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जंगल की बीमार बाघिन को रेस्क्यू किया, 18 दिन तक किया इलाज और अब फिर जंगल में छोड़ दिया

8 महीने पहले
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बाघिन काे चूरना रेंज के लिए विदा करते वन विहार के अधिकारी-कर्मचारी।
  • वाइल्ड लाइफ मुख्यालय ने निर्देश पर पहली बार किसी बाघिन का इलाज कैद में रखकर किया गया
  • प्रयाेग के सफल हाेने के बाद अब वन विहार के अस्पताल में पूरे प्रदेश के जंगल के घायल वन्य प्राणियाें का इलाज हाे सकेगा।
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भाेपाल. चूरना से इलाज के लिए वन विहार नेशनल पार्क लाई गई बाघिन पूरी तरह स्वस्थ हाे गई है। गुरुवार काे उसे सतपुड़ा नेशनल पार्क के चूरना इलाके में छाेड़ दिया गया। वाइल्ड लाइफ मुख्यालय ने निर्देश पर पहली बार किसी बाघिन का इलाज कैद में रखकर किया गया। पूरी तरह से स्वस्थ्य हाेने पर उसे फिर से जंगल छाेड़ा गया। 

इस प्रयाेग के सफल हाेने के बाद अब वन विहार के अस्पताल में पूरे प्रदेश के जंगल के घायल वन्य प्राणियाें का इलाज हाे सकेगा। उसके बाद उन्हें वापस उनके ही इलाके के जंगल में छाेड़ा जाएगा। वन विहार के वन्य प्राणी अस्पताल देश का पहला अस्पताल हाेगा जहां पर प्रदेश भर के घायल वन्य प्राणियाें काे इलाज के लिए यहां लाया जाएगा। 

हाे गया था हाइपोग्लाइसीमिया
वन्य प्राणी चिकित्सक अतुल गुप्ता ने बताया कि वन विहार लाए जाने के बाद ब्लड सेंपल की रिपाेर्ट में पता चला कि बाघिन काे हाइपोग्लाइसीमिया का अटैक अाया था। जिस वजह से वह उठ नहीं पा रही थी। उसके शरीर में ग्लूकाेज का स्तर बहुत कम हाे गया था। इसके चलते वह न ताे दहाड़ पा रही थी अाैर ही उठ पा रही थी। यदि समय पर इलाज नहीं मिलता ताे बाघिन की स्ट्राेक से माैत तक हाे सकती थी। स्थिति देखने के बाद पता चला कि उसका स्टमक पूरी तरह से खाली थी। उसने 20- 25 दिनाें से कुछ नहीं खाया था। 

सिर्फ 18 माह की है बाघिन
वन विहार की डायरेक्टर कमलिका माेहंता ने बताया कि बाघिन की उम्र तकरीबन 18 माह के अास पास है। वह मां से अलग हुई हाेगी और स्वयं शिकार की तलाश कर रही थी लेकिन शिकार नहीं मिल पाने क वजह से गांव के नजदीक पहुंच गई। ग्रामीणाें की उपस्थिति की वजह से वह मवेशी का शिकार नहीं कर पाई। इसी दाैरान बाघिन काे रेस्क्यू किया।

पहला प्रयाेग रहा था असफल 
वन विहार वन्य प्राणी अस्पताल में बांधवगढ़ पार्क से एक बाघिन लाई गई थी। जिसका गला पूरी तरह से कटा था। बाघिन के 18 से अधिक अाॅपरेशन किए गए। बाघिन स्वस्थ हाे गई थी। गला भी पूरी तरह से जुड़ गया था, लेकिन रीनल संक्रमण हाे गया था जिसकी वजह से उसकी माैत हाे गई थी।

बढ़ाएगी बाघाें का कुनबा 
बाघाें की हुई गणना के बाद मप्र काे टाइगर स्टेट का दर्जा मिल गया है। इनकी संख्या 308 से बढ़कर 526 हाे गई है। वहीं प्रदेश में सबसे ज्यादा बाघ कान्हा नेशनल पार्क में है।

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