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सिंधिया ने कांग्रेस छाेड़ भाजपा का दामन थामा ताे अशोकनगर में कांग्रेस में इस्तीफाें की झड़ी, जिले में पदमुक्त हुई कांग्रेस

एक वर्ष पहले
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अशोकनगर में विधायक जजपाल सिंह जज्जी के कार्यालय पर कांग्रेस के झंडे तो उतार लिए गए हैं लेकिन अभी बोर्ड पर निशान नहीं बदला है। - Dainik Bhaskar
अशोकनगर में विधायक जजपाल सिंह जज्जी के कार्यालय पर कांग्रेस के झंडे तो उतार लिए गए हैं लेकिन अभी बोर्ड पर निशान नहीं बदला है।
  • जिलाध्यक्ष, प्रदेश महासचिव, ब्लॉक, मंडल अध्यक्ष समेत सभी पदाधकारियों ने दिया कांग्रेस से इस्तीफा दिया
  • अशोकनगर, मुंगावली विधायक ने छोड़ा हाथ का साथ, चंदेरी विधायक ने नहीं छोड़ी कांग्रेस
  • विधायक जजपाल सिंह जज्जी के कार्यालय पर कांग्रेस के झंडे तो उतारे लेकिन बोर्ड पर हाथ का निशान नहीं बदला

अशोकनगर. सिंधिया के इस्तीफे से अशोकनगर जिले में राजनैतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। जिले की तीन विधानसभा में से दो कांग्रेस मुक्त हो गईं है। अशोकनगर जिला कांग्रेस यानी सिंधिया का गढ़ माना जाता रहा है। इस लोकसभा चुनाव को छोड़ दें तो सिंधिया की जो जीत होती थी वह अशोकनगर जिले से ही होती थी। सिंधिया के इस्तीफा देने से अब सिंधिया का गढ़ मजूबूत हो गया है। यहां कांग्रेस खत्म हो गई है अब भाजपा में विरोध खत्म हो गया है। लेकिन लोकसभा में जिन सिंधिया को हराने वाले भाजपा सांसद डॉ. केपी सिंह यादव का सुबह से मोबाइल फोन बंद जा रहा है। उनको चिंता सता रही है कि अगर फिर सिंधिया इधर की तरफ रुख करते हैं तो उनका क्या होगा। 


प्रदेश की राजनीति में हुई उठापटक का सबसे अधिक असर अशोकनगर में पड़ा है। दो विधायकों के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सहित बड़े नेताओं ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के पक्ष में इस्तीफा दे दिए। ऐसे में अगर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिरती है तो फिर एक बार तस्वीर 2008 की तरह बदल जाएगी। तब जिले में पहली बार भाजपा के तीन विधायक थे लेकिन सांसद कांग्रेस के थे। अब सांसद के साथ दो विधायक भाजपा के हो जाएंगे। वहीं, इस विधानसभा चुनाव में तीनों सीटें जीतने के बाद कांग्रेसमय हुआ जिला फिर भाजपामय हो जाएगा। अब जो स्थिति बन रही है वह ये है कि कांग्रेस अशोकनगर में पद मुक्त हो गई है। 

जिला अध्यक्ष समेत 100 से ज्यादा इस्तीफे
ज्योतिरादित्य सिंधिया और 22 विधायकों के इस्तीफा देने के बाद जिले में करीब 100 से अधिक बड़े पदों पर बैठे कांग्रेसी इस्तीफा दे चुके हैं। इनमें जिलाध्यक्ष कन्हैयाराम लोधी, महासचिव नारायण प्रसाद शर्मा प्रदेश, प्रदेश महासचिव धर्मेन्द्र चौधरी, ब्लॉक अध्यक्ष अशोकनगर मनोज शर्मा, चंदेरी ब्लॉक अध्यक्ष महेन्द्र सिंह बुंदेला, पूर्व विधायक गजराम सिंह यादव, अशोक कुशवाह ब्लॉक अध्यक्ष राजपुर और राजकुमार नगेश्री आदि ने इस्तीफा दे दिया है। 

इन तीन कारणों से समझिए बदलाव का असर...

टकराव... कांग्रेसियाें के पार्टी में आने का फिलहाल ताे भाजपाई समर्थन कर रहे हैं लेकिन स्वीकार्यता को लेकर टकराव हो सकता है। क्योंकि पहले भी कुछ नेता आए लेकिन बाद वापसी हो गई।

चुनाैती...इस बदलाव के बाद नगरीय निकाय और पंचायत के चुनावों का सामना करना होगा। इन चुनावों के नतीजों से स्पष्ट होगा कि यह बदलाव सही रहा या गलत।

चिंता...भाजपाइयों को चिंता है कि कांग्रेसियों के कारण आने वाले चुनावों में टिकट कटने का खतरा रहेगा। क्योंकि अभी वे उनके सामने खड़े होते थे लेकिन अब वे उनके साथ होंगे।

इनसाइड स्टोरी: अशोकनगर में सिंधिया मतलब कांग्रेस
भाजपा जिलाध्यक्ष बोले, सबका स्वागत है: सिंधिया के बाद जिले में कांग्रेस पदाधिकारियों के इस्तीफों पर भाजपा जिलाध्यक्ष उमेश रघुवंशी कहना है कि भाजपा विचारधारा को लेकर काम करने वाला संगठन है। जो भी भाजपा की विचारधारा को मानकर पार्टी ज्वाइन करेगा उनका स्वागत है। कांग्रेस मुक्त भारत का सपना पीएम नरेन्द्र मोदी जी ने देखा था वह पूरा होने को तत्पर है। अभी कांग्रेस पार्टी से इस्तीफे हुए हैं सदस्यता फिलहाल किसी ने नहीं ली है।

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