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भोपाल / काश… आज मेरे पिता जिंदा होते, तो वे बेहद खुश होते



Renu Sharma, the first woman lawyer in Jammu and Kashmir who was given the 1972 Charan in Srinagar
Renu Sharma, the first woman lawyer in Jammu and Kashmir who was given the 1972 Charan in Srinagar
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Renu Sharma, the first woman lawyer in Jammu and Kashmir who was given the 1972 Charan in Srinagar
Renu Sharma, the first woman lawyer in Jammu and Kashmir who was given the 1972 Charan in Srinagar
Renu Sharma, the first woman lawyer in Jammu and Kashmir who was given the 1972 Charan in Srinagar

  • जम्मू-कश्मीर में पहली महिला वकील थी रेणु शर्मा, जिन्हें श्रीनगर में 1972 सनद दी गई थी

Dainik Bhaskar

Aug 06, 2019, 12:25 PM IST

कीर्ति गुप्ता, भोपाल. काश……. आज मेरे पिता जिंदा होते तो वो बहुत खुश होते। क्योंकि उनकी तीन बेटियां जम्मू कश्मीर की नागरिकता का लाभ नहीं उठा पाई और वे जीते जी अपनी संपत्तियां भी अपने बच्चों को नहीं दे पाए। ये बात भोपाल की रिटायर्ड जिला एवं सत्र न्यायाधीश और कश्मीरी पंडित रेणु शर्मा ने भास्कर से बातचीत में कही। 

 

महाराजा गुलाबसिंह के जमाने में श्रीनगर में मेरे दादा जी खंचाजी हुआ करते थे। मेरे पिता श्रीनगर के नामी व्यवसायी थे और मां घरेलू महिला थी। हम लोग तीन बहने और एक भाई थे। हम सब स्कूलिंग और कालेज की पढ़ाई श्रीनगर में हुई। वर्तमान में हमारी पैतृक संपत्ति जम्मू में है। श्रीनगर की संपत्ति मेरी मां ने 1979 में बेच दी थी। 

 

जिस समय मैं श्रीनगर के वूमन कॉलेज में स्टूडेंट काउंसिल की अध्यक्ष थी उस समय कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, अमर सिंह कालेज में छात्र संघ अध्यक्ष थे। मैं जम्मू एंड कश्मीर में पहली महिला वकील थी जिसे श्रीनगर में 1972 में सनद दी गई थी। इसके बाद मेरी 1974 में मध्यप्रदेश के आईपीएस अधिकारी प्रमोद शर्मा से हो गई। मुझे कश्मीर की नागरिकता का जो प्रमाण पत्र मिला उस पर लिखा हुआ था कि यह शादी तक ही मान्य रहेगा। 

 

जे एंड के में शादी नहीं की तो सारे अधिकार खत्म 

अगर मैं जम्मू कश्मीर के किसी नागरिक से शादी करती तो मेरे सभी अधिकार सुरक्षित रहते। तीनों बहनों में सबसे बड़ी मैं थी। मेरी एक बहन की शादी दिल्ली के कर्नल से हुई। जो जम्मू कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल के एडीसी थे। रिटायरमेंट के बाद वह परिवार सहित दिल्ली शिफ्ट हो गए। जबकि सबसे छोटी बहन की शादी पटना के एक प्रसिद्ध आर्किटेक्ट से हुई। बहन ने आर्कीटेक्चर इंजीनियरिंग की पढ़ाई श्रीनगर से की थी। वर्तमान में बहन बोस्टन में कैंब्रिज फाउंडेशन में प्रेसीडेंट हैं। परिवार में सबसे छोटा भाई था। उसकी जम्मू में जेके ट्रांसफार्मर्स नाम से फैक्टरी थी। वर्ष 2002 में भाई का निधन हो गया। अब जम्मू में भाभी और भतीजे रहते हैं। मैंने जे एंड के नागरिक से शादी नहीं की, इसलिए हमारे सारे अधिकार खत्म हो गये। हमारा दर्द यह है कि वहां के होते हुए भी हमें अपने अधिकारों से वंचित होना पड़ा। 

 

धारा-370 खत्म होने से उम्मीद 

 

धारा 370 खत्म होने के बाद अब यह उम्मीद जागी है कि हम जहां हमने अपना बचपन गुजारा और अपनी स्कूल कालेज की पढ़ाई की वहां अब हम संपत्ति खरीद सकते है। नए कानून के बाद पैतृक संपत्ति अब मेरे और मेरे बच्चे को नाम से हो सकती है और हम मालिक होकर उसका उपयोग कर सकते है। 

 

 रेणु शर्मा, रिटायर्ड जिला एवं सत्र न्यायाधीश

 

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