साध, सौम्या मांगरोले, कृति साध ने संगत दी।

धानि-धानि रे कदम तोरी डाली....

रीवा की शिवानी पांडे ने बघेली वर्षा पर आधारित लोकगीत पेश किए। जिसमें उनके समूह ने हिंदुली गीत चारिनि खूटे के बनी रे... कजरी गीत हरे-हरे दशरथ राज दुलारे... सुनाया। इसके बाद दादरा में लाल आंखिन मा छिउला के पानी...गाया। प्रस्तुति में यतिंद्र शुक्ला, ढोलक पर सचिन विश्वकर्मा और मंजीरे पर मार्तण्ड तिवारी ने संगत दी।

मेवाजी आपे बरसो ने...

उज्जैन की तृप्ति नागर ने मालवी बोली में वर्षा गीतों, जिसमें उन्होंने चौमासा गीत मेवाजी आपे बरसो ने... को सुनाया। इसके बाद राखी गीत राखी दीवासों आवियो वीरो... का गायन किया। कार्यक्रम में उन्होंने झूला गीत, विरह गीत, सावन गीत और बदरा गीत, हिंडोला जैसे गीतों की प्रस्तुति दी।

झूला झूलन जाऊंगी...

फूल सिंह माण्डरे ने बुंदेली वर्षा गीतों वाह तकत गई रैन सजना ने... की प्रस्तुति दी। उन्होंने जन्मे आधी रात मोहन..., आज तो सजना मोरे घर रहो..., झूला झूलन जाऊंगी माई मोरी... जैसे भजनों और लोकगीतों की प्रस्तुति दी। ढोलक पर शब्बीर खान, तबला पर संजीव नागर ने संगत दी।