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एम्स के हालात ठीक नहीं, स्थाई डायरेक्टर न होने से अकादमिक से लेकर प्रशासनिक कार्य ठप

एम्स प्रबंधन ने कुछ छात्रों के सोशल मीडिया आंदोलन चलाने की जानकारी मिलने पर सोशल मीडिया यूज करने पर बैन लगाया दिया।

Bhaskar News | Last Modified - May 03, 2018, 01:09 AM IST

  • एम्स के हालात ठीक नहीं, स्थाई डायरेक्टर न होने से अकादमिक से लेकर प्रशासनिक कार्य ठप

    भोपाल.एम्स में स्थाई डायरेक्टर, एकेडमिक डीन, स्थाई अधीक्षक की मांग को लेकर एमबीबीएस के छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार कर हड़ताल शुरू कर दी है। छात्रों ने बुधवार को मेडिकल कॉलेज के सामने धरना देते हुए कहा कि एम्स के हालात ठीक नहीं है। तीन साल से स्थायी डायरेक्टर नहीं हैं। इस वजह से छात्रहित के निर्णयों में देरी होती है। छात्र समस्याएं किससे साझा करें।


    छात्रों का आरोप है कि यदि वे समस्या के बारे में शिकायत करते हैं तो आवाज को दबाया जाता है। एमबीबीएस अंतिम वर्ष के छात्र संत गुरु प्रसाद ने बताया कि संस्थान में अकादमी कार्य से लेकर प्रशासनिक कार्य तक ठप हैं, क्योंकि यहां प्रभारी निदेशक हर समय नहीं रहते। यहां समस्या सुनने वाला ऐसा कोई नहीं है। इसी हफ्ते दो दिन तक छात्रों ने इसी मांग को लेकर आंदोलन किया था, लेकिन पुलिस व कॉलेज प्रबंधन की समझाइश के बाद वे मान गए थे।

    सोशल मीडिया पर लगाया बैन
    एम्स प्रबंधन ने कुछ छात्रों के सोशल मीडिया आंदोलन चलाने की जानकारी मिलने पर सोशल मीडिया यूज करने पर प्रतिबंध लगाया दिया है। एमबीबीएस फाइनल ईयर के तीन छात्र प्रैक्टिकल में फेल हो गए। इस पर छात्रों के एक गुप्र ने पक्षपात का आरोप लगाया। टीम बनाकर इसकी जांच की गई। छात्रों के दूसरे ग्रुप ने डीन डॉ. राजेश मलिक पर नाराजगी जाहिर करते हुए कई आरोप लगाए। छात्र स्टूडेंट यूनियन जल्द बनाने की मांग कर रहे हैं। यूनियन के चुनाव हो गए हैं, पर नतीजे जारी नहीं हुए।

    पिछले दो साल से जारी है तलाश
    प्रबंधन के मुताबिक केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग एम्स के लिए दो साल से फुलटाइम डायरेक्टर की तलाश कर रहा है। इसके लिए दो बार वैकेंसी भी जारी की गई। कुछ लोगों ने इसमें रुचि भी दिखाई, इनमें से कुछ का साक्षात्कार भी हुआ, लेकिन अंतिम समय में मामला टल गया। एक साल पहले दिल्ली एम्स के एक प्रोफेसर का निदेशक के तौर पर चयन हो भी गया था, लेकिन उन्होंने ज्वाइन करने से मना कर दिया।

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