मध्यप्रदेश / रज़ा की पेंटिंग से प्रेरित लता मुंशी ने कोरियोग्राफ किया भरतनाट्यम

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2019, 04:02 PM IST



भोपाल में शास्त्रीय नृत्यांगना लता मुंशी ने पंचतत्व पर आधारित आरंभ की प्रस्तुति दी। भोपाल में शास्त्रीय नृत्यांगना लता मुंशी ने पंचतत्व पर आधारित आरंभ की प्रस्तुति दी।
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भोपाल में शास्त्रीय नृत्यांगना लता मुंशी ने पंचतत्व पर आधारित आरंभ की प्रस्तुति दी।भोपाल में शास्त्रीय नृत्यांगना लता मुंशी ने पंचतत्व पर आधारित आरंभ की प्रस्तुति दी।
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  • भरतनाट्यम को पहली बार किसी ने पेंटिंग के आधार पर पेश किया
  • पंचतत्व पर आधारित है सैयद हैदर रज़ा की पेंटिंग आरम्भ
  • दिल्ली-देहरादून में उनकी बेटी आरोही ने दी आरंभ पर प्रस्तुति 

भोपाल. अक्सर देखने में आता है कि भरतनाट्यम में ज्यादातर कलाकार राधा-कृष्ण प्रेम, विरह-वेदना, करुण रस, शिवस्ताेत्र, दुर्गाअष्टकम आदि पर ही प्रस्तुति देते हैं। इस परंपरा को बदलने की पहल की है वरिष्ठ भरतनाट्मय नृत्यांगना पद्मश्री डॉ. लता सिंह मुंशी ने और इसके पीछे प्रेरणा बनी है ख्यात चित्रकार सैयद हैदर रज़ा की पेंटिंग- आरम्भ।

 

यह पेंटिंग पंचतत्व पर है और उसी के आधार पर लता मुंशी ने कोरियोग्राफ किया है, भरतनाट्यम, जिसमें धरती, आकाश, जल, वायु और अग्नि की मुद्राओं को दिखाया गया है। इस पर उनकी बेटी आरोही मुंशी ने दिल्ली और देहरादून में प्रस्तुति दी है। लता कहती हैं- भोपाल के कलाप्रेमियों को इसी वर्ष यह प्रस्तुति देखने को मिलेगी। 

 

तीन महीने लगे इस प्रयोग में 
डॉ. लता ने बताया कि किसी भी साहित्य के स्ताेत्र काे लेकर नृत्य में प्रयोग करना एक सामान्य प्रक्रिया है। इसमें आप शब्दों के माध्यम से भाव और मुद्राएं दिखा सकते हैं, लेकिन पेंटिंग में न तो भाव होते हैं और न ही कोई शब्द। ऐसे में मुद्राओं के जरिए आप जो मंच पर दिखाते हैं, वहीं आपकी कल्पनाशीलता काे दिखाती है। मुझे इस नृत्य को तैयार करने में लगभग तीन महीने का समय लगा है। 

 

कुमार गंधर्व के संगीत पर प्रस्तुति 
लता कहती हैं कि अक्सर भरतनाट्यम के लिए कलाकार लाइव म्यूजिक का प्रयोग करते हैं। इसमें कलाकार परंपरागत ढंग से उपयोग किए जाने वाले संगीत के साथ ही नृत्य प्रस्तुति देते हैं। मैंने इस प्रस्तुति में कुमार गंधर्व का म्यूजिक बैकग्राउंड में रखा है। 

 

दिल्ली में देखी थी रज़ा साहब की पेंटिंग 
डॉ. लता ने बताया- मैंने रज़ा की यह पेंटिंग दिल्ली में आयोजित एक प्रदर्शनी में देखी थी। इस पेंटिंग को देखकर मैंने तुरंत इसका एक फोटो क्लिक किया और इस पेंटिंग पर केंद्रित कोरियोग्राफी शुरू की। रज़ा साहब की पेंटिंग में बिंदु, त्रिकोण और चौकोर आकार देखने को मिलते हैं, ऐसे में पूरी प्रस्तुति को तैयार करना अपने आप में अलग अनुभव रहा।

 

पिछले कुछ सालों से भरतनाट्यम में हो रहे पारंपरिक प्रयोगों के बाद दर्शकों की नए प्रयोगों की मांग थी। इसी दौरान जब इस पेंटिंग पर नजर पड़ी तो मैंने सोचा कि नृत्य में क्यों न एक ऐसे फॉर्म का चयन किया जाए जो बिल्कुल अलग हो। इसलिए मैंने इसे चुना। 

 

नृत्य में दिखाया पचंतत्व 
पेंटिंग में रज़ा साहब ने जल, अग्नि, हवा, भूमि, आकाश काे बिंदुओं, त्रिकोण, चौकोर जैसे आकारों के माध्यम से दिखाने का प्रयास किया है, वैसे ही डाॅ. लता सिंह मुंशी ने उन्हीं बिंदुओं को नृत्य में समाहित किया है।

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