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गुना / हाईकोर्ट के निर्देश पर सरकारी वकील ने एसपी को कॉल कर साक्षी मेडिकल कॉलेज को सील कराया

Dainik Bhaskar

Jan 11, 2019, 12:35 PM IST


हाईकोर्ट ने आदेश के बाद कहा- कॉपी का इंतजार न करें, पहले फौरन कार्रवाई करें। हाईकोर्ट ने आदेश के बाद कहा- कॉपी का इंतजार न करें, पहले फौरन कार्रवाई करें।
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हाईकोर्ट ने आदेश के बाद कहा- कॉपी का इंतजार न करें, पहले फौरन कार्रवाई करें।हाईकोर्ट ने आदेश के बाद कहा- कॉपी का इंतजार न करें, पहले फौरन कार्रवाई करें।

  • हाईकोर्ट के जस्टिस ने आदेश में कहा- कॉपी का इंतजार न करें पहले कार्रवाई करो 
  • विद्यार्थियों की याचिका पर सुनवाई के दौरान जबलपुर हाईकोर्ट ने 6 सदस्यीय टीम गठित की
  • 23 जनवरी तक कॉलेज की स्थिति पर रिपोर्ट तलब, कॉलेज भवन, हॉस्टल, अस्पताल को किया सील

गुना. साक्षी मेडिकल कॉलेज और उसमें पढ़ने वाले छात्रों के बीच चल रही अदालती जंग में गुरुवार को नाटकीय मोड़ आ गया। मामले की सुनवाई के दौरान जबलपुर हाईकोर्ट ने कॉलेज को तुरंत सील करने के आदेश दे दिए। न्यायधीश ने सरकारी वकील से कहा कि वह गुना एसपी को फोन पर निर्देश दें कि वह फैसले की कॉपी का इंतजार किए बिना 12.30 बजे तक आदेश पर अमल करें। 

 

इसके बाद म्याना स्थित कॉलेज, अस्पताल और हॉस्टल पर ताला लगा दिया गया। वहीं गुना के तेलघानी चौराहा स्थित कॉलेज के दफ्तर को सिटी कोतवाली पुलिस की टीम ने सील किया। उधर कॉलेज के प्रबंधन से जुड़े अमित राठौर ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी देने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश पर कार्रवाई हो रही है। इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकते हैं। 

 

6 माह से विवाद ज्यादा बढ़ा

  • पिछले 6 माह से छात्रों और प्रबंधन के बीच विवाद ज्यादा गहराने लगा। इस दौरान दो बार छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। एक बार कॉलेज का निरीक्षण भी किया गया। छात्रों का आरोप है कि कॉलेज में पढ़ाई हो ही नहीं है। अस्पताल में कोई मरीज नहीं आता है। उनके दो साल पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं। जब निरीक्षण के लिए कोई टीम आती है तो अस्पताल में फर्जी मरीज भर्ती कर दिए जाते हैं। 

 

हाईकोर्ट ने 6 सदस्यीय कमेटी से इन बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी 

  • कॉलेज में फेकल्टी की क्या स्थिति है। उनकी संख्या प्रबंधन द्वारा शपथ पत्र में उल्लेखित संख्या जितनी है या नहीं। पिछले 40 दिन के दौरान कॉलेज में कितनी क्लासेस व प्रैक्टिकल हुए और उनमें कितने छात्र उपस्थित हुए। यह क्लासेस और प्रैक्टिकल किसने लिए इसकी जानकारी भी दी जाएगी। 

पहले बैच के बाद फिर कोई एडमिशन ही नहीं हुआ 

  • इस कॉलेज में 129 छात्र अध्ययनरत हैं। वे 2016 के पहले बैच का हिस्सा हैं और उसके बाद से अब तक कॉलेज में नया एडमिशन नहीं हुआ। बताया जाता है कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने तय शर्तों का पालन न करने की वजह से नए एडमिशन पर रोक लगा दी थी। इसके बाद से ही छात्रों और प्रबंधन के बीच खींचतान भी शुरू हो गई। 

यह मुद्दे उठाए थे कॉलेज के 129 विद्यार्थियों ने याचिका में 

  • विद्यार्थियों ने जो याचिका दाखिल की थी, उसमें कहा गया था कि कॉलेज में फैकल्टी नहीं है। न ही इससे जुड़े अस्पताल में कभी कोई मरीज आते हैं। कॉलेज की मान्यता खत्म की जा चुकी है। इसमें 2016 के बाद से कोई भी नया बैच भी नहीं आया। लैब आदि की सुविधाएं भी नहीं हैं। जबकि कॉलेज प्रबंधन का दावा है कि उनके यहां 35 फैकल्टी मौजूद हैं। 

आज 6 सदस्यीय टीम कॉलेज का निरीक्षण : जस्टिस आरएस झा और जस्टिस संजय द्विवेदी की खंडपीठ ने कॉलेज की जांच के लिए जो टीम बनाई है, उसमें कलेक्टर, एसपी, जिला न्यायाधीश (या उनके द्वारा नामांकित न्यायिक अधिकारी), गजराराजा मेडिकल कॉलेज के डीन, मेडिकल एजुकेशन विभाग के संचालक (या नामांकित अधिकारी) और मेडिकल यूनिवर्सिटी जबलपुर के एक विशेषज्ञ शामिल रहेंगे। टीम शुक्रवार को निरीक्षण करेगी। 

 

अदालत के आदेश पर कार्रवाई 

अदालत से आदेश मिलते थे, इसके बाद तुरंत कार्रवाई की गई। कॉलेज भवन व उससे जुड़े सभी प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया है। जब तक निरीक्षण नहीं हो जाता तक कॉलेज पर पुलिस की निगरानी रहेगी।

निमिष अग्रवाल, एसपी
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